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धरतीपुत्र की जमीन में खिलेंगे गुलाब
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सैफई में गुलाब की खेती दिखाते किसान
- फोटो : ETAWAH
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सैफई। राजनीति में धरतीपुत्र के नाम से जाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के खेतों में पिछले छह साल से गुलाब की खेती लहलहा रही है। उनके खेत में बने डेढ़ एकड़ के पॉली हाउस में 40 हजार स्टिक रोपी गई हैं। उनकी देखभाल करने के लिए 15 लोगों को रखा गया है। ये सभी लोग गुलाब की खेती करने में प्रशिक्षित हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री के सैफई स्थित खेत में स्थित पॉली हाउस में पिछले छह साल से गुलाब की खेती की जा रही है। अभी इस पॉली हाउस में जल्द ही नई फसल तैयार होने वाली है। पाली हाउस में काम कर रहे किसानों ने बताया कि नवंबर में महाराष्ट्र से गुलाब के 40 हजार पौधे लाए गए थे। उन्हें रोपा गया है। हर रोज खाद, पानी और पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है। खेत में गुलाबों की देखरेख कर रहे जिला बलिया निवासी बलबीर ने बताया कि हर पौधे से प्रति वर्ष औसतन 20 फूल निकल जाते हैं। त्योहारी सीजन में एक फूल की कीमत लगभग आठ रुपये और आफ सीजन में पांच रुपये तक कीमत मिलती है।
बलवीर ने बताया कि गुलाब की खेती का हर साल 45 लाख रुपये टर्नओवर है, जिसमें लागत निकालकर कम से कम 30 लाख रुपये मुनाफा होता है। खेतों में काम करने वाले लोगों की दिनचर्या सुबह आठ बजे शुरू हो जाती है। फसल साढ़े चार महीने में तैयार हो जाती है। एक बार पौधा रोपने के बाद इसकी फसल तीन साल तक चलती रहती है। इनकी सिंचाई के लिए पॉली हाउस में ड्रिप लाइन लगी हुई है, जिससे कम पानी में ही अच्छी फसल तैयार हो जाती है।
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पूर्व मुख्यमंत्री के सैफई स्थित खेत में स्थित पॉली हाउस में पिछले छह साल से गुलाब की खेती की जा रही है। अभी इस पॉली हाउस में जल्द ही नई फसल तैयार होने वाली है। पाली हाउस में काम कर रहे किसानों ने बताया कि नवंबर में महाराष्ट्र से गुलाब के 40 हजार पौधे लाए गए थे। उन्हें रोपा गया है। हर रोज खाद, पानी और पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है। खेत में गुलाबों की देखरेख कर रहे जिला बलिया निवासी बलबीर ने बताया कि हर पौधे से प्रति वर्ष औसतन 20 फूल निकल जाते हैं। त्योहारी सीजन में एक फूल की कीमत लगभग आठ रुपये और आफ सीजन में पांच रुपये तक कीमत मिलती है।
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बलवीर ने बताया कि गुलाब की खेती का हर साल 45 लाख रुपये टर्नओवर है, जिसमें लागत निकालकर कम से कम 30 लाख रुपये मुनाफा होता है। खेतों में काम करने वाले लोगों की दिनचर्या सुबह आठ बजे शुरू हो जाती है। फसल साढ़े चार महीने में तैयार हो जाती है। एक बार पौधा रोपने के बाद इसकी फसल तीन साल तक चलती रहती है। इनकी सिंचाई के लिए पॉली हाउस में ड्रिप लाइन लगी हुई है, जिससे कम पानी में ही अच्छी फसल तैयार हो जाती है।
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