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Etawah News: कम अंक पर तनाव न लें, खुद को साबित करने की ठानें
Thu, 27 Apr 2023 01:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 27 Apr 2023 01:01 AM IST
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इटावा। यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है। इनमें से अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं खुश हैं। वहीं कम अंक पाने वाले या अनुत्तीर्ण होने वाले छात्र-छात्रा परेशान हैं। कई तनाव की वजह से घर से निकलना तक बंद कर चुके हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे सफल लोगों की कहानी बताएंगे, जो शुरुआती दौर में बहुत ही सामान्य छात्र रहे। कम अंकों से वह निराश नहीं हुए, बल्कि उससे सबक लेकर भविष्य की मजबूत तैयारी की।
हाईस्कूल, इंटर में सेकेंड डिवीजन, फिर भी बने पीसीएस
जसवंतनगर। एसडीएम कौशल किशोर कम अंक पाने वालों के लिए मार्गदर्शक के रूप में हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल जंगपुरा दिल्ली से शुरू हुई। बाद में उन्होंने जीआईसी बिजनौर से सन् 1987 में हाईस्कूल 55 प्रतिशत तथा इंटर की परीक्षा पीआईसी सयाना बुलंदशहर से 1989 में 53 प्रतिशत से पास की थी। इसके बाद भी कड़ी मेहनत कर वह एसडीएम बने।
उस समय के अनुसार उनके अंक सामान्य थे, लेकिन तैयारी के अनुसार संतोषजनक स्थिति नहीं थी। उन्हें फर्स्ट डिवीजन पाने की हमेशा ललक रही। दोनों बार परिणाम आने के बाद निराशा हाथ लगी। कई दिन तक तनाव में रहे, लेकिन माता क्रांति देवी और पिता विजय पाल सिंह ने उन्हें बल दिया। कहा कि अंक कम होने से किसी के भविष्य को नहीं आंका जा सकता है।
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अच्छी पढ़ाई करके अभी भी तुम अच्छा भविष्य बना सकते हो। इसके बाद 1991 में मेरठ कॉलेज से बीए करके 52 प्रतिशत अंक और एलएलबी करके 1994 में इसी कॉलेज से 54 प्रतिशत अंक पाए। बड़े भाई को पीसीएस बनते देखकर उनमें भी इसी क्षेत्र में जाने की इच्छा हुई। घर पर बात करने पर भाई ने प्रोतसाहित किया और 1996 में पीसीएस की परीक्षा पास करके खुद को साबित किया। इसलिए कम अंक आने वाले छात्र-छात्राओं को चिंतित नहीं होना चाहिए। उन्हें इस पर मंथन करके सबक लेना चाहिए और आगे की तैयारी मजबूती से करनी चाहिए।
कम अंक के बाद भी ठाना, बनीं शिक्षिका
ताखा। भरथना निवासी शिक्षिका शालू पाठक भी लोगों के लिए मिसाल हो सकती हैं। शालू ने बताया कि वह भी शुरुआती समय से एक सामान्य विद्यार्थी रही हैं। वर्ष 2000 में हाईस्कूल की परीक्षा दी। इसमें 50 प्रतिशत अंक मिलने से बहुत निराशा हाथ लगी। लोगों के अच्छे नंबरों की जानकारी मिलने से तनाव होने लगा। इस पर माता-पिता ने समझाया तो मनोबल बढ़ा। इसके बाद ठाना कि अब कुछ करके दिखाना है। निश्चय करके मेहनत की तो उसका रंग इंटर में ही दिखा। इंटर में जिले में सबसे ज्यादा अंक पाकर टॉप किया। इसके बाद बीटीसी की और इसमें भी अच्छे अंक प्राप्त किए। 2015 में सरकारी शिक्षक बनकर खुद को साबित किया। (संवाद)
हाईस्कूल में मिले कम अंक, फिर भी सीए बनकर दिखाया
ताखा। भरथना निवासी सीए पूनम बताती हैं कि हाईस्कूल में उन्होंने बहुत मेहनत से पढ़ाई की। इसके बावजूद उनके नंबर कम रह गए और सेकेंड डिवीजन रही। मन में निराशा आई। एक पल को लगा कि अब क्या कर पाऊंगी। पहले की पड़ाव पर कमजोर साबित हो गई, पर घर के बड़ों ने उस वक्त साथ दिया। समझाया और आगे बढ़कर लक्ष्य तैयार करने को कहा। इस पर मेहनत की और 12वीं में स्थितियां सुधारीं और सीए बनने की ठानी।2017 में सीए बनकर दिखाया। इस समय मुंबई की एक बड़ी कंपनी में सीए हैं। (संवाद)
विशेषज्ञों की राय
- अभिवावक विधार्थी की हर गतिविधि की निगरानी रखें।
- बेहतर अंक पाने वाले अभ्यर्थियों से तुलना न करें।
- अभ्यर्थी जिस विषय में बेहतर हैं, उसमें उसकी तारीफ करें।
-अभ्यर्थी की रुचि के अनुरूप आगे बढ़ने में उसकी मदद करें।
यह है जिले में यूपी बोर्ड की स्थिति
हाईस्कूल के आंकड़े
सम्मिलित : 22907उत्तीर्ण : 20602अनुउत्तीर्ण : 2305
इंटरमीडिएट
सम्मिलित : 20108उत्तीर्ण : 16363 अनुउत्तीर्ण : 3745
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हाईस्कूल, इंटर में सेकेंड डिवीजन, फिर भी बने पीसीएस
जसवंतनगर। एसडीएम कौशल किशोर कम अंक पाने वालों के लिए मार्गदर्शक के रूप में हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल जंगपुरा दिल्ली से शुरू हुई। बाद में उन्होंने जीआईसी बिजनौर से सन् 1987 में हाईस्कूल 55 प्रतिशत तथा इंटर की परीक्षा पीआईसी सयाना बुलंदशहर से 1989 में 53 प्रतिशत से पास की थी। इसके बाद भी कड़ी मेहनत कर वह एसडीएम बने।
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उस समय के अनुसार उनके अंक सामान्य थे, लेकिन तैयारी के अनुसार संतोषजनक स्थिति नहीं थी। उन्हें फर्स्ट डिवीजन पाने की हमेशा ललक रही। दोनों बार परिणाम आने के बाद निराशा हाथ लगी। कई दिन तक तनाव में रहे, लेकिन माता क्रांति देवी और पिता विजय पाल सिंह ने उन्हें बल दिया। कहा कि अंक कम होने से किसी के भविष्य को नहीं आंका जा सकता है।
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अच्छी पढ़ाई करके अभी भी तुम अच्छा भविष्य बना सकते हो। इसके बाद 1991 में मेरठ कॉलेज से बीए करके 52 प्रतिशत अंक और एलएलबी करके 1994 में इसी कॉलेज से 54 प्रतिशत अंक पाए। बड़े भाई को पीसीएस बनते देखकर उनमें भी इसी क्षेत्र में जाने की इच्छा हुई। घर पर बात करने पर भाई ने प्रोतसाहित किया और 1996 में पीसीएस की परीक्षा पास करके खुद को साबित किया। इसलिए कम अंक आने वाले छात्र-छात्राओं को चिंतित नहीं होना चाहिए। उन्हें इस पर मंथन करके सबक लेना चाहिए और आगे की तैयारी मजबूती से करनी चाहिए।
कम अंक के बाद भी ठाना, बनीं शिक्षिका
ताखा। भरथना निवासी शिक्षिका शालू पाठक भी लोगों के लिए मिसाल हो सकती हैं। शालू ने बताया कि वह भी शुरुआती समय से एक सामान्य विद्यार्थी रही हैं। वर्ष 2000 में हाईस्कूल की परीक्षा दी। इसमें 50 प्रतिशत अंक मिलने से बहुत निराशा हाथ लगी। लोगों के अच्छे नंबरों की जानकारी मिलने से तनाव होने लगा। इस पर माता-पिता ने समझाया तो मनोबल बढ़ा। इसके बाद ठाना कि अब कुछ करके दिखाना है। निश्चय करके मेहनत की तो उसका रंग इंटर में ही दिखा। इंटर में जिले में सबसे ज्यादा अंक पाकर टॉप किया। इसके बाद बीटीसी की और इसमें भी अच्छे अंक प्राप्त किए। 2015 में सरकारी शिक्षक बनकर खुद को साबित किया। (संवाद)
हाईस्कूल में मिले कम अंक, फिर भी सीए बनकर दिखाया
ताखा। भरथना निवासी सीए पूनम बताती हैं कि हाईस्कूल में उन्होंने बहुत मेहनत से पढ़ाई की। इसके बावजूद उनके नंबर कम रह गए और सेकेंड डिवीजन रही। मन में निराशा आई। एक पल को लगा कि अब क्या कर पाऊंगी। पहले की पड़ाव पर कमजोर साबित हो गई, पर घर के बड़ों ने उस वक्त साथ दिया। समझाया और आगे बढ़कर लक्ष्य तैयार करने को कहा। इस पर मेहनत की और 12वीं में स्थितियां सुधारीं और सीए बनने की ठानी।2017 में सीए बनकर दिखाया। इस समय मुंबई की एक बड़ी कंपनी में सीए हैं। (संवाद)
विशेषज्ञों की राय
- अभिवावक विधार्थी की हर गतिविधि की निगरानी रखें।
- बेहतर अंक पाने वाले अभ्यर्थियों से तुलना न करें।
- अभ्यर्थी जिस विषय में बेहतर हैं, उसमें उसकी तारीफ करें।
-अभ्यर्थी की रुचि के अनुरूप आगे बढ़ने में उसकी मदद करें।
यह है जिले में यूपी बोर्ड की स्थिति
हाईस्कूल के आंकड़े
सम्मिलित : 22907उत्तीर्ण : 20602अनुउत्तीर्ण : 2305
इंटरमीडिएट
सम्मिलित : 20108उत्तीर्ण : 16363 अनुउत्तीर्ण : 3745