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जेल में बड़े बवाल की तैयारी में थे कैदी और बंदी
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घायल डिप्टी जेलर जगदीश प्रसाद के पीठ पर चोटों के निशान
- फोटो : ETAWHA
इटावा। जेल में गैंगवार एकाएक नहीं हुआ, गुटों में तनातनी लंबे समय से चल रही थी। दोनों गुटों के कैदी और बंदी बड़े बवाल की तैयारी में थे। दोनों गुटों का मंसूबा जेल में अपनी धाक जमाने का था, लेकिन जेल प्रशासन जांच के नाम पर फिलहाल घटना पर पर्दा डाल रहा है।
आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी खालिद जेल की बैरक नंबर आठ में बंद था। राशिद उर्फ मोनू उर्फ पहाड़ी बैरक नंबर दो में था। शाम करीब सात बजे कैदियों, बंदियों की गिनती के समय खालिद उर्फ मुन्ना ने अपनी बैरक में विवाद शुरू कर दिया। डिप्टी जेलर जगदीश प्रसाद बैरक नंबर आठ में पहुंचे, तो खालिद ने गालियां बकते हुए उन्हें ही निशाना बनाया। खालिद की बैरक के बंदी भी उन पर टूट पड़े। खालिद ने डिप्टी जेलर के मुंह पर घूंसा मार दिया। इसी बीच राशिद भी अपनी बैरक से निकल कर हमलावर हो गया। राशिद और खालिद गुट के बंदी सुरक्षाकर्मियों के साथ नंबरदार छुन्ना, सत्यवीर और रामखिलावन पर टूट पड़े। दोनों ओर से जमकर डंडे चले। बवाल बड़ा होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सूचना पर एडीएम ज्ञान प्रकाश, सीओ सिटी वैभव पांडेय, सीओ सैफई चंद्रपाल फोर्स के साथ पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारी जेल के अंदर रहे।
रात करीब 8:30 बजे जेल अधीक्षक रामकिशोर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि केवल नंबरदार छुन्ना को ज्यादा चोटें आई हैं, उसे जिला अस्पताल भेजा गया है। रात करीब 8:40 बजे एसएसपी आकाश तोमर भी जेल पहुंचे। उन्होंने भी यही बात दोहराई। जेल अधीक्षक और एससपी गैंगवार को टालते रहे। बंदी राशिद की मौत के बाद करीब प्रशासन की कलई खुल गई। जेल से कई घंटे की जांच के बाद निकले डीआईजी जेल ने भी माना कि जो भी हुआ उसकी पहले से प्लानिंग भी हो सकती है। इसकी भी जांच कराई जा रही है। हालांकि उन्होंने विवाद के कारण पर फिर जांच का पर्दा डाल दिया।
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डिप्टी जेलर से छीन लिया बेंत
डिप्टी जेलर जगदीश प्रसाद के मुंह, सिर और पीठ में चोटें आई हैं। वह सैफई से इलाज कराकर गुरुवार की दोपहर में अपने घर लौट आए। डिप्टी जेलर ने बताया कि बंदियों को बैरक में बंद कर रहे थे। इसी बीच सबसे बड़ी बैरक नंबर आठ में विवाद होने लगा। डिप्टी जेलर के अनुसार वह बेंत लेकर बैरक के पास गए और बंदियों से झगड़ने का कारण पूछा। इतने में ही हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे खालिद उनकी ओर आया और मुंह पर घूंसा मार दिया। इतने में ही बैरक नंबर दो से मोनू पहाड़ी, शिवामणि प्रतापगढ़, अंकित फौजी, शिवा कानपुर, ताजुद्दीन, रामकुमार छोटे कानपुर देहात समेत 8-10 कैदी, बंदी आए और बेंत छीनकर मारपीट करने लगे। लंबरदार कैदी छुन्ना और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें किसी तरह बचाकर वहां से ले गए।
खालिद आगरा और राशिद कानपुर से लाया गया था
कैदी खालिद करीब दो साल पहले प्रशासनिक आधार पर आगरा जेल से इटावा जिला जेल लाया गया था। बंदी राशिद उर्फ मोनू पहाड़ी यहां पहले से बंद था। वह कानपुर जेल से करीब चार साल पहले प्रशासनिक आधार पर लाया गया था।
विस्तृत जांच में ही सामने आएंगे सभी तथ्य : डीआईजी
इटावा। डीआईजी जेल वेद प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि घटना में करीब 12 कर्मचारी इतनी ही संख्या में बंदी/कैदी घायल हुए हैं। इनमें कई का जेल अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। उन्होंने सुविधाओं की कमी को लेकर झगड़ा होने की बात से इंकार किया है। जब उनसे पूछा गया कि चर्चा इस बात की भी हो रही कि हाल ही जो विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत मिली है। उसमें किन्हीं चार बंदियों की रिहाई में विलंब से मामला बिगड़ने की बात कही जा रही है। डीआईजी जेल ने इस प्रकार की बात से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि घटना की विस्तृत जांच से सभी तथ्य सामने आएंगे।
