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अंग्रेजी कठिन न भूगोल उबाऊ
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बकेवर। सरकारी स्कूल का नाम सुनकर दूरी बनाने वालों के लिए महेवा ब्लाक के लुधियानी उच्च प्राथमिक विद्यालय मिसाल बनकर उभरा है। यहां पढ़ने-पढ़ाने वालों का अंदाज अलग है।
स्कूल की शिक्षिकाओं ने अपने प्रयासों से उन शिक्षकों और आलोचकों को भी रास्ता दिखाया है जो हर वक्त सुविधाएं न होने का ताना मारकर दायित्वों से जी चुराते हैं।
इनमें से दो शिक्षिकाओं ने अपनी जेब से रुपये खर्च करके स्कूल में एजुकेशनल पार्क बना डाला। यहां पढ़ने वाले बच्चे को भी अब न अंग्रेजी कठिन लगती है और भूगोल उबाऊ।
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महेवा ब्लाक के लुधियानी उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापिका रेनू त्रिपाठी व सहायक अध्यापिका रेखा चंदानी ने स्कूल परिसर में एक एजुकेशनल पार्क का निर्माण कराया है।
पार्क में विभिन्न विषयों से संबंधित मॉडल बनाए गए हैं। छात्र-छात्राओं को स्मार्ट क्लास से भी बेहतर तरीके से पढ़ाने और समझाने के लिए चीजें बनाई गईं हैं।
कक्षा एक से आठ तक के सभी छात्र-छात्राओं को हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, गणित, इतिहास, भूगोल विषयों के साथ जीव विज्ञान को भी आसानी से समझाया जा सकता है।
अंग्रेजी का व्याकरण पढ़ाने, परिभाषाओं को समझाने के लिए बड़ा बोर्ड लगाया है। इसमें संक्षेप लिखकर छोटी-छोटी पट्टिकाएं टांगी गईं हैं। इसके अलावा श्वसन तंत्र को कैसेे समझाया जाए, इसके लिए भी मॉडल बनाया गया है।
भूगोल को रोचक ढंग से पढ़ाने को जमीन पर नक्शा उकेरा गया है। रेखा चंदानी ने बताया कि स्कूल के बच्चों को सीमित संसाधनों में अच्छे से पढ़ाने के लिए एक एजुकेशनल पार्क तैयार करने का विचार आया।
उन्होंने प्रधानाध्यापिका रेनू त्रिपाठी से विचार साझा किए, फिर क्या था दोनों ने मिलकर पार्क बना दिया। उन्होंने इसमें जो भी सामग्री लगी उसे जुटाने के लिए खुद के पैसे खर्च किए। दूसरे शिक्षकों ने भी इस काम में हाथ बंटाया, मेहनत की, लेकिन आर्थिक मदद नहीं की।
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स्कूल की शिक्षिकाओं ने अपने प्रयासों से उन शिक्षकों और आलोचकों को भी रास्ता दिखाया है जो हर वक्त सुविधाएं न होने का ताना मारकर दायित्वों से जी चुराते हैं।
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इनमें से दो शिक्षिकाओं ने अपनी जेब से रुपये खर्च करके स्कूल में एजुकेशनल पार्क बना डाला। यहां पढ़ने वाले बच्चे को भी अब न अंग्रेजी कठिन लगती है और भूगोल उबाऊ।
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महेवा ब्लाक के लुधियानी उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापिका रेनू त्रिपाठी व सहायक अध्यापिका रेखा चंदानी ने स्कूल परिसर में एक एजुकेशनल पार्क का निर्माण कराया है।
पार्क में विभिन्न विषयों से संबंधित मॉडल बनाए गए हैं। छात्र-छात्राओं को स्मार्ट क्लास से भी बेहतर तरीके से पढ़ाने और समझाने के लिए चीजें बनाई गईं हैं।
कक्षा एक से आठ तक के सभी छात्र-छात्राओं को हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, गणित, इतिहास, भूगोल विषयों के साथ जीव विज्ञान को भी आसानी से समझाया जा सकता है।
अंग्रेजी का व्याकरण पढ़ाने, परिभाषाओं को समझाने के लिए बड़ा बोर्ड लगाया है। इसमें संक्षेप लिखकर छोटी-छोटी पट्टिकाएं टांगी गईं हैं। इसके अलावा श्वसन तंत्र को कैसेे समझाया जाए, इसके लिए भी मॉडल बनाया गया है।
भूगोल को रोचक ढंग से पढ़ाने को जमीन पर नक्शा उकेरा गया है। रेखा चंदानी ने बताया कि स्कूल के बच्चों को सीमित संसाधनों में अच्छे से पढ़ाने के लिए एक एजुकेशनल पार्क तैयार करने का विचार आया।
उन्होंने प्रधानाध्यापिका रेनू त्रिपाठी से विचार साझा किए, फिर क्या था दोनों ने मिलकर पार्क बना दिया। उन्होंने इसमें जो भी सामग्री लगी उसे जुटाने के लिए खुद के पैसे खर्च किए। दूसरे शिक्षकों ने भी इस काम में हाथ बंटाया, मेहनत की, लेकिन आर्थिक मदद नहीं की।