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गोशालाएं खालीं, दावे खोखले
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खेल का मैदान बनी उरैँग गोशाला
- फोटो : ETAWAH
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निवाड़ीकला। किसानों और ट्रैफिक को छुट्टा गोवंशों से बचाने के लिए बनाई गई गोशालाएं सिर्फ चहारदीवारी तक ही सिमट कर रह गई हैं। करोड़ों की लागत से बनी इन गोशालाओं में गोवंश ही नहीं है।
ब्लॉक के अधिकारी दावा करते है कि छुट्टा गोवंश को जल्द ही गोशालाओं में भेजा जाएगा। ब्लॉक महेवा क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा गोवंश आज भी सड़कों पर विचरण करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
जो किसानों और राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। किसानों की माने तो गोवंश के लिए बनी गोशालाएं सिर्फ खानापूरी और कमीशन खोरी को बढ़ावा दे रही है।
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सबसे बड़े ब्लॉक महेवा में एक अस्थायी गोशाला समेत 19 गोशालाओं की शुरुआत की गई थी। शुरुआती दौर में इन गोशालाओं का संचालन बड़े शौक से किया गया।
दिन बीतते गए और गोशालाओं के बंद होने का सिलसिला भी बढ़ता गया। वर्तमान में ब्लॉक में सिर्फ आठ गोशालाएं ही संचालित की जा रही हैं। 11 गोशालाओं को ब्लॉक प्रशासन ने बंद कर दिया, जिनमें से कुछ गोशालाओं में सिर्फ नाम मात्र के ही गोवंश मौजूद है।
अधिकारियों की निगाह में इन गोशालाओं में 550 से अधिक गोवंश मौजूद है। इससे सैकड़ों ज्यादा गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
किसान रामेश्वर दयाल, अजब सिंह, राहुल, अवधेश, बलबीर सिंह, जगदीश का कहना है कि ब्लॉक में जो गोशालाएं बंद हैं, उन्हें चालू कराए जाए, तभी किसानों की समस्याएं कम होगी।
कहा कि अधिकारियों के झूठे आश्वासन से कुछ होने वाला नहीं है। वही दूसरी और ब्लॉक के अधिकारी जल्द ही गोशालाएं शुरू करने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
गोशालाओं पर एक नजर
उरैंग गोशाला को खाली हुए काफी समय बीत गया है। गोशाला की दीवार गिर गई है और दरवाजा भी टूट गया है। युवाओं ने गोशाला को खेल का मैदान बना दिया। अब इसमें प्रतिदिन वॉलीबाल खेला जाता है। कई बार किसानों ने गोशाला का जीर्णोद्धार करवाने की मांग की, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
खितौरा गोशाला जब से बनाई गई, तब से लेकर आज तक यहां एक भी मवेशी बंद नहीं किए गए। कई बार लोगों ने गोशाला को शुरू करने की मांग की। अधिकारी किसानों को टरकाते रहे और किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए रतजगा करते रहे।
नागरीलोलपुर की गोशाला भी महीनों से बंद पड़ी है। वर्ष 2020 में अहेरीपुर गोशाला में जलभराव की स्थिति होने पर गोवंशों को यहां शिफ्ट कर दिया गया। अहेरीपुर की गोशाला शुरू होते ही खाली करवा दिया गया। वर्षों बीतने के बाद भी इस गोशाला में गोवंश नहीं भरे जा सके ।
ग्राम पंचायत महेवा में बनाई गई अस्थायीगोशाला भी कुछ महीनों तक ठीक ठाक चलाई गई। स्थानीय प्रशासन की हीलाहवाली से इसको भी बंद कर दिया गया। ग्रामीणों ने कई बार अस्थायी गोशाला को चालू कराने की मांग की। नतीजा सिफर रहा।
जिलाधिकारी के आदेशानुसार छुट्टा गोवंश को अभियान चलाकर गोशालाओं में बंद करवाया जाएगा।
