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इटावाः बारिश ने फेरा किसानों की उम्मीदों पर पानी
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बाजरे की फसल की बुआई के खाली पड़ा खेत। संवाद
- फोटो : ETAWAH
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इटावा/बकेवर। पहले सूखे की स्थिति और अब बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। लगातार हो रही बारिश की वजह से बाजरा की फसल की बुआई नहीं हो पा रही है। खेतों में पानी भरा होने से उड़द, मूंग और अरहर की बुवाई प्रभावित हो रही है। इससे पैदावार पर असर पड़ने के साथ ही देरी से फसल तैयार होगी।
कस्बा बकेवर, लखना, महेवा, अहेरीपुर, निवाड़ी, लवेदी क्षेत्र में सैकड़ों बीघा किसान बाजरा की अगेती फसल की बुआई करते हैं। कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते बाजरा की बुआई नहीं हो पा रही है। किसान बृजेश तिवारी ने बताया सात बीघा खेत में बाजरा की अगेती फसल की बुआई कराने की तैयारी कर रहे थे। लगातार बारिश होने से खेत पानी से लबालब हो गए हैं, ऐसे में अब बाजरा की बुआई नहीं हो पाएगी। किसान कोमल तिवारी ने बताया खेत में बाजरा की बुआई करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पानी भर जाने से अब धान की रोपाई करा रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने कहा इस बार बारिश के कारण बाजरा, उड़द और अरहर की फसल की बुआई कम हो पाई है। पिछले साल जनपद में बाजरा की बुआई 39 हजार 225 हेक्टेयर में थी। इसके सापेक्ष अभी तक 30 फीसदी बुआई 12 हजार 665 हेक्टयर में हो सकी है। पानी ज्यादा बरसने से काफी फसल नष्ट भी हो गई है।
बारिश की वजह से तिली की फसल मध्यम दौर में नष्ट हो गई है। अब किसान तिली की जगह धान की रोपाई के प्रयास में हैं। अरहर की ज्यादातर फसल चकरनगर व बढ़पुरा ब्लॉक में होती है। इक्का दुक्का महेवा व जसवंतनगर ब्लॉक में देखने को मिलती है। अरहर की बुआई भी कुछ हद तक प्रभावित हुई है। जनता कालेज बकेवर के कृषि उद्यान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके पांडेय ने बताया लगातार बारिश होने से किसानों को बीज व जुताई का दोनों का नुकसान हुआ है।
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जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.विजय बहादुर जायसवाल का कहना है जो किसान दलहन और तिलहन की फसल बोने की तैयारी में थे, वह धान की रोपाई शुरू कर दें। दलहन व तिलहन की बुआई न कर पाने से किसान मायूस न हों। अरहर साल भर चलने वाली फसल है, इसी तरह तिल और उर्द व मूंग की फसल भी कभी भी बो सकते हैं।
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कस्बा बकेवर, लखना, महेवा, अहेरीपुर, निवाड़ी, लवेदी क्षेत्र में सैकड़ों बीघा किसान बाजरा की अगेती फसल की बुआई करते हैं। कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते बाजरा की बुआई नहीं हो पा रही है। किसान बृजेश तिवारी ने बताया सात बीघा खेत में बाजरा की अगेती फसल की बुआई कराने की तैयारी कर रहे थे। लगातार बारिश होने से खेत पानी से लबालब हो गए हैं, ऐसे में अब बाजरा की बुआई नहीं हो पाएगी। किसान कोमल तिवारी ने बताया खेत में बाजरा की बुआई करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पानी भर जाने से अब धान की रोपाई करा रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने कहा इस बार बारिश के कारण बाजरा, उड़द और अरहर की फसल की बुआई कम हो पाई है। पिछले साल जनपद में बाजरा की बुआई 39 हजार 225 हेक्टेयर में थी। इसके सापेक्ष अभी तक 30 फीसदी बुआई 12 हजार 665 हेक्टयर में हो सकी है। पानी ज्यादा बरसने से काफी फसल नष्ट भी हो गई है।
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बारिश की वजह से तिली की फसल मध्यम दौर में नष्ट हो गई है। अब किसान तिली की जगह धान की रोपाई के प्रयास में हैं। अरहर की ज्यादातर फसल चकरनगर व बढ़पुरा ब्लॉक में होती है। इक्का दुक्का महेवा व जसवंतनगर ब्लॉक में देखने को मिलती है। अरहर की बुआई भी कुछ हद तक प्रभावित हुई है। जनता कालेज बकेवर के कृषि उद्यान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके पांडेय ने बताया लगातार बारिश होने से किसानों को बीज व जुताई का दोनों का नुकसान हुआ है।
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जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.विजय बहादुर जायसवाल का कहना है जो किसान दलहन और तिलहन की फसल बोने की तैयारी में थे, वह धान की रोपाई शुरू कर दें। दलहन व तिलहन की बुआई न कर पाने से किसान मायूस न हों। अरहर साल भर चलने वाली फसल है, इसी तरह तिल और उर्द व मूंग की फसल भी कभी भी बो सकते हैं।