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टिकट में 40 का दावा, जिला कार्यसमिति में 20 फीसदी ही हिस्सेदारी
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इटावा। कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी के महिलाओं को 40 फीसदी टिकट दिए जाने के बयान से जिले की महिला राजनीति पर भी नये सिरे से चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। अगर इटावा जिले की बात करें तो यहां 25 सदस्यीय जिला कार्यसमिति में सिर्फ पांच महिलाएं ही पदाधिकारी हैं। वैसे जिले में 70 के दशक से ही महिलाओं का राजनीति में दखल शुरू हो गया था। यहां से विधानसभा, लोकसभा में पहुंचीं महिलाओं ने राजनीति में अपनी धमक कायम की। यह सिलसिला आज तक कायम है। आज भी जिले की तीन विधानसभा सीटों में से दो विधायक महिलाएं हैं।
इटावा के प्रतिष्ठित परिवार में पली बढ़ी सुखदा मिश्रा को इटावा जिले की पहली महिला विधायक और कैबिनेट मंत्री होने का गौरव हासिल है। सुखदा मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर पहली बार 1974 में इटावा सदर सीट से विधायक चुनी गई। इसके बाद वे 80 का चुनाव भी जीती। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में ऊर्जा मंत्री बनी। वर्ष 1989 में कांग्रेस से टिकट कटने के बाद उन्होंने यह चुनाव जनता दल के टिकट पर लड़ा। प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी। सुखदा मिश्रा दूसरी बार नगरीय विकास विभाग की कैबिनेट मंत्री बनी। कांग्रेस की महारानी दोहरे 1990 में तत्कालीन लखना सुरक्षित सीट से विधानसभा पहुंची। इसके बाद सपा ने स्व. गयाप्रसाद वर्मा की धर्मपत्नी सुखदेवी वर्मा को राजनीति में उतारा। सुखदेवी 1993,96 और 2002 और 2012 में सपा से विधायक निर्वाचित होती रहीं।
लोकसभा चुनावों की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस ही ऐसे राजनैतिक दल हैं जिन्होंने महिलाओं को टिकट दिया। सुखदा मिश्रा को विधायक के साथ साथ पहली महिला सांसद निर्वाचित होने का भी गौरव हासिल हैं। कांग्रेस से सरिता भदौरिया, हंसमुखी शंखबार और भाजपा से कमलेश कठेरिया भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं।
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2017 में महिला सशक्तीकरण को देखते हुए इटावा जिला महिलाओं के लिए काफी मुफीद साबित हुआ। यहां तीन विधानसभा सीटों में से दो पर महिलाएं काबिज हैं। इटावा से भाजपा की सरिता भदौरिया और भरथना सुरक्षित सीट से सावित्री कठेरिया विधानसभा में अपनी धमक कायम किए हुए हैं।
इटावा। महिलाओं को टिकट देने के मामले में सपा, भाजपा और कांग्रेस पीछे नहीं रही। इस मामले में बसपा जरूर पिछड़ती रही। अभी तक बसपा ने किसी महिला को विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नहीं उतारा। पहली बार 2022 के चुनाव में बसपा ने एमएलसी भीमराव अंबेडकर की धर्मपत्नी कमलेश अंबेडकर को टिकट दिया है।
इटावा। जसवंतनगर विधानसभा ऐसा चुनाव क्षेत्र रहा है जहां से कभी कोई महिला विधानसभा चुनाव लड़ी ही नहीं। इस क्षेत्र को समाजवाद का गढ़ माना जाता है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बाद अब उनके अनुज प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव लगातार कई बार से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं।
महिलाओं के लिए विधान सभा चुनाव में 40 फीसदी टिकट दिए जाने की बात पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने कही है। जिले में तीन विधान सभा सीटें है। इसके हिसाब के एक महिला को पार्टी अपना प्रत्याशी बनाएगी। संगठन के पास पर्याप्त महिला पदाधिकारी व नेता है। महिला प्रत्याशी को ढूंढने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
- मलखान सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी
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इटावा के प्रतिष्ठित परिवार में पली बढ़ी सुखदा मिश्रा को इटावा जिले की पहली महिला विधायक और कैबिनेट मंत्री होने का गौरव हासिल है। सुखदा मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर पहली बार 1974 में इटावा सदर सीट से विधायक चुनी गई। इसके बाद वे 80 का चुनाव भी जीती। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में ऊर्जा मंत्री बनी। वर्ष 1989 में कांग्रेस से टिकट कटने के बाद उन्होंने यह चुनाव जनता दल के टिकट पर लड़ा। प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बनी। सुखदा मिश्रा दूसरी बार नगरीय विकास विभाग की कैबिनेट मंत्री बनी। कांग्रेस की महारानी दोहरे 1990 में तत्कालीन लखना सुरक्षित सीट से विधानसभा पहुंची। इसके बाद सपा ने स्व. गयाप्रसाद वर्मा की धर्मपत्नी सुखदेवी वर्मा को राजनीति में उतारा। सुखदेवी 1993,96 और 2002 और 2012 में सपा से विधायक निर्वाचित होती रहीं।
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लोकसभा चुनावों की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस ही ऐसे राजनैतिक दल हैं जिन्होंने महिलाओं को टिकट दिया। सुखदा मिश्रा को विधायक के साथ साथ पहली महिला सांसद निर्वाचित होने का भी गौरव हासिल हैं। कांग्रेस से सरिता भदौरिया, हंसमुखी शंखबार और भाजपा से कमलेश कठेरिया भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं।
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2017 में महिला सशक्तीकरण को देखते हुए इटावा जिला महिलाओं के लिए काफी मुफीद साबित हुआ। यहां तीन विधानसभा सीटों में से दो पर महिलाएं काबिज हैं। इटावा से भाजपा की सरिता भदौरिया और भरथना सुरक्षित सीट से सावित्री कठेरिया विधानसभा में अपनी धमक कायम किए हुए हैं।
इटावा। महिलाओं को टिकट देने के मामले में सपा, भाजपा और कांग्रेस पीछे नहीं रही। इस मामले में बसपा जरूर पिछड़ती रही। अभी तक बसपा ने किसी महिला को विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नहीं उतारा। पहली बार 2022 के चुनाव में बसपा ने एमएलसी भीमराव अंबेडकर की धर्मपत्नी कमलेश अंबेडकर को टिकट दिया है।
इटावा। जसवंतनगर विधानसभा ऐसा चुनाव क्षेत्र रहा है जहां से कभी कोई महिला विधानसभा चुनाव लड़ी ही नहीं। इस क्षेत्र को समाजवाद का गढ़ माना जाता है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बाद अब उनके अनुज प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव लगातार कई बार से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं।
महिलाओं के लिए विधान सभा चुनाव में 40 फीसदी टिकट दिए जाने की बात पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी ने कही है। जिले में तीन विधान सभा सीटें है। इसके हिसाब के एक महिला को पार्टी अपना प्रत्याशी बनाएगी। संगठन के पास पर्याप्त महिला पदाधिकारी व नेता है। महिला प्रत्याशी को ढूंढने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
- मलखान सिंह यादव, जिलाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी