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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से 100 गांवों को जोड़ेगा पुल
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चकरनगर। भरेह और पचनद संगम को जोड़ने वाला महुआ सूडा वंशरी के पास निर्माणाधीन चंबल नदी का पुल अगले साल जनवरी में बनकर तैयार हो जाएगा। पुल बनने के बाद इटावा और औरैया जिले के करीब 100 गांव कानपुर-आगरा सिक्सलेन हाईवे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ जाएंगे।
सेतु निगम अधिकारियों के मुताबिक पुल का लगभग 94 फीसदी काम पूरा हो गया है। चंबल नदी पर करीब 56 करोड़ रुपये से बनाए जा रहे पुल के संपर्क मार्ग (अप्रोच रोड) का कार्य ही बाकी है। पुल के दोनों ओर पीडब्ल्यूडी मार्ग तैयार कर रहा है।
संभावना है कि जनवरी 2022 में पुल बनकर तैयार हो जाएगा। यह पुल बीहड़ की जनता के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। तत्कालीन प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने वर्ष 2013 में क्षेत्रीय लोगों की आवागमन की समस्या के मद्देनजर रखते हुए महुआ सूडा और वंशरी के बीच चंबल नदी पर पुल का निर्माण कार्य को मंजूरी दी थी।
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वन विभाग की स्वीकृति मिलने में हुई देरी के कारण चंबल नदी पर बनने वाले पुल का कार्य 2016 में शुरू हुआ। पुल का निर्माण होने के बाद भरेह संगम क्षेत्र की जनता को पचनद संगम विठोली क्षेत्र में आवागमन के लिए 40 किलोमीटर का चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
अभी तक इस क्षेत्र से वहां जाने के लिए लोगों को वाया चकरनगर होते हुए आना-जाना पड़ता था। अब लोग पुल पार करके सीधे जा सकेंगे।
बिठौली, वंशरी, अनेठा, कालेश्वर की गढ़िया, विडौरी, गता, पहालन, पिपरोली गढ़िया, कालापाथर समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को कानपुर की ओर जाने के लिए 60 से 70 किलोमीटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
यहां के बाशिंदे भरेह सिकरोड़ी मार्ग से बाबरपुर एनएच-2 हाईवे पर मात्र 20 किलोमीटर का सफर तय करके पहुंच जाएंगे।
पचनद संगम का चक्कर लगाने से बचेंगे
चंबल नदी पर पुल बनने के बाद भरेह क्षेत्र के हरौली, चकरपुरा, पथर्रा, महुआ सूडा, कांयछी, धर्मपुरा, गढाकास्दा, नीमाडांडा के साथ अजीतमल क्षेत्र की जनता को बुंदेलखंड की ओर जाने के लिए पचनद संगम से चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
इससे लोगों को आर्थिक लाभ भी होगा, वहीं क्षेत्र के लोगों को सुदूर शहरों में जाने के लिए अपनी फसलें बेचने के लिए भी भाड़ा व चक्कर बचा करेगा।
जनवरी 22 में तैयार हो जाएगा पुल
पुल बनाने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर केसर मसूद अंसारी ने बताया कि चंबल पुल के निर्माण का 94 फीसदी निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। बताया कि स्टैंड प्लेट पुल के खंभों पर डाली जाना बाकी है।
अंसारी के मुताबिक, बारिश के दौरान बाढ़ आने के कारण पुल के निर्माण का काम रुक गया था। चंबल नदी का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। बताया कि शीघ्र ही मशीनों को पुल के ऊपर ले जाकर स्टेन प्लेटों को डालने का काम शुरू हो जाएगा। जनवरी 2022 में क्षेत्रीय लोगों को आवागमन के लिए चालू हो जाएगा।
संपर्क मार्ग का काम भी लगभग पूरा
महुआ के पास अप्रोच का काम लगभग 92 फीसदी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीणों को मुआवजा भी बांट दिया गया है। क्षेत्र में ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भारेश्वर मंदिर और पचनद संगम कालेश्वर मंदिर पर जाने के लिए लोगों को 40 से 50 किलोमीटर का चक्कर लगाना होता था।