डीआईजी ने बताया कि सिपाही पुरुषोत्तम के हाथ, हेड वार्डन मुन्नू सिंह व जेल वार्डन आशीष को चोटें आई हैं। तीन नंबरदार छुन्ना, सत्यवीर व रामखिलावन भी घायल हुए हैं।
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आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी खालिद जेल की बैरक नंबर आठ में बंद था। राशिद उर्फ मोनू उर्फ पहाड़ी बैरक नंबर दो में था। शाम करीब सात बजे कैदियों, बंदियों की गिनती के समय खालिद उर्फ मुन्ना ने अपनी बैरक में विवाद शुरू कर दिया। डिप्टी जेलर जगदीश प्रसाद बैरक नंबर आठ में पहुंचे, तो खालिद ने गालियां बकते हुए उन्हें ही निशाना बनाया। खालिद की बैरक के बंदी भी उन पर टूट पड़े। खालिद ने डिप्टी जेलर के मुंह पर घूंसा मार दिया। इसी बीच राशिद भी अपनी बैरक से निकल कर हमलावर हो गया। राशिद और खालिद गुट के बंदी सुरक्षाकर्मियों के साथ नंबरदार छुन्ना, सत्यवीर और रामखिलावन पर टूट पड़े। दोनों ओर से जमकर डंडे चले। बवाल बड़ा होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सूचना पर एडीएम ज्ञान प्रकाश, सीओ सिटी वैभव पांडेय, सीओ सैफई चंद्रपाल फोर्स के साथ पहुंच गए। करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारी जेल के अंदर रहे।
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रात करीब 8:30 बजे जेल अधीक्षक रामकिशोर सिंह ने पत्रकारों को बताया कि केवल नंबरदार छुन्ना को ज्यादा चोटें आई हैं, उसे जिला अस्पताल भेजा गया है। रात करीब 8:40 बजे एसएसपी आकाश तोमर भी जेल पहुंचे। उन्होंने भी यही बात दोहराई। जेल अधीक्षक और एससपी गैंगवार को टालते रहे। बंदी राशिद की मौत के बाद करीब प्रशासन की कलई खुल गई। जेल से कई घंटे की जांच के बाद निकले डीआईजी जेल ने भी माना कि जो भी हुआ उसकी पहले से प्लानिंग भी हो सकती है। इसकी भी जांच कराई जा रही है। हालांकि उन्होंने विवाद के कारण पर फिर जांच का पर्दा डाल दिया।
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डिप्टी जेलर से छीन लिया बेंत
डिप्टी जेलर जगदीश प्रसाद के मुंह, सिर और पीठ में चोटें आई हैं। वह सैफई से इलाज कराकर गुरुवार की दोपहर में अपने घर लौट आए। डिप्टी जेलर ने बताया कि बंदियों को बैरक में बंद कर रहे थे। इसी बीच सबसे बड़ी बैरक नंबर आठ में विवाद होने लगा। डिप्टी जेलर के अनुसार वह बेंत लेकर बैरक के पास गए और बंदियों से झगड़ने का कारण पूछा। इतने में ही हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे खालिद उनकी ओर आया और मुंह पर घूंसा मार दिया। इतने में ही बैरक नंबर दो से मोनू पहाड़ी, शिवामणि प्रतापगढ़, अंकित फौजी, शिवा कानपुर, ताजुद्दीन, रामकुमार छोटे कानपुर देहात समेत 8-10 कैदी, बंदी आए और बेंत छीनकर मारपीट करने लगे। लंबरदार कैदी छुन्ना और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें किसी तरह बचाकर वहां से ले गए।
खालिद आगरा और राशिद कानपुर से लाया गया था
कैदी खालिद करीब दो साल पहले प्रशासनिक आधार पर आगरा जेल से इटावा जिला जेल लाया गया था। बंदी राशिद उर्फ मोनू पहाड़ी यहां पहले से बंद था। वह कानपुर जेल से करीब चार साल पहले प्रशासनिक आधार पर लाया गया था।
विस्तृत जांच में ही सामने आएंगे सभी तथ्य : डीआईजी
इटावा। डीआईजी जेल वेद प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि घटना में करीब 12 कर्मचारी इतनी ही संख्या में बंदी/कैदी घायल हुए हैं। इनमें कई का जेल अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। उन्होंने सुविधाओं की कमी को लेकर झगड़ा होने की बात से इंकार किया है। जब उनसे पूछा गया कि चर्चा इस बात की भी हो रही कि हाल ही जो विचाराधीन बंदियों को अंतरिम जमानत मिली है। उसमें किन्हीं चार बंदियों की रिहाई में विलंब से मामला बिगड़ने की बात कही जा रही है। डीआईजी जेल ने इस प्रकार की बात से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि घटना की विस्तृत जांच से सभी तथ्य सामने आएंगे।
डीआईजी ने बताया कि सिपाही पुरुषोत्तम के हाथ, हेड वार्डन मुन्नू सिंह व जेल वार्डन आशीष को चोटें आई हैं। तीन नंबरदार छुन्ना, सत्यवीर व रामखिलावन भी घायल हुए हैं।