फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Etawah News ›   Destruction of rain

बारिश के कारण 70 फीसदी फसल को नुकसान

Mon, 16 Mar 2015 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Mon, 16 Mar 2015 11:38 PM IST
विज्ञापन
Destruction of rain

आसमान से बारिश और ओला बनकर बरसी आफत ने किसानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। जिले में दो दिन में रिकार्ड 96 मिलीमीटर बारिश हुई। हालात ये हैं कि आलू के खेतों में पानी भरा है तो गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलें खेतों में बिछ गई हैं। बर्बादी का मंजर देखकर किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। रविवार की रात हुई बारिश के बाद सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचा तो उसकी आंखों से आंसू बह निकले। बारिश ने फसलों की बर्बादी की रही सही कसर पूरी कर दी थी।

विज्ञापन


शनिवार से तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने जिले में जमकर तबाही मचाई। खेतों में खड़ी फसलें चौपट हो र्गइं। आलू, गेहूं, सरसों, चना, मटर, अरहर के साथ ही सब्जी की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। अभी तक नुकसान का आंकलन तो नहीं हो पाया है, लेकिन कृषि विभाग 60 से 70 फीसदी नुकसान मान रहा है। खेतों में पानी भरने से आलू खुदाई का कार्य प्रभावित हो गया है। ऐसे में जो आलू खेत में रह गया है उसके सड़ने की संभावना बढ़ गई है। किसान मेहनत करके अगर आलू बचा भी लेता है तो उस आलू का भंडारण करना संभव नहीं होगा।
विज्ञापन


नुकसान के आंकलन को बनाई टीमें
बारिश और ओलावृष्टि से जिले में कितना नुकसान हुआ है, इसके आंकलन को लेकर अफसरों ने कवायद शुरू कर दी है। आंकलन के लिए ब्लॉक स्तर पर टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में नुकसान का आंकलन करके उसकी रिपोर्ट प्रशासन को देंगी। टीम में सहायक विकास अधिकारी कृषि, सीड स्टोर इंचार्ज, ब्लाक टेक्नोलॉजी मैनेजर कृषि एवं सहायक प्रबंधक तकनीकी को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


35 फीसदी नहीं हुई थी खुदाई
जिले में किसानों ने करीब 17.5 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल बोई थी। मार्च की शुरुआत में बारिश के बाद खुदाई कार्य में तेजी आई। कृषि विभाग के अनुसान के अनुसार करीब 35 फीसदी आलू की खुदाई होना शेष था, उसी समय बारिश हो गई। इससे 35 फीसदी आलू की फसल पर संकट मंडरा रहा है। जबकि किसानों का कहना है कि 50 फीसदी आलू की खुदाई होनी बाकी थी।

लागत निकलना मुश्किल
बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर पूरी तरह से तोड़ दी है। किसानों का कहना है कि अब उन्हें लागत तक निकलती नहीं दिखाई दे रही है। गेहूं किसानों का कहना है कि फसल की उम्मीद छोड़िए भूसा तक मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो एक हेक्टेयर गेहूं की फसल में लागत 35 हजार रुपये आती है। वहीं एक हेक्टेयर आलू में एक लाख रुपये की लागत आती है।


इस तरह फसलों की हुई बुवाई
जिले में गेहूं की फसल करीब 92 हजार हेक्टेयर में बोई गई।
आलू की फसल करीब 17.5 हेक्टेयर
सरसों की फसल करीब 22 हजार हेक्टेयर में
चना की फसल चार हजार हेक्टेयर में
तीन हजार हेक्टेयर में मटर की फसल

बारिश का आंकड़ा
शनिवार से लेकर रविवार की सुबह 8:30 बजे तक 65 एमएम बारिश रिकार्ड की गई।
रविवार से लेकर सोमवार की सुबह 8:30 बजे तक 31 एमएम बारिश रिकार्ड की गई।

महंगाई को रहिए तैयार
इटावा। अगर आप सोच रहे हैं कि बेमौसम बारिश से सिर्फ किसान ही तबाह हुआ है तो जान लें कि इसका असर आम जनता पर भी पड़ेगा। बारिश के कारण आलू के साथ अन्य सब्जियां तबाह हो गई हैं। गेहूं, सरसों की भी पैदावार कम होगी। खाद्यान्न के साथ दलहनी व तिलहनी फसलों व सब्जियों के दामों में इजाफा होगा।



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed