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रबी की फसल में पलेवा के लिए रजवहों में नहीं मिल रहा पानी
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खरीफ की फसल में अंतिम पानी नहीं मिला। अब रबी की फसल के लिए पलेवा के लिए नहर व रजबहों में पानी नहीं है। 25 दिन तक नहर में पानी का प्रवाह आने की कोई संभावना नहीं है। नरौरा पर काम चल रहे होने के चलते अधिकारी 15 दिसंबर के बाद पानी आने की बात कह रहे हैं।
बताते हैं नरौरा बांध के पास बड़ी नहर जिससे ये तीनों नहरों में पानी छोड़ा जाता है, उसमें किनारों को पक्का कराने का काम चल रहा है। जब तक काम पूरा नहीं हो जाता तब तक नहर व रजबहों में पानी नहीं आ पाएगा।
इटावा में सिंचाई के लिए भोगनीपुर निचली गंगानहर, इटावा नहर पर किसान निर्भर हैं। किसानों की कई हजार हेक्टेयर जमीन गेहूं की फसल बुवाई के इंतजार में पड़ी है। किसान पलेवा करने के लिए परेशान हैं। जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं वे निजी नलकूपों से जीन पाइप डालकर महंगी कीमत में पलेवा कर रहे हैं।
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70 फीसदी से अधिक खेतों में पलेवा के लिए नहर व रजबहों में पानी न आना किसानों के लिए समस्या बनी हुई है। किसानों की मानें तो पलेवा देर से हो पाने से फसल की बुवाई लेट हो रही है। गेहूं की फसल की बुवाई का सबसे उत्तम समय 15 से 25 नवंबर होता है। उसके बाद गेहूं की बुवाई लेट मानी जाती है।
किसान रज्जन तिवारी कहते हैं कि इस साल सिंचाई विभाग ने किसानों की कमर तोड़ दी। इस साल पानी का प्रवाह जल्दी बंद कर दिया। अब गेहूं के लिए खेतों में पलेवा करने के लिए किसान परेशान हैं।
ग्राम गौतमपुरा निवासी उन्नतशील किसान प्रभु शंकर त्रिपाठी का कहना है उनकी 70 बीघा में गेहूं की बुवाई होनी है। हर में पानी न आने से पलेवा नहीं हो पा रहा है। किसानों को महंगे भाव से पानी नलकूप से लगाकर खेतों में पलेवा करना पड़ रहा है। इससे गेहूं की फसल की बुवाई में देरी होगी।
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह के अनुसार जिले में 96 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में गेहूं की फसल बोई जाती है। अभी तक करीब 52 फीसदी रकबे में गेहूं की फसल की बुवाई हो चुकी है।
पिछले दिनों प्रमुख सचिव कृषि के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान ये समस्या रखी गई थीं। उन्होंने इसको सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव तक पहुंचने की बात कही थी। अगर देखा जाए तो कृषि विभाग के आंकड़ों के उलट अभी मात्र 30 से 35 फीसदी रकबे में ही गेहूं की बुवाई हो पाई है।
इस संबंध में भोगिनीपुर निचली गंगानहर के अधिशासी अभियंता रामसागर ने बताया कि अभी पानी सूखने के बाद सभी नहर व रजबहों की सफाई का काम चल रहा है।
सफाई हो जाने के बाद दिसंबर के महीने कभी भी पानी नहर व रजबहों में आ सकता है। क्षेत्रीय विधायक सावित्री कठेरिया से जानकारी करने पर उन्होंने कहा कि किसानों को इस समय सिंचाई के लिए पानी की बेहद आवश्यकता है। वे नहर में रजबहों में पानी के लिए सिंचाई मंत्री से बात कर जल्द से जल्द पानी छुड़वाने को कहेंगी।
सितंबर से नवंबर तक दो महीने में सिंचाई विभाग के नहरों रजबहों की सफाई नहीं कर पाया। किसानों के अनुसार भोगिनीपुर निचली गंगानहर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में पानी का प्रवाह बंद हो गया था।
