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उम्मीद है कोई नहीं लौटाएगा सम्मान-राम नाईक
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
Updated Sat, 14 Nov 2015 11:11 PM IST
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इटावा। साहित्यिक मंच पर भी प्रदेश राज्यपाल रामनाईक राजनैतिक चुटकी लेने से नहीं चूूके। अपने संबोधन में उन्होंने पुरस्कार लौटाने के चर्चित घटनाक्रम पर यह कहकर तंज कसा कि उन्हें उम्मीद है कि यहां जिसे भी सम्मानित किया गया है वह अपने सम्मान नहीं लौटाएगा। उनकी इस बात पर पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। हालांकि श्री नाईक ने अपने पूरे उद्बोधन में हिंदी के प्रचार प्रसार से जुड़ी बातें ही कहीं। वह खुद बोले कि यह मंच विशुद्घ रूप से साहित्यिक है, इसलिए केवल साहित्य की ही चर्चा होगी।
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श्री नाईक ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में हिंदी का व्यापक विस्तार हुआ है। यहां सम्मानित किए हिंदी मनीषियों के विविध आयाम यह दर्शातेे भी हैं। अर्से से यह मिथ बना हुआ था कि न्यायपालिका व वैज्ञानिक क्षेत्र में हिंदी का प्रयोग संभव नहीं होगा। जिसे न्यायमूर्ति स्व प्रेमशंकर गुप्त ने कम से कम न्यायपालिका क्षेत्र में तो तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक क्षेत्र में भी हिंदी को बढ़ावा मिलना चाहिए। क्योंकि हिंदी जन जन की भाषा है। हिंदी संस्कृत की बड़ी बेटी है और क्षेत्रीय भाषाएं हिंदी की बहनें हैं।
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श्री नाईक ने कहा कि हिंदी जितनी विकसित हो, देश का उतना ही लाभ मिलेगा। उन्होंने पीएम मोदी के इंग्लैंड दौरे का हवाला देते हुए कहा कि आज हिंदी विदेशों में भी अपनी धाक जमा रही है। इंग्लैंड के पीएम ने भी हिंदी में कहा कि अच्छे दिन आ रहे हैं। अब तकनीक के क्षेत्र में हिंदी के विकास की जरूरत है। निधि के महासचिव प्रदीप कुमार गुप्त की भाषा विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी मांग पर श्री नाईक ने कहा कि वह करीब 25 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं। इसलिए इतना अवश्य कहेंगे कि इन विश्व विद्यालयों में हिंदी भाषा को लेकर सुधार करते रहेंगे।
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