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पंचायत चुनावों में हारजीत प्रभावित करेंगे प्रवासी मतदाता
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इटावा। पंचायत चुनावों को लेकर गांवों में हलचल शुरू हो गई है। इस बार प्रवासी बनकर कोरोना काल में गांव लौटे लोगों की भी इन दिनों खूब आवभगत हो रही है। प्रधानी के दावेदारों ने इनके नाम मतदाता सूची में शामिल करवा दिए हैं। अब प्रधानी की हारजीत में इन प्रवासी मतदाताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है।
पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है। चुनावों की तारीख तय नहीं की गई हैं। लॉकडाउन के बाद अप्रैल के महीने में जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में प्रवासी आ गए थे। उस समय से ही इनकी खूब आवभगत की जा रही है। शुरुआती दौर से ही इन्हें मनरेगा में मजदूरी भी दी गई जिससे यह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। मनरेगा में काम देने का सरकारी आदेश था और प्रधान जी को लग रहा था कि इससे प्रवासी खुश रहे तो उनके वोट पक्के हो जाएंगे। कुुछ प्रवासी लौट भी गए हैं तो उनके परिवार गांवों में रह रहे हैं। चुनावों के दौरान सभी मतदाताओं को बुलवाने की तैयारी है।
जिले में आए थे 14 हजार प्रवासी
इटावा। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से जिले में लॉकडाउन के बाद से 14 हजार 402 प्रवासी आए थे। इनमें से करीब 8 हजार तो वापस चले गए। साढ़े 6 हजार प्रवासी बचे हैं वे भी चुनाव में बड़े काम के हैं। चुनाव में इनके वोट हार जीत तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। हालांकि जो प्रवासी वापस चले गए उनमें से भी बहुत के वोट पंचायत की मतदाता सूची में शामिल हुए हैं।
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पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन हो चुका है। चुनावों की तारीख तय नहीं की गई हैं। लॉकडाउन के बाद अप्रैल के महीने में जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में प्रवासी आ गए थे। उस समय से ही इनकी खूब आवभगत की जा रही है। शुरुआती दौर से ही इन्हें मनरेगा में मजदूरी भी दी गई जिससे यह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। मनरेगा में काम देने का सरकारी आदेश था और प्रधान जी को लग रहा था कि इससे प्रवासी खुश रहे तो उनके वोट पक्के हो जाएंगे। कुुछ प्रवासी लौट भी गए हैं तो उनके परिवार गांवों में रह रहे हैं। चुनावों के दौरान सभी मतदाताओं को बुलवाने की तैयारी है।
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जिले में आए थे 14 हजार प्रवासी
इटावा। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से जिले में लॉकडाउन के बाद से 14 हजार 402 प्रवासी आए थे। इनमें से करीब 8 हजार तो वापस चले गए। साढ़े 6 हजार प्रवासी बचे हैं वे भी चुनाव में बड़े काम के हैं। चुनाव में इनके वोट हार जीत तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। हालांकि जो प्रवासी वापस चले गए उनमें से भी बहुत के वोट पंचायत की मतदाता सूची में शामिल हुए हैं।
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