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मवेशी खोने के सदमे में किसान ने कीटनाशक पीया
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इटावा। जीविका के साधन भैंसें और मवेशी खो जाने के सदमे में बढ़पुरा क्षेत्र के गांव के किसान ने कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर घर वाले उसे जिला अस्पताल लाए, जहां उसका उपचार किया गया।
बढ़पुरा थाना क्षेत्र के बीहड़ गांव पुल की मड़ैया निवासी 50 वर्षीय किसान मंशाराम के पास दो दुधारू भैंसों के अलावा दो पड़िया व एक पड़वा थे। दोनों भैंस से हर रोज दोनों वक्त में करीब 25 लीटर दूध मिल रहा था। उसी बेचकर परिवार का गुजारा चल रहा था। मंशाराम की चार संतानों में दो बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी है। दो अविवाहित पुत्र हैं। जो मजदूरी करते हैं।
अस्पताल में मौजूद पत्नी श्रीमती ने बताया कि गत मंगलवार को उनके पशु गांव में चरने गए थे। उसके बाद से नहीं लौटे। बीहड़ के कई गांवों में लगातार खोजबीन की। पशुओं के खो जाने पर उसके पति घर में गुमसुम रहने लगे। गत गुरुवार को उसके दोनों पुत्र और वे खुद पशुओं को तलाश करने गई थीं। इसी बीच मौका पाकर उनके पति ने कीड़े मारने वाली दवा पी ली।
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श्रीमती ने बताया कि लौटने पर उन्हें इसका आभास नहीं हुआ। वे समझी कि पति सो रहे हैं। रात को उनकी हालत बिगड़ी और पेट खराब हो गया। चक्कर आने लगे, तब पति ने बताया कि उन्होंने कीटनाशन पी ली है। रात के वक्त कोई साधन न होने से अस्पताल लेकर नहीं आ पाए। नीम का पानी आदि घरेलू उपचार करते रहे।
शुक्रवार को किसान मंशाराम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज मिलने पर उनकी तबीयत में सुधार हुआ है। हालांकि वे अभी भी कुछ बोल नहीं रहे हैं। पत्नी श्रीमती ने बताया कि परिवार कैसे चलेगा। इसी चिंता खाए जा रही है। बीहड़ की खारों के बीच थोड़ी बहुत खेती है। जिससे गुजर होना मुश्किल है।
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बढ़पुरा थाना क्षेत्र के बीहड़ गांव पुल की मड़ैया निवासी 50 वर्षीय किसान मंशाराम के पास दो दुधारू भैंसों के अलावा दो पड़िया व एक पड़वा थे। दोनों भैंस से हर रोज दोनों वक्त में करीब 25 लीटर दूध मिल रहा था। उसी बेचकर परिवार का गुजारा चल रहा था। मंशाराम की चार संतानों में दो बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी है। दो अविवाहित पुत्र हैं। जो मजदूरी करते हैं।
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अस्पताल में मौजूद पत्नी श्रीमती ने बताया कि गत मंगलवार को उनके पशु गांव में चरने गए थे। उसके बाद से नहीं लौटे। बीहड़ के कई गांवों में लगातार खोजबीन की। पशुओं के खो जाने पर उसके पति घर में गुमसुम रहने लगे। गत गुरुवार को उसके दोनों पुत्र और वे खुद पशुओं को तलाश करने गई थीं। इसी बीच मौका पाकर उनके पति ने कीड़े मारने वाली दवा पी ली।
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श्रीमती ने बताया कि लौटने पर उन्हें इसका आभास नहीं हुआ। वे समझी कि पति सो रहे हैं। रात को उनकी हालत बिगड़ी और पेट खराब हो गया। चक्कर आने लगे, तब पति ने बताया कि उन्होंने कीटनाशन पी ली है। रात के वक्त कोई साधन न होने से अस्पताल लेकर नहीं आ पाए। नीम का पानी आदि घरेलू उपचार करते रहे।
शुक्रवार को किसान मंशाराम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज मिलने पर उनकी तबीयत में सुधार हुआ है। हालांकि वे अभी भी कुछ बोल नहीं रहे हैं। पत्नी श्रीमती ने बताया कि परिवार कैसे चलेगा। इसी चिंता खाए जा रही है। बीहड़ की खारों के बीच थोड़ी बहुत खेती है। जिससे गुजर होना मुश्किल है।