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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से 100 गांवाें को जाेड़ेगा चंबल नदी पुल, आसान होगा आवागमन

Mon, 11 Oct 2021 04:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 11 Oct 2021 04:25 PM IST
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Chambal river bridge will connect 100 villages with Bundelkhand Expressway
चंबल नदी - फोटो : अमर उजाला
इटावा के चकरनगर में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा भरेह और पचनद संगम को जोड़ने वाला महुआ सूडा वंशरी के पास निर्माणाधीन चंबल नदी का पुल अगले साल जनवरी में बनकर तैयार हो जाएगा। इस पुल के बनने के बाद इटावा और औरैया जिले के करीब सौ गांव सीधे कानपुर-आगरा सिक्सलेन हाईवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ जाएंगे। 
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तत्कालीन प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने वर्ष 2013 में क्षेत्रीय लोगों की आवागमन की समस्या के मद्देनजर  महुआ और वंशरी के बीच चंबल नदी पर पुल का निर्माण कार्य को मंजूरी दी थी। वन विभाग की स्वीकृति मिलने में हुई देरी के कारण चंबल नदी पर बनने वाले पुल का कार्य 2016 में शुरू हुआ।
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इस पुल की कुल लागत 56 करोड़ की राशि निर्धारित की गई। पुल का निर्माण होने के बाद भरेह संगम क्षेत्र के लाेगों को पचनद संगम विठोली क्षेत्र में आवागमन के लिए 40 किलोमीटर का चक्कर नहीं लगना पड़ेगा। अभी तक इस क्षेत्र में जाने के लिए जनता को चकरनगर होते हुए आना जाना पड़ता था। अब वे पुल पार करके सीधे जा सकेंगे।
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बिठौली, वंशरी, अनेठा, कालेश्वर की गढ़िया, विडौरी, गता, पहालन, पिपरोली गढ़िया, कालापाथर आदि समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को कानपुर की ओर जाने के लिए 60 से 70 किलोमीटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। यहां के लोग भरेह सिकरोडी मार्ग से बाबरपुर एनएच-2 हाईवे पर मात्र 20 किमी का सफर तय करके पहुंच जाएंगे। 


 

पचनद संगम का चक्कर लगाने से बचेंगे
चंबल नदी पर पुल बनने के बाद भरेह क्षेत्र के हरौली, चकरपुरा, पथर्रा, महुआ सूडा, कांयछी, धर्मपुरा, गढाकास्दा, नीमाडांडा के साथ अजीतमल क्षेत्र की जनता को बुंदेलखंड की ओर जाने के लिए पचनद संगम से आवागमन के लिए चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, जिस कारण किसानों को भी बड़े पैमाने पर फायदा होगा।

जनवरी 22 में तैयार हो जाएगा पुल
कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर केसर मसूद अंसारी ने बताया कि चंबल पुल के निर्माण का 94 फीसदी निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। बारिश के दौरान बाढ़ आने के कारण पुल निर्माण का काम रुक गया था।शीघ्र ही मशीनों को पुल के ऊपर ले जाकर स्टेन प्लेटों को डालने का काम शुरू हो जाएगा। जनवरी 2022 में क्षेत्रीय लोगों को आवागमन के लिए चालू हो जाएगा।

"महुआ के पास एप्रोच का काम लगभग 92 फीसदी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीणों को मुआवजा भी बांट दिया गया है। क्षेत्र में ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भारेश्वर मंदिर और  पचनद संगम कालेश्वर मंदिर पर जाने के लिए लोगों को 40 से 50 किलोमीटर का चक्कर लगाना होता था। चंबल नदी के पुल के बनने से क्षेत्र के दोनों धार्मिक स्थलों पर आवागमन में आसानी के साथ समय व पैसा दोनों की बचत भी होगी, जिससे लोग आसानी से दोनों ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का कम खर्चे में दर्शन और पूजा पाठ कर सकेंगे।"
 गगन कुमार, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग


 
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