अब विभाग नहर व रजबहा की सफाई होने की बात कह रहा है। पिछले दो माह के समय में विभाग नहर व रजबहों की सफाई का काम भी नहीं करा सकता था। अब जब किसानों को पानी की आवश्यकता है तो नहर व रजबहों की सफाई कराई जा रही है।
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बताते हैं नरौरा बांध के पास बड़ी नहर जिससे ये तीनों नहरों में पानी छोड़ा जाता है, उसमें किनारों को पक्का कराने का काम चल रहा है। जब तक काम पूरा नहीं हो जाता तब तक नहर व रजबहों में पानी नहीं आ पाएगा।
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इटावा में सिंचाई के लिए भोगनीपुर निचली गंगानहर, इटावा नहर पर किसान निर्भर हैं। किसानों की कई हजार हेक्टेयर जमीन गेहूं की फसल बुवाई के इंतजार में पड़ी है। किसान पलेवा करने के लिए परेशान हैं। जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं वे निजी नलकूपों से जीन पाइप डालकर महंगी कीमत में पलेवा कर रहे हैं।
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70 फीसदी से अधिक खेतों में पलेवा के लिए नहर व रजबहों में पानी न आना किसानों के लिए समस्या बनी हुई है। किसानों की मानें तो पलेवा देर से हो पाने से फसल की बुवाई लेट हो रही है। गेहूं की फसल की बुवाई का सबसे उत्तम समय 15 से 25 नवंबर होता है। उसके बाद गेहूं की बुवाई लेट मानी जाती है।
किसान रज्जन तिवारी कहते हैं कि इस साल सिंचाई विभाग ने किसानों की कमर तोड़ दी। इस साल पानी का प्रवाह जल्दी बंद कर दिया। अब गेहूं के लिए खेतों में पलेवा करने के लिए किसान परेशान हैं।
ग्राम गौतमपुरा निवासी उन्नतशील किसान प्रभु शंकर त्रिपाठी का कहना है उनकी 70 बीघा में गेहूं की बुवाई होनी है। हर में पानी न आने से पलेवा नहीं हो पा रहा है। किसानों को महंगे भाव से पानी नलकूप से लगाकर खेतों में पलेवा करना पड़ रहा है। इससे गेहूं की फसल की बुवाई में देरी होगी।
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह के अनुसार जिले में 96 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में गेहूं की फसल बोई जाती है। अभी तक करीब 52 फीसदी रकबे में गेहूं की फसल की बुवाई हो चुकी है।
पिछले दिनों प्रमुख सचिव कृषि के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान ये समस्या रखी गई थीं। उन्होंने इसको सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव तक पहुंचने की बात कही थी। अगर देखा जाए तो कृषि विभाग के आंकड़ों के उलट अभी मात्र 30 से 35 फीसदी रकबे में ही गेहूं की बुवाई हो पाई है।
इस संबंध में भोगिनीपुर निचली गंगानहर के अधिशासी अभियंता रामसागर ने बताया कि अभी पानी सूखने के बाद सभी नहर व रजबहों की सफाई का काम चल रहा है।
सफाई हो जाने के बाद दिसंबर के महीने कभी भी पानी नहर व रजबहों में आ सकता है। क्षेत्रीय विधायक सावित्री कठेरिया से जानकारी करने पर उन्होंने कहा कि किसानों को इस समय सिंचाई के लिए पानी की बेहद आवश्यकता है। वे नहर में रजबहों में पानी के लिए सिंचाई मंत्री से बात कर जल्द से जल्द पानी छुड़वाने को कहेंगी।
सितंबर से नवंबर तक दो महीने में सिंचाई विभाग के नहरों रजबहों की सफाई नहीं कर पाया। किसानों के अनुसार भोगिनीपुर निचली गंगानहर में सितंबर के अंतिम सप्ताह में पानी का प्रवाह बंद हो गया था।
अब विभाग नहर व रजबहा की सफाई होने की बात कह रहा है। पिछले दो माह के समय में विभाग नहर व रजबहों की सफाई का काम भी नहीं करा सकता था। अब जब किसानों को पानी की आवश्यकता है तो नहर व रजबहों की सफाई कराई जा रही है।