{"_id":"5e6bce648ebc3ea7dd2f0bb4","slug":"etawah-news-bjp-etawha-news-knp5501566149","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूं ही नहीं भड़के भाजपाई, पुलिस ने बरती लापरवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूं ही नहीं भड़के भाजपाई, पुलिस ने बरती लापरवाही
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इटावा। सत्ता में आने की तीसरी वर्षगांठ पर भाजपाई यूं ही नहीं भड़के, कोतवाली पुलिस की लापरवाही ने उनके दबे गुस्से को भड़काया। जिस संजू चौधरी पर आनन फानन में मुकदमा दर्ज कर रात में पुलिस घर पर दबिश देने पहुंच गई। उन्हीं संजू के घर पर हमला कर छोटे भाई सूरज के साथ मारपीट करने वाले सभी आरोपियों को पुलिस एक महीने बाद भी नहीं पकड़ पाई। दोनों मामले एक जैसे हैं और दोनों ही तरफ से अनुसूचित जाति के साथ गाली गालौज का आरोप है।
भाजपा कार्यकर्ता संजू चौधरी के घर के पास राजकीय महिला महाविद्यालय है। 10-11 फरवरी को महाविद्यालय में वार्षिकोत्सव था। इस दौरान कॉलेज आने वाली छात्राओं के साथ कुछ मनचलों ने फब्तियां कसीं थीं। संजू के भाई सूरज चौधरी व उसके साथियों ने मनचलों का विरोध किया था। इस पर शाम करीब 5 बजे मनचलों ने 20-25 साथियों के साथ सूरज चौधरी के घर पर हमला बोलकर मारपीट की थी। घर के बाहर खड़ी कार भी तोड़ दी थी। दबंग मनचलों ने हवाई फायरिंग भी की थी लेकिन पुलिस फायरिंग को नकार गई थी। मौके पर पुलिस को हमलावरों की एक बाइक मिली थी।
अगले दिन सूरज चौधरी ने नुमाइश चौराहा निवासी सीटू यादव, सत्या यादव, शिवम यादव और मुदित यादव व अज्ञात युवकों के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न, मारपीट और तोड़फोड़ करने का मुकदमा दर्ज कराया था। सूरज का आरोप था कि हमलावरों ने अनुसूचित जाति उसके साथी मोनू के साथ भी गाली गलौज और मारपीट की। महिला कॉलेज की छात्राओं पर फब्तियां कसने वालों और विरोध करने वाले सभी मनचलों को पुलिस एक महीने बाद भी नहीं दबोच पाई। करीब पांच दिन पहले एकआरोपी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया, तीन अभी भी फरार हैं।
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विवाद की चिंगारी पुलिस की इसी लापरवाही से भड़की। संजू चौधरी का दीपेंद्र से विवाद होने पर अनुसूचित जाति उत्पीडन का मुकदमा दर्ज कराया गया। दीपेंद्र की तहरीर में आरोप है कि संजू ने साथियों के साथ घर पर हमला बोला और उसे व साथी अभिषेक गौतम के साथ मारपीट, गाली गलौज की। दूसरा मुकदमा भी लगभग उन्हें धाराओं में दर्ज किया गया जो पहले दर्ज किया गया था। संजू पर मुकदमे के बाद पुलिस जितनी तत्परता दिखाई उतनी पहले मुकदमे में नहीं दिखाई जबकि वह छात्राओं से छेड़छाड़ का विरोध करने पर हुआ था। महिला कॉलेज के पास उपद्रव जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस ने ढिलाई बरती। इससे ही सीओ सिटी और कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने का भाजपाइयों को मौका मिल गया। भड़के भाजपाइयों पर खुद एसएसपी ने खनन करने वालों की सिफारिश करने का आरोप लगाया दिया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई। जिसे एसएसपी को खुद आगे आकर शांत करना पड़ा। शहर कोतवाल रमेश सिंह ने बताया कि सूरज चौधरी के साथ मरपीट करने वाले तीन आरोपी अभी फरार हैं। मामले की जांच सीओ सिटी कर रहे हैं। एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि दोनों ही मामलों की जांच की जा रही है। तीनों आरोपियों की तलाश की जा रही है। आरोपियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच होगी।
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भाजपा कार्यकर्ता संजू चौधरी के घर के पास राजकीय महिला महाविद्यालय है। 10-11 फरवरी को महाविद्यालय में वार्षिकोत्सव था। इस दौरान कॉलेज आने वाली छात्राओं के साथ कुछ मनचलों ने फब्तियां कसीं थीं। संजू के भाई सूरज चौधरी व उसके साथियों ने मनचलों का विरोध किया था। इस पर शाम करीब 5 बजे मनचलों ने 20-25 साथियों के साथ सूरज चौधरी के घर पर हमला बोलकर मारपीट की थी। घर के बाहर खड़ी कार भी तोड़ दी थी। दबंग मनचलों ने हवाई फायरिंग भी की थी लेकिन पुलिस फायरिंग को नकार गई थी। मौके पर पुलिस को हमलावरों की एक बाइक मिली थी।
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अगले दिन सूरज चौधरी ने नुमाइश चौराहा निवासी सीटू यादव, सत्या यादव, शिवम यादव और मुदित यादव व अज्ञात युवकों के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न, मारपीट और तोड़फोड़ करने का मुकदमा दर्ज कराया था। सूरज का आरोप था कि हमलावरों ने अनुसूचित जाति उसके साथी मोनू के साथ भी गाली गलौज और मारपीट की। महिला कॉलेज की छात्राओं पर फब्तियां कसने वालों और विरोध करने वाले सभी मनचलों को पुलिस एक महीने बाद भी नहीं दबोच पाई। करीब पांच दिन पहले एकआरोपी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया, तीन अभी भी फरार हैं।
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विवाद की चिंगारी पुलिस की इसी लापरवाही से भड़की। संजू चौधरी का दीपेंद्र से विवाद होने पर अनुसूचित जाति उत्पीडन का मुकदमा दर्ज कराया गया। दीपेंद्र की तहरीर में आरोप है कि संजू ने साथियों के साथ घर पर हमला बोला और उसे व साथी अभिषेक गौतम के साथ मारपीट, गाली गलौज की। दूसरा मुकदमा भी लगभग उन्हें धाराओं में दर्ज किया गया जो पहले दर्ज किया गया था। संजू पर मुकदमे के बाद पुलिस जितनी तत्परता दिखाई उतनी पहले मुकदमे में नहीं दिखाई जबकि वह छात्राओं से छेड़छाड़ का विरोध करने पर हुआ था। महिला कॉलेज के पास उपद्रव जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस ने ढिलाई बरती। इससे ही सीओ सिटी और कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने का भाजपाइयों को मौका मिल गया। भड़के भाजपाइयों पर खुद एसएसपी ने खनन करने वालों की सिफारिश करने का आरोप लगाया दिया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई। जिसे एसएसपी को खुद आगे आकर शांत करना पड़ा। शहर कोतवाल रमेश सिंह ने बताया कि सूरज चौधरी के साथ मरपीट करने वाले तीन आरोपी अभी फरार हैं। मामले की जांच सीओ सिटी कर रहे हैं। एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि दोनों ही मामलों की जांच की जा रही है। तीनों आरोपियों की तलाश की जा रही है। आरोपियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच होगी।