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अंग्रेजों के हरित क्रांति के सपने को साकार कर रहा इटावा सफारी
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इटावा सफारी हरित क्रांति की मशाल जला रहा है। दरअसल, 110 साल पहले बनवाए गए चेकडैम की मरम्मत और सफारी के अंदर वर्षा जल संचयन के तालाब बनाकर बीहड़ की जमीन को उपजाऊ करने का प्रयास सफल होता नजर आ रहा है।
मंगलवार को हुई मौसम की पहली बारिश में सफारी के तालाब लबालब भरे तो जल स्तर में सुधार आने की उम्मीदें भी बढ़ गईं।
इटावा सफारी के निदेशक वीके सिंह ने बताया कि यमुना से सटे होने की वजह से बारिश का पानी नदी में चला जाता था।
इससे बीहड़ का यह इलाका उपजाऊ नहीं बन पा रहा था। यहां बड़े-बड़े टीलों और कटीले जंगलों के अलावा कुछ नहीं था।
बारिश का पानी रोककर जल स्तर में सुधार लाने के लिए सफारी के खाली जगहों का उपयोग करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग के लिए यहां 8000 घनमीटर के 31 चेकडैम, 8800 सेमी के आठ तालाब बनाए गए।
इस प्रोजेक्ट पर पिछले साल काम शुरू हुआ था। मंगलवार को हुई तेज बारिश में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। बारिश का ज्यादातर पानी इन तालाबों में भरा जो अभी तक ठहरा हुआ है।
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वीके सिंह का कहना है कि सफारी बीहड़ और इटावा शहर से बीच में बना है। यहां से शहर की दूरी करीब ढाई किलोमीटर है। वाटर रिचार्जिंग से शहर और आसपास के जलस्तर में सुधार आएगा।
पेयजल का संकट दूर होने के साथ आसपास के किसानों को भी फायदा पहुंचेगा। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रहा है। इसमें सुधार करके आधुनिक तकनीकी से वाटर रिचार्जिंग के लिए शोधकर्ताओं और अन्य विभागों की मदद ली जा रही है।
निदेशक वीके सिंह ने बताया कि बीहड़ की जमीन को उपजाऊ बनाने का प्रयास अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुआ था। करीब 110 साल पहले अंग्रेजों ने इस इलाके में बारिश का पानी रोकने के लिए यमुना के आसपास तीन चेकडैम बनवाए थे।
आजादी के बाद उपेक्षा के शिकार हुए डैम टूट गए। इन डैम की मरम्मत करवाकर इसका भी सदुपयोग किया जा रहा है।
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मंगलवार को हुई मौसम की पहली बारिश में सफारी के तालाब लबालब भरे तो जल स्तर में सुधार आने की उम्मीदें भी बढ़ गईं।
इटावा सफारी के निदेशक वीके सिंह ने बताया कि यमुना से सटे होने की वजह से बारिश का पानी नदी में चला जाता था।
इससे बीहड़ का यह इलाका उपजाऊ नहीं बन पा रहा था। यहां बड़े-बड़े टीलों और कटीले जंगलों के अलावा कुछ नहीं था।
बारिश का पानी रोककर जल स्तर में सुधार लाने के लिए सफारी के खाली जगहों का उपयोग करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग के लिए यहां 8000 घनमीटर के 31 चेकडैम, 8800 सेमी के आठ तालाब बनाए गए।
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इस प्रोजेक्ट पर पिछले साल काम शुरू हुआ था। मंगलवार को हुई तेज बारिश में इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। बारिश का ज्यादातर पानी इन तालाबों में भरा जो अभी तक ठहरा हुआ है।
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वीके सिंह का कहना है कि सफारी बीहड़ और इटावा शहर से बीच में बना है। यहां से शहर की दूरी करीब ढाई किलोमीटर है। वाटर रिचार्जिंग से शहर और आसपास के जलस्तर में सुधार आएगा।
पेयजल का संकट दूर होने के साथ आसपास के किसानों को भी फायदा पहुंचेगा। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रहा है। इसमें सुधार करके आधुनिक तकनीकी से वाटर रिचार्जिंग के लिए शोधकर्ताओं और अन्य विभागों की मदद ली जा रही है।
निदेशक वीके सिंह ने बताया कि बीहड़ की जमीन को उपजाऊ बनाने का प्रयास अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुआ था। करीब 110 साल पहले अंग्रेजों ने इस इलाके में बारिश का पानी रोकने के लिए यमुना के आसपास तीन चेकडैम बनवाए थे।
आजादी के बाद उपेक्षा के शिकार हुए डैम टूट गए। इन डैम की मरम्मत करवाकर इसका भी सदुपयोग किया जा रहा है।