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पिटी पुलिस ने घुटने टेके
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:44 PM IST
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एसएसआई पर हमला करने वालों की गिरफ्तारी के लिए शनिवार की रात सिविल लाइन, कोतवाली और क्राइम ब्रांच का भारी भरकम फोर्स तकिया आजादगान पर पहुंचा था। पुलिस कर्मियों को इसका कतई अंदाजा नहीं था कि अराजकतत्व फोर्स पर ही हमला कर देंगे।
पथराव से थानाध्यक्ष का सिर फूटने और सिपाही के घायल होने के बाद पुलिस छिपती छिपाती वहां से भागी। इसके बाद रात के अंधेरे में सीओ सिटी सिद्धार्थ वर्मा समाज के कुछ प्रबुद्धजनों के साथ तकिया पर पहुंचे और बातचीत करते रहे। सवाल यह उठता है कि ऐसी कौन सी वजह थी कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया।
अफसर चाहते तो अन्य थानों का फोर्स और पीएसी बुलाकर अराजकतत्वों को उनकी ही भाषा में जवाब दे सकते थे। शनिवार की रात गुजरने के बाद रविवार का पूरा दिन गुजर गया और अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। इस पूरे घटनाक्रम से जिले भर में खाकी की खासी किरकिरी हुई है। सभी के मुंह पर यही सवाल है कि आखिर पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही।
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प्लाट को लेकर शुरू हुआ था विवाद
कोतवाली क्षेत्र के तकिया आजादगान पर डॉ. विनोद के पड़ोस में मेन रोड पर स्थित प्लाट को कुछ समय पहले राजेंद्र सिंह पुत्र स्व. महेंद्र सिंह निवासी कूंचा शीलचंद्र कोतवाली ने खरीदा था। शनिवार की दोपहर वह प्लाट में निर्माण कार्य के लिए पहुंचे तो आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने प्लाट पर अपना मालिकाना हक जताकर निर्माण कार्य का विरोध किया।
इस पर राजेंद्र सिंह ने शनिवार की दोपहर प्लाट विक्रेता को बुलाया। इसी बीच मालिकाना हक जताने वाले यहां हंगामा करने लगे। राजेंद्र ने इसकी सूचना पुलिस को दी तो कोतवाली के एसएसआई श्यामवीर सिंह दो सिपाहियों को लेकर मौके पर पहुंचे। एकत्रित होकर मालिकाना हक जताने वालों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया और एसएसआई के साथ मारपीट की।
शनिवार की रात को पुलिस टीमें एसएसआई के साथ मारपीट करने वाले मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए उसके घर दबिश देने के लिए पहुंची थी। आरोपी को पकड़े जाने से समुदाय विशेष के लोग एकत्रित हो गए और पुलिस टीम पर हमला कर दिया।
इस पूरे मामले को लेकर कोतवाली में राजेंद्र सिंह ने मुन्ना निवासी कटरा शमशेर खां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ एकजुट होकर उसके साथ गाली गलौज की। जानमाल की धमकी देते हुए जमीन के बारे में रंगदारी के रूप में दो लाख रुपये की मांग की।
रेफर रिम्स के लिए, पहुंचाया घर
सूत्रों से खबर है कि पुलिस पार्टी पर दो बार हमला होने के बाद अफसर और पुलिस राजनीतिक प्रेशर के कारण कार्रवाई नहीं कर पा रही है। गंभीर रूप से घायल सिविल लाइन थानाध्यक्ष विनोद यादव के सिर में करीब सात टांके लगे हैं। जिला अस्पताल से डाक्टरों ने उन्हें मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर किया था, लेकिन पुलिस उन्हें रिम्स ले जाने की बजाय उनके सरकारी क्वार्टर ले गई। सूत्रों से खबर है कि एसओ के रिम्स में भर्ती रहने से मामला मीडिया में उछल सकता था। राजनीतिक प्रेशर के चलते उन्हें वहां भर्ती नहीं कराया गया।
क्यों नहीं दिखा पुरबिया टोला वाला रूप
तकिया पर शनिवार की रात जो पिटी यह वही पुलिस है जिसने शहर के पुरबिया टोला मोहल्ले में बहादुरी दिखाई थी। 26 अक्तूबर 2014 की रात शहर में दो पक्षों के बीच मारपीट की घटना के बाद एक पक्ष के लोगों ने उत्पात मचाया था। इस घटना के बाद इसी पुलिस ने रात के अंधेरे में पुरबिया टोला के घर-घर में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा। पुरबिया टोला में बहादुरी दिखाने वाली पुलिस यहां कायर नजर आई। दो बार पिटने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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पथराव से थानाध्यक्ष का सिर फूटने और सिपाही के घायल होने के बाद पुलिस छिपती छिपाती वहां से भागी। इसके बाद रात के अंधेरे में सीओ सिटी सिद्धार्थ वर्मा समाज के कुछ प्रबुद्धजनों के साथ तकिया पर पहुंचे और बातचीत करते रहे। सवाल यह उठता है कि ऐसी कौन सी वजह थी कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया।
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अफसर चाहते तो अन्य थानों का फोर्स और पीएसी बुलाकर अराजकतत्वों को उनकी ही भाषा में जवाब दे सकते थे। शनिवार की रात गुजरने के बाद रविवार का पूरा दिन गुजर गया और अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर पाए। इस पूरे घटनाक्रम से जिले भर में खाकी की खासी किरकिरी हुई है। सभी के मुंह पर यही सवाल है कि आखिर पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही।
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प्लाट को लेकर शुरू हुआ था विवाद
कोतवाली क्षेत्र के तकिया आजादगान पर डॉ. विनोद के पड़ोस में मेन रोड पर स्थित प्लाट को कुछ समय पहले राजेंद्र सिंह पुत्र स्व. महेंद्र सिंह निवासी कूंचा शीलचंद्र कोतवाली ने खरीदा था। शनिवार की दोपहर वह प्लाट में निर्माण कार्य के लिए पहुंचे तो आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने प्लाट पर अपना मालिकाना हक जताकर निर्माण कार्य का विरोध किया।
इस पर राजेंद्र सिंह ने शनिवार की दोपहर प्लाट विक्रेता को बुलाया। इसी बीच मालिकाना हक जताने वाले यहां हंगामा करने लगे। राजेंद्र ने इसकी सूचना पुलिस को दी तो कोतवाली के एसएसआई श्यामवीर सिंह दो सिपाहियों को लेकर मौके पर पहुंचे। एकत्रित होकर मालिकाना हक जताने वालों ने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया और एसएसआई के साथ मारपीट की।
शनिवार की रात को पुलिस टीमें एसएसआई के साथ मारपीट करने वाले मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए उसके घर दबिश देने के लिए पहुंची थी। आरोपी को पकड़े जाने से समुदाय विशेष के लोग एकत्रित हो गए और पुलिस टीम पर हमला कर दिया।
इस पूरे मामले को लेकर कोतवाली में राजेंद्र सिंह ने मुन्ना निवासी कटरा शमशेर खां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ एकजुट होकर उसके साथ गाली गलौज की। जानमाल की धमकी देते हुए जमीन के बारे में रंगदारी के रूप में दो लाख रुपये की मांग की।
रेफर रिम्स के लिए, पहुंचाया घर
सूत्रों से खबर है कि पुलिस पार्टी पर दो बार हमला होने के बाद अफसर और पुलिस राजनीतिक प्रेशर के कारण कार्रवाई नहीं कर पा रही है। गंभीर रूप से घायल सिविल लाइन थानाध्यक्ष विनोद यादव के सिर में करीब सात टांके लगे हैं। जिला अस्पताल से डाक्टरों ने उन्हें मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर किया था, लेकिन पुलिस उन्हें रिम्स ले जाने की बजाय उनके सरकारी क्वार्टर ले गई। सूत्रों से खबर है कि एसओ के रिम्स में भर्ती रहने से मामला मीडिया में उछल सकता था। राजनीतिक प्रेशर के चलते उन्हें वहां भर्ती नहीं कराया गया।
क्यों नहीं दिखा पुरबिया टोला वाला रूप
तकिया पर शनिवार की रात जो पिटी यह वही पुलिस है जिसने शहर के पुरबिया टोला मोहल्ले में बहादुरी दिखाई थी। 26 अक्तूबर 2014 की रात शहर में दो पक्षों के बीच मारपीट की घटना के बाद एक पक्ष के लोगों ने उत्पात मचाया था। इस घटना के बाद इसी पुलिस ने रात के अंधेरे में पुरबिया टोला के घर-घर में दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा। पुरबिया टोला में बहादुरी दिखाने वाली पुलिस यहां कायर नजर आई। दो बार पिटने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।