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दिखेगी शावकों की उछलकूद
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
Updated Wed, 04 Nov 2015 11:51 PM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट लॉयन सफारी में एक बार फिर प्रजनन की तैयारियां चल रही हैं। शेर के एक जोड़े और पांच शावकों की मौत से अलर्ट सफारी प्रशासन इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। वह कोई रिस्क नहीं लेगा, न ही किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त करेगा।
प्रजनन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की जा रही है। शासन की देखरेख में बरेली आईबीआरआई की विशेषज्ञ टीम शेरनियों की जांच में जुटी है। इसी महीने प्रजनन की दिशा में कदम उठने की संभावना है। चार महीने पहले लॉयन सफारी से पांच शावकों के पैदा होने की खुशखबरी मिली, जो चंद दिनों में ही काफूर हो गई।
तीन शावकों की मौत तो पैदा होते ही हो गई। एक शावक सिर्फ एक दिन जिंदा रहा। बाकी एक भी करीब 15 दिन ही तक इस दुनिया में रह सका। इससे सफारी के अंदर प्रजनन प्रक्रिया एवं माहौल को लेकर सवाल उठने लगे थे। चूंकि लॉयन सफारी प्रोजेक्ट सीधे तौर पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जुड़ा है।
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ऐसे में यहां की हर गतिविधि पर शासन की नजर रहती है। सफारी प्रशासन पुरानी गलतियों को दोहराना नहीं चाहता। इसलिए शेरनियों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सजगता बरती जा रही है। गत 10 अक्तूबर को इसी परिप्रेक्ष्य में बरेली आईबीआरआई की विशेषज्ञ टीम यहां पहुंची थी।
टीम में प्रिंसिपल साइंटिस्ट सर्जरी डा एएम पावड़े, मेडिसन के डा. कड़ीकरन, डा. दास समेत कई पैथालॉजिस्ट भी शामिल हैं। टीम ने यहां शेर व शेरनियों के बैजाइनल, यूरिया, लिवर इंफेक्शन, बायरोलॉजिकल, फीकल आदि की जांचें की हैं। इसमें से कुछ की रिपोर्ट मिल चुकी है। हाल ही में टीम ने दोबारा जांचें की हैं। इसकी रिपोर्ट आनी है।
इस बाबत इटावा लॉ.न सफारी के डिप्टी डाटरेक्टर अनिल पटेल ने बताया कि 31 अक्तूबर को टीम ने जांचें की हैं। उसकी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शेरों के जोड़े में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यह पूर्ववत रहेंगे। शेरनी क्वांरी समेत सभी जोड़े बिल्कुल स्वस्थ हैं।
नहीं बदले जाएंगे जोड़े
इस बार प्रजनन के लिए परिस्थितिजन्य तमाम बदलाव किए जा रहे हैं लेकिन शेर-शेरनी के जोड़े में कोई बदलाव नहीं होगा। पहले गीगो व ग्रीष्मा तथा हीर व मनन के जोड़े बनाए गए थे। इस बार भी यही जोड़े रहेंगे। शेरनी क्वांरी अंडर ट्रीटमेंट है। शेर कुबेर अभी उम्र में छोटा है। इसलिए ये शेर-शेरनी फिलहाल प्रजनन प्रक्रिया से अलग रखे गए हैं। शेरनी क्वांरी करीब छह महीने पहले बीमार पड़ गई थी। इसके बाद से अस्पताल में ही उसकी देखभाल की जा रही है।
मौसम का रखा है विशेष ख्याल
प्रजनन को लेकर इस बार मौसम का विशेष ख्याल रखा गया है। अर्ली विंटर या लेट विंटर को प्रजनन के लिए उचित माना जाता है। इसलिए नवंबर माह में प्रजनन की शुरुआत की जा रही है, ताकि करीब 107 दिन के गर्भाकाल के बाद शेेरनियां फरवरी में शावकों को जन्म दे सकें। यह समय लेट विंटर का रहेगा। इसके साथ ही ब्रीडिंग सेंटर के इर्दगिर्द नो मैन एरिया रहेगा। अर्थात शेेरनी के गर्भवती होने पर किसी को भी सेंटर के आसपास जाने की अनुमति नहीं होगी। यहां जो निर्माण कार्य चल रहे थे, उन्हें पूरा करा लिया गया है।
एशियाटिक बब्बर शेरों को बढ़ाना है
लॉयन सफारी में विलुप्त हो रहे एशियाटिक बब्बर शेरों की संख्या बढ़ाई जानी है, इसीलिए यहां पर्यटकों को लुभाने वाले इंतजामों के साथ ही ब्रीडिंग सेंटर भी खोला गया है। लेकिन अभी तक सफारी के अंदर से कोई अच्छी खबर नहीं मिली है। मालूम हो कि पांच शावकों की मौत के अलावा यहां शेर विष्णु व शेरनी लक्ष्मी की भी कुत्तों वाली बीमारी से मौत हो चुकी है।
