फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   farmers selling catteles due to bad economic condition

आर्थिक तंगी, भूसे का संकट, लंपी वायरस ने किया मवेशी बेचने पर मजबूर

Wed, 19 Oct 2022 12:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Oct 2022 12:04 AM IST
विज्ञापन
farmers selling catteles due to bad economic condition
इटावा/चकरनगर। बाढ़ और बारिश ने किसानों और पशुपालकों को तबाह कर दिया है। बाजरे की लगभग एक तिहाई फसल खराब होने से भूसे का भी संकट है। भूसे पर प्रति किलो सात रुपये बढ़ने से अब किसानों के लिए पशु पालना मुश्किल हो रहा है। लंपी वायरस भी परेशान किए है। ऐसे में दीवाली पर दीपक जलाने और कर्ज चुकाने के लिए किसान और पशुपालक पशु बेचने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

अगस्त में आई बाढ़ ने बीहड़ी क्षेत्र के किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। चकरनगर और बढ़पुरा ब्लॉक में ही 2800 हेक्टेयर फसल खराब हो गई थी। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान बाजरे को हुआ था। इसके बाद सितंबर के अंत और अक्तूबर के शुरुआती सप्ताह में हुई मूसलाधार बारिश से 42 हजार हेक्टेयर में से 15 हजार हेक्टेयर बाजरे की फसल खराब हो गई। धान की भी करीब पांच हजार हेक्टेयर की फसल खराब हुई हैै। बाजरे की फसल खराब होने से जिले में भूसे का भी संकट खड़ा हो गया।
विज्ञापन

नौ रुपये किलो की जगह अब भूसा 16 रुपये किलो बिक रहा है। उधर, जिले में तेजी से बढ़ रहे लंपी वायरस के मामले किसानों का खर्च बढ़ा रहे हैं। अभी तक 128 पशुओं में लंपी की पुष्टि हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार फोन पर भी चिकित्साधिकारी नहीं आ रहे हैं। ऐसे में गोवंश बीमार होने पर निजी पशु चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। तंगी झेल रहे किसानों को प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक खर्च वहन करना पड़ रहा है। सीवीओ डॉ. एनके गौतम ने बताया कि टीकाकरण सभी गोवशों का किया जा चुका है। पशु बीमार होने पर पशु चिकित्सक को तुरंत पहुंचने के आदेश हैं। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

आधी कीमत में बेच दी भैंस
हरौली गांव की सावित्री देवी ने बताया कि उन्होंने 10 बीघा में बाजरे की फसल की थी। पहले बाढ़ और अब बारिश में लगभग पूरी फसल बर्बाद हो गई है। खेत में चारे के लिए कुछ नहीं बचा। बाहर भी चारा महंगा मिल रहा है। रुपये थे नहीं ऐसे में पिछली साल 65 हजार रुपये में खरीदी गई भैंस मध्यप्रदेश जाकर 30 हजार रुपये में बेच दी है। एक गाय बची है। वह भी बेच देंगी।
चकरनगर के अर्जुन कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने छह बीघा में बाजरे की बुआई की थी। बाढ़ के समय कुछ बीज खराब हो गया। उसके बाद बारिश ने आफत कर दी। सारी फसल खराब होने से लागत तक नहीं निल पा रही है। भूसा खरीदकर पशुओं को खिलाना पड़ रहा था। बताया कि उनके पास दो भैंस, तीन बकरी और एक गाय थी। कर्ज चुकाने के लिए दोनों भैंस और गाय 70 हजार में ही बेच दीं।
उम्मेद यादव व व लियाकत अली ने बताया कि परिवार का भरण पोषण दुधारू पशुओं से होता था। बटाई पर खेती लेकर करते थे। बेमौसम बारिश में फसल खराब हो गई। जिले में बाजरे का बड़ा नुकसान होने की वजह से भूसे का भी संकट है। भूसा महंगा होने की वजह से जानवरों का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। उम्मेद ने बताया कि उनके पास गाय, भैंसें मिलाकर 10 पशु थे। तीन पशु मध्यप्रदेश जाकर बेच दिए। अन्य पशुओं को भी बेच देंगे। वहीं लियाकत ने बताया कि उनके पास एक भैंस और पड़वा था। उसे बेच दिया है।
बढ़पुरा ब्लॉक के हविलिया गांव की माया देवी ने बताया कि उनके पास तीन बीघा खेती है। दो बीघा खेती बटाई पर लेकर पांच बीघा में बाजरे की फसल की थी। मूसलाधार बारिश में पूरी फसल बर्बाद हो गई। अब पशुओं को खिलाने तक के लिए चारे का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। 17 हजार बिजली का बिल हो गया था। विभाग वाले बार-बार बिजली काटने की चेतावनी दे रहे थे। ऐसे में चार बकरियां बेचकर बिजली का बिल चुकाया है।

बढ़पुरा के ही नग्ला अजीत गांव के निवासी किसान बाबूलाल ने बताया कि उनके पास सिर्फ डेढ़ बीघा जमीन है। इसमें बाजरे की फसल की थी। बारिश से फसल बर्बाद हो गई। भैंस को चालीस हजार रुपये में बेच दिया है। अब कम से कम दिवाली पर अपने घर का दीपक तो जला सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed