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दावेदार लखनऊ में, समर्थक टटोल रहे नब्ज
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इटावा। आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद ही विधान सभा चुनाव की सरगर्मी भी बढ़ने लगी है। बसपा छोड़ किसी भी पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कई राजनीतिक दलों के संभावित प्रत्याशी भी नव वर्ष में ग्रामीणों से मिलने जुलने का काम कर रहै हैं।
उनके हर सुख-दुख में साथ रहने का वादा करते भी दिखाई दे रहे हैं। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले शनिवार को चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया है।
संभावित प्रत्याशियों ने नववर्ष के पहले दिन से अपनी मेहनत और बढ़ा दी है। गांव-गांव जाकर लोगों को नववर्ष की बधाई देने की बात हो या फिर किसी के निधन की जानकारी होने पर तुरंत पहुंच जाना शामिल है।
यहां तक कि शांतिभोज में कई दलों के नेता आमने सामने बैठकर भोजन करते देखे जा रहे हैं। तारीखों के एलान के बाद दावेदार तो लखनऊ में डेरा डाल लिया है, तो उनके समर्थकों ने गांवों में जाकर संपर्क करना भी शुरू कर दिया है।
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टिकट की होड़ में कई ऐसे भी दिग्गज है, जो कभी एक ही पार्टी में हुआ करते थे। आज प्रतिद्वंद्वी बने बैठे हैं। भरथना विधानसभा में भी कई प्रत्याशी ऐसे हैं, जो ग्रामीणों को नववर्ष के बधाई देने के साथ साथ अपना टिकट पक्का होने का दावा कर चुके है।
ग्रामीण रामकुमार का कहना है कि चुनाव के समय दिनभर नेताओं की लाइन लगी रहती है। कोई किसी दल का तो कोई किसी का दिनभर राजी खुशी पूछते रहते और चुनाव बाद कोई किसी को नहीं जानता।
अमृतलाल का कहना है कि इस वर्ष चुनाव हैं, इसलिए नए साल के पहले ही दिन से प्रत्याशियों ने ग्रामीणों को बधाइयां देनी शुरू कर दी थी।
भरथना सुरक्षित सीट की बात करें, तो यहां पर एक दर्जन से अधिक संभावित उम्मीदवार चुनावी ताल ठोकने को तैयार हैं, जिसमें सबसे ज्यादा प्रत्याशी सपा फिर बसपा और भाजपा के हैं, वही अन्य छोटे-छोटे दलों के प्रत्याशी भी खूब अपना दांवपेच जुटा रहे हैं।
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उनके हर सुख-दुख में साथ रहने का वादा करते भी दिखाई दे रहे हैं। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले शनिवार को चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया है।
संभावित प्रत्याशियों ने नववर्ष के पहले दिन से अपनी मेहनत और बढ़ा दी है। गांव-गांव जाकर लोगों को नववर्ष की बधाई देने की बात हो या फिर किसी के निधन की जानकारी होने पर तुरंत पहुंच जाना शामिल है।
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यहां तक कि शांतिभोज में कई दलों के नेता आमने सामने बैठकर भोजन करते देखे जा रहे हैं। तारीखों के एलान के बाद दावेदार तो लखनऊ में डेरा डाल लिया है, तो उनके समर्थकों ने गांवों में जाकर संपर्क करना भी शुरू कर दिया है।
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टिकट की होड़ में कई ऐसे भी दिग्गज है, जो कभी एक ही पार्टी में हुआ करते थे। आज प्रतिद्वंद्वी बने बैठे हैं। भरथना विधानसभा में भी कई प्रत्याशी ऐसे हैं, जो ग्रामीणों को नववर्ष के बधाई देने के साथ साथ अपना टिकट पक्का होने का दावा कर चुके है।
ग्रामीण रामकुमार का कहना है कि चुनाव के समय दिनभर नेताओं की लाइन लगी रहती है। कोई किसी दल का तो कोई किसी का दिनभर राजी खुशी पूछते रहते और चुनाव बाद कोई किसी को नहीं जानता।
अमृतलाल का कहना है कि इस वर्ष चुनाव हैं, इसलिए नए साल के पहले ही दिन से प्रत्याशियों ने ग्रामीणों को बधाइयां देनी शुरू कर दी थी।
भरथना सुरक्षित सीट की बात करें, तो यहां पर एक दर्जन से अधिक संभावित उम्मीदवार चुनावी ताल ठोकने को तैयार हैं, जिसमें सबसे ज्यादा प्रत्याशी सपा फिर बसपा और भाजपा के हैं, वही अन्य छोटे-छोटे दलों के प्रत्याशी भी खूब अपना दांवपेच जुटा रहे हैं।