-डॉ. शरद, पशु चिकित्साधिकारी।
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ब्लॉक के अधिकारी दावा करते है कि छुट्टा गोवंश को जल्द ही गोशालाओं में भेजा जाएगा। ब्लॉक महेवा क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा गोवंश आज भी सड़कों पर विचरण करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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जो किसानों और राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। किसानों की माने तो गोवंश के लिए बनी गोशालाएं सिर्फ खानापूरी और कमीशन खोरी को बढ़ावा दे रही है।
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सबसे बड़े ब्लॉक महेवा में एक अस्थायी गोशाला समेत 19 गोशालाओं की शुरुआत की गई थी। शुरुआती दौर में इन गोशालाओं का संचालन बड़े शौक से किया गया।
दिन बीतते गए और गोशालाओं के बंद होने का सिलसिला भी बढ़ता गया। वर्तमान में ब्लॉक में सिर्फ आठ गोशालाएं ही संचालित की जा रही हैं। 11 गोशालाओं को ब्लॉक प्रशासन ने बंद कर दिया, जिनमें से कुछ गोशालाओं में सिर्फ नाम मात्र के ही गोवंश मौजूद है।
अधिकारियों की निगाह में इन गोशालाओं में 550 से अधिक गोवंश मौजूद है। इससे सैकड़ों ज्यादा गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
किसान रामेश्वर दयाल, अजब सिंह, राहुल, अवधेश, बलबीर सिंह, जगदीश का कहना है कि ब्लॉक में जो गोशालाएं बंद हैं, उन्हें चालू कराए जाए, तभी किसानों की समस्याएं कम होगी।
कहा कि अधिकारियों के झूठे आश्वासन से कुछ होने वाला नहीं है। वही दूसरी और ब्लॉक के अधिकारी जल्द ही गोशालाएं शुरू करने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
गोशालाओं पर एक नजर
उरैंग गोशाला को खाली हुए काफी समय बीत गया है। गोशाला की दीवार गिर गई है और दरवाजा भी टूट गया है। युवाओं ने गोशाला को खेल का मैदान बना दिया। अब इसमें प्रतिदिन वॉलीबाल खेला जाता है। कई बार किसानों ने गोशाला का जीर्णोद्धार करवाने की मांग की, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
खितौरा गोशाला जब से बनाई गई, तब से लेकर आज तक यहां एक भी मवेशी बंद नहीं किए गए। कई बार लोगों ने गोशाला को शुरू करने की मांग की। अधिकारी किसानों को टरकाते रहे और किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए रतजगा करते रहे।
नागरीलोलपुर की गोशाला भी महीनों से बंद पड़ी है। वर्ष 2020 में अहेरीपुर गोशाला में जलभराव की स्थिति होने पर गोवंशों को यहां शिफ्ट कर दिया गया। अहेरीपुर की गोशाला शुरू होते ही खाली करवा दिया गया। वर्षों बीतने के बाद भी इस गोशाला में गोवंश नहीं भरे जा सके ।
ग्राम पंचायत महेवा में बनाई गई अस्थायीगोशाला भी कुछ महीनों तक ठीक ठाक चलाई गई। स्थानीय प्रशासन की हीलाहवाली से इसको भी बंद कर दिया गया। ग्रामीणों ने कई बार अस्थायी गोशाला को चालू कराने की मांग की। नतीजा सिफर रहा।
जिलाधिकारी के आदेशानुसार छुट्टा गोवंश को अभियान चलाकर गोशालाओं में बंद करवाया जाएगा।
-डॉ. शरद, पशु चिकित्साधिकारी।

खाली खेत में एकत्रित दर्जनो गोवंश- फोटो : ETAWAH

पेवली मार्ग पर बैठे गोवंश- फोटो : ETAWAH

गोवंश से फसलो को बचाने ले लिए कुछ इस तरह खेतो में पुतले लगाए है किसानों ने ।- फोटो : ETAWAH