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पूर्व विधायक अशोक दुबे का निधन, शवयात्रा में उमड़ा जनसैलाब
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भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक अशोक दुबे का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह करीब 68 वर्ष के थे।
शनिवार की सुबह उनकी मौत की खबर जैसे ही फैली लोग शोक संवेदना व्यक्त करने अशोक नगर स्थित उनके आवास पर उमड़ पड़े। दोपहर में शव यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। यमुना तट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ।
ग्राम चिरुहूली जनपद औरैया में जन्मे अशोक दुबे का बचपन ननिहाल बसरेहर क्षेत्र के ग्राम सिरसा में बीता। केके डिग्री कालेज से उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वह सबसे कम उम्र के सहकारी समिति सिरसा के अध्यक्ष भी बने।
ग्रामीण बैंक में शाखा प्रबंधक रहे। राजनीति के चलते नौकरी छोड़ दी। 1989 में राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तारी के बाद जेल भी गए। 1989 में यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अशोक दुबे को सदर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।
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दो वर्ष बाद 1991 में प्रदेश में फिर से हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सदर इटावा विधानसभा सीट से अशोक दुबे पर एक बार फिर से दांव आजमाया और इस बार यूपी में राम लहर चलने की वजह से वह मुलायम सिंह यादव के गढ़ में पहली बार विजयश्री हासिल कर कमल खिलाने में सफल रहे।
इस जीत के साथ उनका कद पार्टी में बढ़ता चला गया। भाजपा ने 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार इटावा सदर सीट से प्रत्याशी बनाया। लेकिन वह हार गए। बढ़ते कद की वजह से ही भाजपा ने अशोक दुबे को 1996 में एमएलसी बनाकर विधान परिषद में भेजा। 2012 में अशोक दुबे ने अंतिम बार इटावा सदर सीट से फिर से भाजपा की ओर से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
वह अपने पीछे पत्नी कुसुम के अलावा पुत्र अंशुल दुबे को छोड़ गए। उनकी दो पुत्रियां भी हैं और दोनों की शादी हो चुकी हैं। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
यमुना तट पर सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया, सांसद देवेंद्र सिंह भोले, पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय धाकरे, शिव महेश दुबे, गजेंद्र मिश्रा, डॉ. अजट सिंह यादव, कुमदेश चंद्र यादव, महेश तनेजा आदि लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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शनिवार की सुबह उनकी मौत की खबर जैसे ही फैली लोग शोक संवेदना व्यक्त करने अशोक नगर स्थित उनके आवास पर उमड़ पड़े। दोपहर में शव यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। यमुना तट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ।
ग्राम चिरुहूली जनपद औरैया में जन्मे अशोक दुबे का बचपन ननिहाल बसरेहर क्षेत्र के ग्राम सिरसा में बीता। केके डिग्री कालेज से उन्होंने छात्र राजनीति शुरू की। वह सबसे कम उम्र के सहकारी समिति सिरसा के अध्यक्ष भी बने।
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ग्रामीण बैंक में शाखा प्रबंधक रहे। राजनीति के चलते नौकरी छोड़ दी। 1989 में राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तारी के बाद जेल भी गए। 1989 में यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अशोक दुबे को सदर विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।
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दो वर्ष बाद 1991 में प्रदेश में फिर से हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सदर इटावा विधानसभा सीट से अशोक दुबे पर एक बार फिर से दांव आजमाया और इस बार यूपी में राम लहर चलने की वजह से वह मुलायम सिंह यादव के गढ़ में पहली बार विजयश्री हासिल कर कमल खिलाने में सफल रहे।
इस जीत के साथ उनका कद पार्टी में बढ़ता चला गया। भाजपा ने 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार इटावा सदर सीट से प्रत्याशी बनाया। लेकिन वह हार गए। बढ़ते कद की वजह से ही भाजपा ने अशोक दुबे को 1996 में एमएलसी बनाकर विधान परिषद में भेजा। 2012 में अशोक दुबे ने अंतिम बार इटावा सदर सीट से फिर से भाजपा की ओर से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
वह अपने पीछे पत्नी कुसुम के अलावा पुत्र अंशुल दुबे को छोड़ गए। उनकी दो पुत्रियां भी हैं और दोनों की शादी हो चुकी हैं। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
यमुना तट पर सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया, सांसद देवेंद्र सिंह भोले, पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय धाकरे, शिव महेश दुबे, गजेंद्र मिश्रा, डॉ. अजट सिंह यादव, कुमदेश चंद्र यादव, महेश तनेजा आदि लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।