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गलत तथ्यों के आधार पर न मांगें जमीन का मुआवजा
etawah
Updated Tue, 22 May 2018 12:05 AM IST
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वार्ता करते एडीएम जितेंद्र कुमार कुशवाहा।
- फोटो : amarujala
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इटावा। नेेशनल हाईवे दो इटावा से आगरा के मध्य फोरलेन से सिक्सलेन में बदला जाना है।
सोशल मीडिया के जरिये गलत तथ्यों के आधार पर जमीन अधिग्रहण मुआवजे का दावा करने वालों को एडीएम जितेंद्र कुमार कुशवाहा ने आगाह किया है। उन्होंने कहा कि इसे सरकारी धन हड़पने का प्रयास माना जाएगा। लोगों में भ्रम फैलाने में आईटी एक्ट का उल्लंघन है। ऐसे लोग न सुधरे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण एक्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
शहर के मानिकपुर मोड़ से लेकर जसवंतनगर तहसील के धौलपुरखेड़ा गांव तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। कस्बा जसवंतनगर और कैस्त गांव के भूमि अधिग्रहण संबंधी मामले को निपटाने के लिए कार्यदाई संस्था एनएचएआई ने प्रशासन को 195 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। जसवंतनगर कस्बा में 400 एवं कैस्त में 250 भूमि स्वामियों को मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित है।
इसी मुआवजे को पाने के लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है। सोमवार को एडीएम ने इसी को लेकर कलक्ट्रेट सभाकक्ष में मीडिया के साथ बात की। प्रशासन का पक्ष रखा। कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर भूमि अधिग्रहण मुआवजा का दावा करते हुए दुष्प्रचार कर रहे हैं। कहा कि सोशल मीडिया पर हो रहे दावे सरासर गलत हैं। यह महज भ्रम फैलाने की कोशिश है। दुष्प्रचार नहीं रोका गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एडीएम ने भ्रम फैलाने वाले लोगों के नामों का खुलासा न करते बताया कि जसवंतनगर के ही कोई पांच लोग हैं। जो गलत ढंग से मुआवजा लेने के लिए प्रयासरत हैं।
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एडीएम ने बताया कि जसवंतनगर कस्बा और कैस्त गांव के भूमि अधिग्रहण से जुड़े कुल 650 मामले निपटाने के लिए गत 22 अप्रैल को एनएचएआई से कुल 195 करोड़ रुपये मिला है। जसवंतनगर कस्बा में 150 और कैस्त गांव में 100 भूमि स्वामियों को गत 18 मई तक कुल 79 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दिया जा चुका है। मुआवजा मामलों को निपटाने के लिए त्वरित गति से कार्रवाई चल रही है।
-जमीन किसी की नाम किसी का
एडीएम ने बताया कि कुछ लोग गलत ढंग से सरकारी धन को हड़पना चाहते हैं। जिनमें नोटिफिकेशन के समय खतौनी के अनुसार जमीन किसी और की रही। बैनामा कराके अब किसी अन्य के नाम है और जमीन पर कब्जा कोई और किए है। जबकि अधिग्रहण एक्ट में साफ है कि मुआवजा उसी भूमि स्वामी को मिलेगा जिसका नाम खतौनी के अनुसार 3ए प्रकाशन में हुआ है। यह प्रकाशन 27 जुलाई 2017 को हुआ था। इसके बाद संबंधित जमीन का कोई बैनामा वैध नहीं माना जाएगा। लिहाजा किसी अन्य की कोई दावेदारी भी नहीं हो सकती।
सोशल मीडिया के जरिये गलत तथ्यों के आधार पर जमीन अधिग्रहण मुआवजे का दावा करने वालों को एडीएम जितेंद्र कुमार कुशवाहा ने आगाह किया है। उन्होंने कहा कि इसे सरकारी धन हड़पने का प्रयास माना जाएगा। लोगों में भ्रम फैलाने में आईटी एक्ट का उल्लंघन है। ऐसे लोग न सुधरे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण एक्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
शहर के मानिकपुर मोड़ से लेकर जसवंतनगर तहसील के धौलपुरखेड़ा गांव तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। कस्बा जसवंतनगर और कैस्त गांव के भूमि अधिग्रहण संबंधी मामले को निपटाने के लिए कार्यदाई संस्था एनएचएआई ने प्रशासन को 195 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। जसवंतनगर कस्बा में 400 एवं कैस्त में 250 भूमि स्वामियों को मुआवजा दिया जाना प्रस्तावित है।
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इसी मुआवजे को पाने के लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है। सोमवार को एडीएम ने इसी को लेकर कलक्ट्रेट सभाकक्ष में मीडिया के साथ बात की। प्रशासन का पक्ष रखा। कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर भूमि अधिग्रहण मुआवजा का दावा करते हुए दुष्प्रचार कर रहे हैं। कहा कि सोशल मीडिया पर हो रहे दावे सरासर गलत हैं। यह महज भ्रम फैलाने की कोशिश है। दुष्प्रचार नहीं रोका गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एडीएम ने भ्रम फैलाने वाले लोगों के नामों का खुलासा न करते बताया कि जसवंतनगर के ही कोई पांच लोग हैं। जो गलत ढंग से मुआवजा लेने के लिए प्रयासरत हैं।
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एडीएम ने बताया कि जसवंतनगर कस्बा और कैस्त गांव के भूमि अधिग्रहण से जुड़े कुल 650 मामले निपटाने के लिए गत 22 अप्रैल को एनएचएआई से कुल 195 करोड़ रुपये मिला है। जसवंतनगर कस्बा में 150 और कैस्त गांव में 100 भूमि स्वामियों को गत 18 मई तक कुल 79 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दिया जा चुका है। मुआवजा मामलों को निपटाने के लिए त्वरित गति से कार्रवाई चल रही है।
-जमीन किसी की नाम किसी का
एडीएम ने बताया कि कुछ लोग गलत ढंग से सरकारी धन को हड़पना चाहते हैं। जिनमें नोटिफिकेशन के समय खतौनी के अनुसार जमीन किसी और की रही। बैनामा कराके अब किसी अन्य के नाम है और जमीन पर कब्जा कोई और किए है। जबकि अधिग्रहण एक्ट में साफ है कि मुआवजा उसी भूमि स्वामी को मिलेगा जिसका नाम खतौनी के अनुसार 3ए प्रकाशन में हुआ है। यह प्रकाशन 27 जुलाई 2017 को हुआ था। इसके बाद संबंधित जमीन का कोई बैनामा वैध नहीं माना जाएगा। लिहाजा किसी अन्य की कोई दावेदारी भी नहीं हो सकती।