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असहायों की मदद करने वालों का ही रोजा होता कुबूल : मौलाना जाहिद रजा
Wed, 13 Mar 2024 01:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Wed, 13 Mar 2024 01:18 AM IST
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इटावा। सोमवार शाम चांद का दीदार होते ही मंगलवार से रमजान का महीना शुरू हो गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने उत्साह के साथ रोजा रखा। सहरी करके रोजे की नियत के साथ दिन की शुरूआत की गई। मस्जिदों में नमाज अदा करके रोजेदारों ने अमन-ओ-अमान की दुआ मांगी।
पहले दिन का रोजा 13 घंटे 9 मिनट का रहा। पंजाबियान मस्जिद के इमाम मौलाना जाहिद रजा ने बताया कि सिर्फ भूखे रहकर रोजा रखना इबादत नहीं है। रोजा पूरे शरीर का होता है। इस दौरान पांच वक्त की नमाज और कुरान की तिलावत करने के साथ ही गरीब व असहाय की मदद करने वालों का ही रोजा और इबादत अल्लाह कुबूल करते हैं। माह-ए-रमजान का महीना बड़ी बरकतों वाला है। इस माह की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अल्लाह ने मुकद्दस कुरान को इसी माह नाजिल किया था। पहले रोजे से लेकर 10 तक को रहमत का अशरा, 11 से लेकर 20 रोजे तक को मगफिरत और 21 से 30 तक के रोजे को जहन्नम की आग से निजात का अशरा माना गया है।
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पहले दिन का रोजा 13 घंटे 9 मिनट का रहा। पंजाबियान मस्जिद के इमाम मौलाना जाहिद रजा ने बताया कि सिर्फ भूखे रहकर रोजा रखना इबादत नहीं है। रोजा पूरे शरीर का होता है। इस दौरान पांच वक्त की नमाज और कुरान की तिलावत करने के साथ ही गरीब व असहाय की मदद करने वालों का ही रोजा और इबादत अल्लाह कुबूल करते हैं। माह-ए-रमजान का महीना बड़ी बरकतों वाला है। इस माह की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अल्लाह ने मुकद्दस कुरान को इसी माह नाजिल किया था। पहले रोजे से लेकर 10 तक को रहमत का अशरा, 11 से लेकर 20 रोजे तक को मगफिरत और 21 से 30 तक के रोजे को जहन्नम की आग से निजात का अशरा माना गया है।
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