चंबल नदी के पुल के बनने से क्षेत्र के दोनों धार्मिक स्थलों पर आवागमन में आसानी के साथ समय व पैसे दोनों की बचत होगी। लोग आसानी से दोनों धार्मिक स्थलों के दर्शन और पूजा पाठ कर सकेंगे।
-गगन कुमार, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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सेतु निगम अधिकारियों के मुताबिक पुल का लगभग 94 फीसदी काम पूरा हो गया है। चंबल नदी पर करीब 56 करोड़ रुपये से बनाए जा रहे पुल के संपर्क मार्ग (अप्रोच रोड) का कार्य ही बाकी है। पुल के दोनों ओर पीडब्ल्यूडी मार्ग तैयार कर रहा है।
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संभावना है कि जनवरी 2022 में पुल बनकर तैयार हो जाएगा। यह पुल बीहड़ की जनता के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। तत्कालीन प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने वर्ष 2013 में क्षेत्रीय लोगों की आवागमन की समस्या के मद्देनजर रखते हुए महुआ सूडा और वंशरी के बीच चंबल नदी पर पुल का निर्माण कार्य को मंजूरी दी थी।
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वन विभाग की स्वीकृति मिलने में हुई देरी के कारण चंबल नदी पर बनने वाले पुल का कार्य 2016 में शुरू हुआ। पुल का निर्माण होने के बाद भरेह संगम क्षेत्र की जनता को पचनद संगम विठोली क्षेत्र में आवागमन के लिए 40 किलोमीटर का चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।
अभी तक इस क्षेत्र से वहां जाने के लिए लोगों को वाया चकरनगर होते हुए आना-जाना पड़ता था। अब लोग पुल पार करके सीधे जा सकेंगे।
बिठौली, वंशरी, अनेठा, कालेश्वर की गढ़िया, विडौरी, गता, पहालन, पिपरोली गढ़िया, कालापाथर समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को कानपुर की ओर जाने के लिए 60 से 70 किलोमीटर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
यहां के बाशिंदे भरेह सिकरोड़ी मार्ग से बाबरपुर एनएच-2 हाईवे पर मात्र 20 किलोमीटर का सफर तय करके पहुंच जाएंगे।
पचनद संगम का चक्कर लगाने से बचेंगे
चंबल नदी पर पुल बनने के बाद भरेह क्षेत्र के हरौली, चकरपुरा, पथर्रा, महुआ सूडा, कांयछी, धर्मपुरा, गढाकास्दा, नीमाडांडा के साथ अजीतमल क्षेत्र की जनता को बुंदेलखंड की ओर जाने के लिए पचनद संगम से चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
इससे लोगों को आर्थिक लाभ भी होगा, वहीं क्षेत्र के लोगों को सुदूर शहरों में जाने के लिए अपनी फसलें बेचने के लिए भी भाड़ा व चक्कर बचा करेगा।
जनवरी 22 में तैयार हो जाएगा पुल
पुल बनाने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर केसर मसूद अंसारी ने बताया कि चंबल पुल के निर्माण का 94 फीसदी निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। बताया कि स्टैंड प्लेट पुल के खंभों पर डाली जाना बाकी है।
अंसारी के मुताबिक, बारिश के दौरान बाढ़ आने के कारण पुल के निर्माण का काम रुक गया था। चंबल नदी का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। बताया कि शीघ्र ही मशीनों को पुल के ऊपर ले जाकर स्टेन प्लेटों को डालने का काम शुरू हो जाएगा। जनवरी 2022 में क्षेत्रीय लोगों को आवागमन के लिए चालू हो जाएगा।
संपर्क मार्ग का काम भी लगभग पूरा
महुआ के पास अप्रोच का काम लगभग 92 फीसदी पूर्ण हो चुका है। ग्रामीणों को मुआवजा भी बांट दिया गया है। क्षेत्र में ऐतिहासिक धार्मिक स्थल भारेश्वर मंदिर और पचनद संगम कालेश्वर मंदिर पर जाने के लिए लोगों को 40 से 50 किलोमीटर का चक्कर लगाना होता था।
चंबल नदी के पुल के बनने से क्षेत्र के दोनों धार्मिक स्थलों पर आवागमन में आसानी के साथ समय व पैसे दोनों की बचत होगी। लोग आसानी से दोनों धार्मिक स्थलों के दर्शन और पूजा पाठ कर सकेंगे।
-गगन कुमार, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग