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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Farmers who do not come to sell potatoes at purchasing centers

क्रय केंद्रों पर आलू बेचने नहीं पहुंचे किसान

Thu, 08 Mar 2018 11:41 PM IST
etawh
etawh Updated Thu, 08 Mar 2018 11:41 PM IST
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इटावा। समर्थन मूल्य पर आलू की खरीद करने के लिए जिले में तहसील स्तर पर क्रय केंद्र खुल गए हैं लेकिन अभी तक इन क्रय केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हुई है। किसान अपने आलू बेचने के लिए केंद्र नहीं पहुंचे हैं। इसका कारण बाजार में आलू के दामों में उछाल बताया जा रहा है। इसकी वजह से किसान थोक मंडी में ही आलू बेच रहे हैं। 
प्रदेश सरकार ने आलू की खरीद योजना शुरू की है। इसके लिए समर्थन मूल्य 549 रुपये घोषित किया है। पहली मार्च से 31 मार्च तक इन क्रय केंद्रों पर आलू की खरीद की जानी है। इसके लिए जिले में केंद्र खोले गए हैं। जिले में मंगलवार को चार केंद्र खोल दिए गए थे। पीसीएफ के इन चारों क्रय केंद्रों पर आलू की खरीद के लिए संस्था का स्टाफ भी मौजूद रहा। कर्मचारी किसानों का इंतजार करते रहे परंतु को नहीं आया। आलू क्रय केंद्र खुलने से बाजार में ही आलू के भाव बढ़ गए हैं। खुले बाजार में आलू की दरें अचानक 900-1000 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। हालांकि अभी तक बाजार में आलू का भाव 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर था। 
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पीसीएफ के जिला प्रबंधक शरद सिंह ने बताया कि आलू की खरीद के लिए चार क्रय केंद्र खोले गए है ंमगर किसी भी केंद्र पर कोई भी किसान आलू बेचने नहीं आया। उन्होंने बताया कि कर्मचारी गांव-गांव किसानों से संपर्क करने गए लेकिन मार्केट में आलू के रेट अधिक होने कारण किसानों ने क्रय केंद्रों पर आलू बेचने से इनकार कर दिया।
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भाव बढ़ने से कोल्ड स्टोरेज में भी सन्नाटा
कोल्ड स्टोरों में भी सन्नाटा दिख रहा है। पिछले कई वर्षों से आलू किसान बर्बाद होता रहा। फसल के  रेट अच्छे न मिलने से भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेजों की ओर दौड़ता था। हालात यह होते थे कि इन दिनों कोल्ड स्टोरेजों पर ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों की कतार लगी रहती थी। इससे सड़क पर जाम लग जाता था। मगर इस बार बाजार में रेटों में यकायक उछाल आया तो किसान आलू का भंडारण करने की बजाय मंडी की ओर दौड़ रहा है। उसे अभी ही 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है तो फिर वह भंडारण क्यों करें। किसानों का कहना है कि अभी बाजार में अच्छा भाव मिल रहा है। जबकि भंडारण के बाद निकासी के समय निकालने दो सौ रुपये प्रति पैकेट खर्चा आएगा। यदि निकासी के वक्त यदि पैकेट के दाम 900 रुपये नहीं मिले तो नुकसान ही होगा। शीतगृह स्वामी आलू न आने से परेशान हैं और गांव गांव भटकने को विवश हैं। 
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