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रेजिडेंट डॉक्टरों ने ठप कीं इमरजेंसी सेवाएं
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मेडिकल यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन करते जूनियर डॉक्टर
- फोटो : ETAWAH
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सैफई। नीटी और पीजी काउंसलिंग में हो रही देरी के चलते हड़ताल कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों ने मंगलवार को इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर दीं। डॉक्टरों ने कुलसचिव सुरेश चंद्र शर्मा को भी ज्ञापन सौंपा। इधर इमरजेंसी सेवाओं में सीनियर डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ गया। इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर में मरीजों को देर से इलाज मिला। वहीं कुछ मरीज जिला अस्पताल व निजी अस्पताल चले गए।
नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में हो रही देरी को लेकर दिल्ली में आंदोलन कर रहे डॉक्टरों को सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ने से सोमवार को दिल्ली पुलिस ने रोक दिया था। जिसके बाद फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन(फोर्डा) के आह्वाहन पर मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई में भी रेजिडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया।
बता दें कि देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर 27 नवंबर से परीक्षा के स्थगन और उसके बाद मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों के नए बैच के प्रवेश में हो रही अनिश्चितकालीन देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
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डॉक्टरों कहा कि दिल्ली में सोमवार को हुए डॉक्टरों के अपमान के चलते हम हर साल 27 दिसंबर को काला दिवस मनाएंगे। हम लोगों ने कोरोना की दूसरी लहर में अपनी जान की परवाह न करते हुए दिन-रात काम किया। आज सरकार हम लोगों की जायज मांगे नहीं मान रही है। यह निंदनीय है। इसी वजह से हम लोगों ने इमरजेंसी सेवाएं देना बंद किया है।
इस समय मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई में 160 रेजिडेंट डॉक्टर हैं। जिनमें से तीन माह बाद 80 डॉक्टरों का एक बैच पास होकर यहां से चला जाएगा। उसके बाद यहां सिर्फ 80 ही रह जाएंगे। अभी यहां पर 240 रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी है। वैसे भी मेडिकल यूनिवर्सिटी में सीनियर डॉक्टरों की भी कमी चल रही है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर से कैसे निपटा जाएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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नीट पीजी काउंसलिंग 2021 में हो रही देरी को लेकर दिल्ली में आंदोलन कर रहे डॉक्टरों को सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ने से सोमवार को दिल्ली पुलिस ने रोक दिया था। जिसके बाद फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन(फोर्डा) के आह्वाहन पर मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई में भी रेजिडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया।
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बता दें कि देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर 27 नवंबर से परीक्षा के स्थगन और उसके बाद मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों के नए बैच के प्रवेश में हो रही अनिश्चितकालीन देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
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डॉक्टरों कहा कि दिल्ली में सोमवार को हुए डॉक्टरों के अपमान के चलते हम हर साल 27 दिसंबर को काला दिवस मनाएंगे। हम लोगों ने कोरोना की दूसरी लहर में अपनी जान की परवाह न करते हुए दिन-रात काम किया। आज सरकार हम लोगों की जायज मांगे नहीं मान रही है। यह निंदनीय है। इसी वजह से हम लोगों ने इमरजेंसी सेवाएं देना बंद किया है।
इस समय मेडिकल यूनिवर्सिटी सैफई में 160 रेजिडेंट डॉक्टर हैं। जिनमें से तीन माह बाद 80 डॉक्टरों का एक बैच पास होकर यहां से चला जाएगा। उसके बाद यहां सिर्फ 80 ही रह जाएंगे। अभी यहां पर 240 रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी है। वैसे भी मेडिकल यूनिवर्सिटी में सीनियर डॉक्टरों की भी कमी चल रही है। ऐसे में कोरोना की तीसरी लहर से कैसे निपटा जाएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।