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नम आंखों के बीच बिठौली का लाल विदा

Wed, 22 Jan 2020 12:31 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2020 12:31 AM IST
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बाबा शिवप्रसाद के साथ बेटे अंकुर, आदर्श और अंश ने शहीद पिता को अंतिम विदाई दी। - फोटो : ETAWHA
इटावा। शहीद संदीप सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को ग्राम बिठौली पहुंचा। फूफ चौरैला मार्ग पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ हजारों लोगों ने शहीद बिठौली के लाल को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
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बड़े पुत्र अंकुर (12) ने पिता की चिंता को मुखाग्नि दी। शहीद के अंतिम संस्कार के समय हर मौजूद व्यक्ति की आंख नम थी। सैनिक संदीप सिंह युद्धाभ्यास के दौरान चट्टान गिरने के कारण शहीद हो गए थे। वे अपने पीछे पत्नी, पिता एवं तीन पुत्रों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
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बिठौली गांव में संदीप सिंह परिहार का परिवार देशभक्ति के लिए जाना जाता है। इस परिवार की तीन पीढ़ियों से लगातार सेना में भर्ती होकर देश सेवा की जा रही है। इनके बाबा त्रिभुवनसिह परिहार, उदयवीर सिंह परिहार, पिता शिवप्रताप सिंह परिहार, चाचा दीपू सिंह परिहार, भतीजा रामू सिंह परिहार सभी सेना की सेवा कर रहे हैं या कर चुके हैं। शहीद संदीप सिंह परिहार गंगटोक में युद्ध अभ्यास के दौरान दुर्घटना का शिकार हो गए। 18 जनवरी को जब यह दुखद सूचना शहीद के परिजनों को मिली तो पूरे क्षेत्र में शोक लहर दौड़ गई। तीसरे दिन शहीद का शव जब गांव पहुंचा तो हजारों लोगों ने भारत मां की जय और संदीप सिंह परिहार अमर रहे के नारे लगाए। तीनों पुत्रों अंकुर (12), आदर्श (10), अंश (8) पिता के शव को देखकर आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। भाजपा संासद डॉ. रामशंकर कठेरिया, विधायक सदर सरिता भदौरिया, विधायक भरथना सावित्री कठेरिया, भाजपा जिलाध्यक्ष अजय धाकरे, उपाध्यक्ष कृपा नारायन तिवारी, मुकेश सिंह राजावत, सज्जनसिंह राजावत, कालेश्वर महापंचायत के अध्यक्ष सहेल सिंह परिहार, एसडीएम सत्यप्रकाशमिश्र, जिला कमांडेंट पीआरडी हरिश्चंद तिवारी, बीडीओ प्रमोद कुमार, तहसीलदार चकरनगर ने शहीद को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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पिता शिवप्रताप सिंह परिहार पुत्र के शव के पास गमगीन बैठे थे। कभी शव को निहारते तो कभी अपने तीनों नातियों को देखते। वहां खड़े हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। उन्होंने कहा जवान बेटा खोया है, इसका भारी गम है। देश सेवा में बेटे ने जान दी है। इसका गर्व है। पिता ने कहा कि बेटे को 2012 में कश्मीर में आतंकवादियों से मुठभेड़ के समय भी गोली लगी थी। उस समय एक तरफ सीने में लगी थी, तब भगवान ने बेटे की रक्षा की थी।
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