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लहलहाती फसलों को बर्बाद कर रहे मवेशी

Sun, 23 Jan 2022 11:27 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jan 2022 11:27 PM IST
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Cattle destroying growing crops
इटावा/ताखा। किसानों की फसलों को आवारा गोवंश उजाड़ रहे हैं। कहने को तो जिले में स्थायी और अस्थायी डेढ़ सौ से ज्यादा गोशालाएं संचालित हैं। इन गोशालाओं की क्षमता 3000 से 4000 गोवंशों के रखने है।
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हकीकत में जितने गोवंश गोशालाओं में हैं, उसे कहीं ज्यादा सड़कों, खेतों में घूम रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए कड़ाके की सर्दी में रातभर टार्च के सहारे खेतों की रखवाली कर रहा है।
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किसानों का दर्द सुनने और समझने वाला कोई नहीं। कड़ाके की ठंड में किसी ने खेत में मचान बना रखा है, तो कुछ किसान समूह बनाकर रात में लाठी लेकर खेतों की रखवाली करते हैं।
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ताखा, महेवा, भरथना, बढ़पुरा, जसवंतनगर, सैफई, चकरनगर, बसरेहर कोई भी ब्लाक ऐसा नहीं है जो गोवंश के खेतों में हो रहे नुकसान से अछूता हो। क्षेत्र में किसान फसलें बचाने के लिए जीजान एक किए हुए हैं।
जरा सी भी चूक होने पर आवारा गोवंश फसल चट कर जाते हैं। किसान किसी तरह खेतों में गेहूं, चना, जौ, सरसों आदि की फसलें बोई हुई हैं और इन फसलों को आवारा गोवंश उजाड़ रहे हैं।
ताखा क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से हर ग्राम पंचायत में गोशालाएं बनाई गई। ज्यादातर गोशालाएं खाली पड़ी हैं। बनवाने के बाद से ही उनका कोई उपयोग नहीं किया गया है।
क्षेत्र में करीब तीन हजार आवारा गोवंश छुट्टा घूम रहे, जो झुंड में किसानों की फसलों का सफाया करते हैं। कुछ देर के लिए भी किसान घर चला जाए तो आवारा गोवंशों का झुंड फसल को बर्बाद कर देते हैं।
कई किसानों ने तो खेतों में तार लगाए हैं। कई किसानों ने रस्सी से बैरिकेडिंग लगा रखी है। आवारा गोवंश बैरिकेडिंग को फांदकर खेतों में घुस जाते हैं और फसल को नष्ट करते हैं। ब्लॉक क्षेत्र में छह गोशालाएं संचालित हैं, जिसमें 350 गोवंश रखे गए हैं।
इन गोशालाओं की क्षमता 400 गोवंशों की है।
किसानों की सुनने वाला कोई नहीं
भरतिया गांव निवासी रामविलास का कहना है कि वह रात में कड़ाके की ठंड में खेतों की आवारा गोवंशों से रखवाली करते हैं। कई बार एसडीएम से लेकर बीडीओ से शिकायत कर चुके हैं।
नगला लछी गांव निवासी राजेश दुबे का कहना है कि दिन में आवारा गोवंश कस्बे में पड़ी खाली जगहों पर बैठे रहते हैं और रात को खेतों में खड़ी फसलों का सफाया करते हैं।
उजड़ी फसलों का नहीं मिलता मुआवजा
वैसे तो दैवी आपदा के कारण फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने बीमा योजना चला रखी है, पर गोवंश के कारण फसलों को होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।
किसान को दोहरी मार पड़ती है। एक तो लागत में काफी खर्च हुआ, उसके बाद फसल भी चली जाती है।
बोले जिम्मेदार
ताखा क्षेत्र में छह गोशालाएं संचालित हैं। दो गोशालाओं का विस्तार किया जा रहा है। एक नई गोशाला भी बनाई जा रही है। 15 दिन में छुट्टा घूम रहे सभी गोवंशों को गोशाला में पहुंचा दिया जाएगा।
- देवेंद्र पाल यादव, सहायक विकास अधिकारी
लाठी-डंडा और टार्च संग गुजर रही रात
निवाड़ीकला। ग्रामीण क्षेत्र में आवारा मवेशी खेतों में खड़ी फसल सफाचट कर रहे हैं । किसान रात दिन खेतों की रखवाली करने को विवश हैं। किसान छुटियन दीक्षित, देवानंद कठेरिया, गोरे दोहरे, व्यास जी दीक्षित, अनमोल रात को दस बजे गांव से दूर काली मंदिर से बैठे दिखाई दिए।
बताया कि आवारा गोवंशों द्वारा खेत चरने की समस्या से परेशान हैं। दूसरे गांव के भी आवारा पशु फसल चट कर जा रहे हैं। हमरी कोई सुनने वाला नहीं है। सर्द रातों में फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है।

गांव में लगभग 30-40 प्रतिशत फसल गोवंशों ने नष्ट कर दी है। लुधियानी चौराहे के पास अलाव ताप रहे अशोक, दुलारे शाक्य और उस्मान खां ने बताया कि कई महीनों से दिन रात जाग रहे, क्योंकि अन्ना मवेशी फसल को चट कर रहे हैं।
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