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प्रजनन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की जा रही है। शासन की देखरेख में बरेली आईबीआरआई की विशेषज्ञ टीम शेरनियों की जांच में जुटी है। इसी महीने प्रजनन की दिशा में कदम उठने की संभावना है। चार महीने पहले लॉयन सफारी से पांच शावकों के पैदा होने की खुशखबरी मिली, जो चंद दिनों में ही काफूर हो गई।
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तीन शावकों की मौत तो पैदा होते ही हो गई। एक शावक सिर्फ एक दिन जिंदा रहा। बाकी एक भी करीब 15 दिन ही तक इस दुनिया में रह सका। इससे सफारी के अंदर प्रजनन प्रक्रिया एवं माहौल को लेकर सवाल उठने लगे थे। चूंकि लॉयन सफारी प्रोजेक्ट सीधे तौर पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जुड़ा है।
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ऐसे में यहां की हर गतिविधि पर शासन की नजर रहती है। सफारी प्रशासन पुरानी गलतियों को दोहराना नहीं चाहता। इसलिए शेरनियों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सजगता बरती जा रही है। गत 10 अक्तूबर को इसी परिप्रेक्ष्य में बरेली आईबीआरआई की विशेषज्ञ टीम यहां पहुंची थी।
टीम में प्रिंसिपल साइंटिस्ट सर्जरी डा एएम पावड़े, मेडिसन के डा. कड़ीकरन, डा. दास समेत कई पैथालॉजिस्ट भी शामिल हैं। टीम ने यहां शेर व शेरनियों के बैजाइनल, यूरिया, लिवर इंफेक्शन, बायरोलॉजिकल, फीकल आदि की जांचें की हैं। इसमें से कुछ की रिपोर्ट मिल चुकी है। हाल ही में टीम ने दोबारा जांचें की हैं। इसकी रिपोर्ट आनी है।
इस बाबत इटावा लॉ.न सफारी के डिप्टी डाटरेक्टर अनिल पटेल ने बताया कि 31 अक्तूबर को टीम ने जांचें की हैं। उसकी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। रिपोर्ट मिलने पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शेरों के जोड़े में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यह पूर्ववत रहेंगे। शेरनी क्वांरी समेत सभी जोड़े बिल्कुल स्वस्थ हैं।
नहीं बदले जाएंगे जोड़े
इस बार प्रजनन के लिए परिस्थितिजन्य तमाम बदलाव किए जा रहे हैं लेकिन शेर-शेरनी के जोड़े में कोई बदलाव नहीं होगा। पहले गीगो व ग्रीष्मा तथा हीर व मनन के जोड़े बनाए गए थे। इस बार भी यही जोड़े रहेंगे। शेरनी क्वांरी अंडर ट्रीटमेंट है। शेर कुबेर अभी उम्र में छोटा है। इसलिए ये शेर-शेरनी फिलहाल प्रजनन प्रक्रिया से अलग रखे गए हैं। शेरनी क्वांरी करीब छह महीने पहले बीमार पड़ गई थी। इसके बाद से अस्पताल में ही उसकी देखभाल की जा रही है।
मौसम का रखा है विशेष ख्याल
प्रजनन को लेकर इस बार मौसम का विशेष ख्याल रखा गया है। अर्ली विंटर या लेट विंटर को प्रजनन के लिए उचित माना जाता है। इसलिए नवंबर माह में प्रजनन की शुरुआत की जा रही है, ताकि करीब 107 दिन के गर्भाकाल के बाद शेेरनियां फरवरी में शावकों को जन्म दे सकें। यह समय लेट विंटर का रहेगा। इसके साथ ही ब्रीडिंग सेंटर के इर्दगिर्द नो मैन एरिया रहेगा। अर्थात शेेरनी के गर्भवती होने पर किसी को भी सेंटर के आसपास जाने की अनुमति नहीं होगी। यहां जो निर्माण कार्य चल रहे थे, उन्हें पूरा करा लिया गया है।
एशियाटिक बब्बर शेरों को बढ़ाना है
लॉयन सफारी में विलुप्त हो रहे एशियाटिक बब्बर शेरों की संख्या बढ़ाई जानी है, इसीलिए यहां पर्यटकों को लुभाने वाले इंतजामों के साथ ही ब्रीडिंग सेंटर भी खोला गया है। लेकिन अभी तक सफारी के अंदर से कोई अच्छी खबर नहीं मिली है। मालूम हो कि पांच शावकों की मौत के अलावा यहां शेर विष्णु व शेरनी लक्ष्मी की भी कुत्तों वाली बीमारी से मौत हो चुकी है।