फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   kaalee ret ko hariyaalee mein badala

काली रेत को हरियाली में बदला

Thu, 11 Nov 2021 11:42 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Nov 2021 11:42 PM IST
विज्ञापन
kaalee ret ko hariyaalee mein badala
लवेदी। मेहनत और लगन से कैसे सैकड़ों बीघे काली रेतीली भूमि को हराभरा कर सब्जियां पैदा की जा सकती है, इसकी मिसाल महेवा ब्लॉक क्षेत्र के यमुना नदी के कछार के किसानों ने पेश की है।
विज्ञापन

सैकड़ों बीघे काले रेत वाले खेतों में दिनरात मेहनत कर हरियाली (सब्जियां उगाने) के साथ अब किसानों के बैंक खातों की इबारत भी बदलने लगी है।
कछार की काली रेत को किसानों ने हरे सोने की खदान में बदल दिया है। यहां के किसान सब्जियों की आपूर्ति इटावा शहर के अलावा पड़ोसी जनपद औरैया में करके मालामाल हो रहे हैं।
विज्ञापन

थोक व्यापारी यहां से सस्ते दामों पर किसानों का उत्पाद खरीद कर मंडी तक ले जाते हैं। जहां ऊंचे भाव में बेचते हैं। यमुना नदी के कछार में महेवा ब्लॉक की सीमा पर एक दर्जन से अधिक गांव बसे हैं। जिनकी आबादी लगभग 15 हजार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यहां सभी किसानों के पास खेत हैं, ऐसा भी नहीं है। खेतों का किराया देकर भूमिहीन किसान भी सब्जी की खेती कर रहे हैं। यमुना नदी के काली रेत से भरे कछार पर अपनी मेहनत व इच्छा शक्ति के दम पर रेत में भी फसलों को लहलहाने वाले किसान दिलीप नगर, मडैया मल्लाहन, अंदावा, इकनौर, विनायकपुरा, बिलहटी, कछपुरा आदि गांव के मूल निवासी हैं।
इन किसानों की मेहनत और लगन से दूर-दूर फैले रेत के कभी सांवली चादर ओढ़े खेत अब हरे-भरे नजर आ रहे हैं। यहां की सब्जियों की आपूर्ति सदर, लखना, बकेवर, महेवा के अलावा औरैया जिले के अजीतमल में की जाती है। (संवाद)
हौसले से मिल रही सफलता
यमुना के रेत में बड़े स्तर पर तोरई, लौकी, कद्दू के अलावा दलहनी-तिलहनी और अनाज की फसल उगाई जाती है। फसल तैयार होने पर व्यापारी अपने संसाधनों से ले जाते हैं।
यमुना की तलहटी में बसे गांव दिलीपनगर निवासी पांचवीं कक्षा तक पढ़े बलबीर निषाद और केशव सिंह कहते हैं कि सब्जी और अनाज की खेती ने उनके बैंक के खाते को भी वजनी कर दिया है। कहते हैं कि हसरत से हौसला है और हौसले से ही उड़ान होती है।
नवंबर से शुुरू होती है फसल
गांव के ही रामआसरे निषाद बताते हैं कि उनके खेत यमुना की तलहटी में हैं, जिसमें तरबूज, खरबूजा, लौकी, तोरई, कद्दू समेत धान, आलू की यहां खेती नवंबर माह से शुरू होती है और मई माह तक समाप्त हो जाती है।
ऐसे बदल रही तकदीर
तीन माह पूर्व जहां 15 से 20 फीट तक बाढ़ का पानी भरा था, जिसमें किसानों की हजारों बीघा धान, बाजरा आदि फसल बर्बाद हो गई थी, आज उन्हीं काले रेत वाले खेतों को हरे सोने की खदान में बदलने के लिए संसाधन जुटाने और संवारने में किसान पसीना बहा रहे है।
नवंबर से खेती का काम शुरू होकर मई में खत्म हो जाता है। पहले उपजाऊ भूमि में रेत भरने से किसान खेती से मुंह मोड़ने लगे थे, लेकिन किसान अब नई तकनीक से खेती करने लगे हैं। जिससे काले रेत में हरी सब्जियों व रेत पर उगने वाली फसल से वे अच्छी कमाई कर रहे हैं।
कछार की मिट्टी में न तो अधिक खाद की जरूरत होती है न ही सिंचाई की। बाढ़ के इस अभिशाप को कछार के किसानों ने अपने लिए वरदान बना लिया है।
फसल की सिंचाई के लिए रेत में बोरिंग
नवंबर और दिसंबर महीना आते-आते यमुना का पानी बहुत कम हो जाता है। पानी घटने के बाद यमुना के किनारे रहने वाले किसान रेत में सब्जियों और फसलों की खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं।
दिलीपनगर गांव के किसान मालिक सिंह निषाद बताते हैं, कि धान की फसल करने के बाद सरसों की फसल नवंबर में बोई थी। अप्रैल में फसल तैयार हो जाएगी। 45 साल से यहां कठिन श्रम से दलहनी व तिलहनी और सब्जियों की खेती कर रहे हैं।
फसल सिंचाई के लिए हम लोग रेत में बोरिंग कर लेते हैं। मेहनत तो ज्यादा लगती है, लेकिन पैदावार अच्छी होती है। हर साल यहां खेती करते हैं।
कम लागत में होता है अच्छा मुनाफा
इकनौर मडैया निवासी किसान कालिका सिंह निषाद बताते हैं कि सिंचाई की कमी और बालू होने से कभी यहां के किसान अपनी इस जमीन की तरफ नहीं देखते थे, मगर अब यही जमीन उनकी आमदनी का एक बेहतर जरिया बन गई है।
किसान भी इस रेतीली जमीन पर सब्जियों और फल की खेती कर कमाई कर रहे हैं। जहां प्रदेश के किसान नई-नई तकनीक अपनाकर खेती करते हैं, वहीं छोटे किसान कम संसाधनों में भी उन्नत सब्जियों की खेती कर कम लागत में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।

जुआ तो है, लेकिन अगर यमुना मइया की कृपा हो गई तो चार-पांच माह की इस खेती में हम गरीबों का एक वर्ष की दाल-रोटी का इंतजाम हो जाता है। इस खेती में पूंजी के साथ मेहनत भी काफी करनी पड़ती है।
यह भी सही है कि अगर यमुना मइया का जलस्तर नहीं बढ़ा, तो हम लोगों की सारी मेहनत परवान भी चढ़ जाती है।
- केदार सिंह, किसान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed