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अल्लाह से मोहब्बत करते हो तो रसूल की पैरवी करो
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तकरीर करते मौलाना अनवारूल हसन जैदी
- फोटो : ETAWHA
इटावा। शहर में घटिया अजमत अली स्थित इमाम बारगाह पर समी रजा की ओर से मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें तकरीर करते हुए मौलाना अनवारुल हसन जैदी ने कहा अल्लाह से मोहब्बत करते हो तो रसूल की पैरवी करो और जो रसूल ने कहा उस पर अमल करो। आज इमाम हुसैन अल्लाह की राह में रसूल अल्लाह से जुदा हुए और मदीना से रुखसत होकर कर्बला का सफर किया। इमाम हुसैन का मकसद क्या है इसे महसूस करना होगा।
कहा रसूल अल्लाह की हिजरत इस्लाम को फैलाने और इमाम हुसैन की हिजरत इस्लाम को बचाने के लिए थी। रसूल अल्लाह ने फरमाया मैं हुसैन से और हुसैन हमसे हैं। इमाम हुसैन ने रसूल अल्लाह, मौला अली की सीरत को कायम रखने और रसूल अल्लाह की उम्मत की इस्लाह के लिए मदीना छोड़ा। इमाम हुसैन को हाकिमे शाम ने समझौता करने के लिए दरबार मे बुलाया, हुसैन ने हाकिमे शाम से समझौता करने से इंकार कर दिया।
नबी फरमाते हैं शाबान का महीना मेरा महीना है जो शख्स रोजा रखे और रमजान से मिला दे उसकी हम जन्नत में दाखिले की जमानत देते हैं। कर्बला ने हमें बताया मानवता व इंसानियत क्या है। मजलिस में सोज ख्वानी तस्लीम रजा, सलीम रजा, जहूर नक़वी ने की। अख्तर अब्बास मोंटू, तालिब रजा, आबिद रजा ने कलाम पेश किए। तनवीर हसन ने नोहा ख्वानी की। अरशद मरगूब, राहत अक़ील, शावेज नक़वी, समर अब्बास, राहत हुसैन रिजवी, मुशीर हैदर, शहजादे, तहसीन रजा आदि ने शिरकत की।
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कहा रसूल अल्लाह की हिजरत इस्लाम को फैलाने और इमाम हुसैन की हिजरत इस्लाम को बचाने के लिए थी। रसूल अल्लाह ने फरमाया मैं हुसैन से और हुसैन हमसे हैं। इमाम हुसैन ने रसूल अल्लाह, मौला अली की सीरत को कायम रखने और रसूल अल्लाह की उम्मत की इस्लाह के लिए मदीना छोड़ा। इमाम हुसैन को हाकिमे शाम ने समझौता करने के लिए दरबार मे बुलाया, हुसैन ने हाकिमे शाम से समझौता करने से इंकार कर दिया।
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नबी फरमाते हैं शाबान का महीना मेरा महीना है जो शख्स रोजा रखे और रमजान से मिला दे उसकी हम जन्नत में दाखिले की जमानत देते हैं। कर्बला ने हमें बताया मानवता व इंसानियत क्या है। मजलिस में सोज ख्वानी तस्लीम रजा, सलीम रजा, जहूर नक़वी ने की। अख्तर अब्बास मोंटू, तालिब रजा, आबिद रजा ने कलाम पेश किए। तनवीर हसन ने नोहा ख्वानी की। अरशद मरगूब, राहत अक़ील, शावेज नक़वी, समर अब्बास, राहत हुसैन रिजवी, मुशीर हैदर, शहजादे, तहसीन रजा आदि ने शिरकत की।
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