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Etawah News: तेज धूप व लू से मक्का पर संकट के बादल
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इटावा। बढ़ते तापमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में इस वर्ष करीब 18 हजार 210 हेक्टेअर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचता है तो पछेती मक्का की फसल को नुकसान हो सकता है। खासकर 15 मार्च के बाद बोई गई मक्का की फसल सबसे अधिक प्रभावित हो सकती है।
जानकारी के अनुसार फरवरी से लेकर 15 मार्च तक बोई गई मक्का की फसल में इस समय भुट्टों में दाने बनने की प्रक्रिया चल रही है। इस अवधि में तापमान 40 डिग्री तक रहने पर दाने अच्छी तरह विकसित होते हैं और उत्पादन बेहतर मिलता है लेकिन इसके बाद बोई गई पछेती मक्का में अभी भुट्टे निकलने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में यदि तेज धूप और लू चलती है तो दानों का विकास प्रभावित हो सकता है। कई बार अत्यधिक गर्मी के कारण भुट्टों में दाने पूरी तरह नहीं बन पाते जिससे पैदावार घट जाती है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. एके पांडे ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखें। नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करने से खेत का तापमान नियंत्रित रहता है और पौधों पर गर्मी का असर कम पड़ता है। और जिन खेतों में नमी बनी रहती है वहां फसल पर लू और अत्यधिक तापमान का असर अपेक्षाकृत कम होता है। किसानों को दोपहर के समय खेतों की निगरानी करने और पौधों में पत्तियों के मुरझाने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सिंचाई करने की सलाह दी गई है। समय पर सिंचाई और उचित देखभाल से पछेती मक्का की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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जानकारी के अनुसार फरवरी से लेकर 15 मार्च तक बोई गई मक्का की फसल में इस समय भुट्टों में दाने बनने की प्रक्रिया चल रही है। इस अवधि में तापमान 40 डिग्री तक रहने पर दाने अच्छी तरह विकसित होते हैं और उत्पादन बेहतर मिलता है लेकिन इसके बाद बोई गई पछेती मक्का में अभी भुट्टे निकलने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में यदि तेज धूप और लू चलती है तो दानों का विकास प्रभावित हो सकता है। कई बार अत्यधिक गर्मी के कारण भुट्टों में दाने पूरी तरह नहीं बन पाते जिससे पैदावार घट जाती है।
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कृषि विशेषज्ञ डॉ. एके पांडे ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखें। नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करने से खेत का तापमान नियंत्रित रहता है और पौधों पर गर्मी का असर कम पड़ता है। और जिन खेतों में नमी बनी रहती है वहां फसल पर लू और अत्यधिक तापमान का असर अपेक्षाकृत कम होता है। किसानों को दोपहर के समय खेतों की निगरानी करने और पौधों में पत्तियों के मुरझाने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सिंचाई करने की सलाह दी गई है। समय पर सिंचाई और उचित देखभाल से पछेती मक्का की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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