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यमदूत बन सड़कों पर घूम रहे ‘जुगाड़’

Thu, 14 May 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा Updated Thu, 14 May 2015 11:32 PM IST
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 Become god of death.His are roaming the streets 'managed'

मोटर ह्वीकल एक्ट में जुगाड़ वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद जिले की सड़कों पर खुलेआम जुगाड़ वाहन यमदूत बनकर दौड़ रहे हैं। न तो परिवहन विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है और न ही ट्रैफिक पुलिस।

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चौराहों-चौराहों पर होने वाली वाहन चेकिंग में भी ऐसे वाहनों को नहीं रोका जाता है। भारी-भरकम सामान लादकर चलने के कारण इन वाहनों से दुर्घटनाएं भी खूब होती रहती हैं।
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इन ‘जुगाड़’ वाहनों का न तो बीमा होता है और न पंजीकरण। इनके मालिकों की हैसियत भी ज्यादा अच्छी नहीं होती। ऐसे में हादसा होने पर पीड़ित को कोई क्लेम तक नहीं मिल पाता। अपनी सुविधा के लिए कई लोग जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल कर कमाई के रास्ते निकाल लेते हैं। आम लोग भी बचत के लिए इनका इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते।
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गौरतलब है कि जिले में सबसे ज्यादा चलन में बाइक से बने जुगाड़ वाहन हैं। शहर में ऐसे वाहनों की संख्या करीब दो सैकड़ा है। हर जगह इन्हीं वाहनों से सामान की ढुलाई हो रही है। बाइक से बने ‘जुगाड़’ की क्षमता से ज्यादा सामान की लदाई की जाती है तो ये वाहन खतरनाक हो जाते हैं। आए दिन ऐसे वाहन राहगीरों के लिए खतरा साबित हो रहे हैं।

रात में तो खतरा कई गुना और बढ़ जाता है। यमदूत की तरह सड़कों पर दौड़ रहे इन वाहनों पर प्रशासन लगाम नहीं लगा रहा। मौजूदा समय में शहर में जगह-जगह वाहन चेकिंग हो रही है। बावजूद इसके जुगाड़ वाहनों पर कोई अंकुश नहीं दिखता। ऐसे वाहन चेकिंग कर रहे पुलिस कर्मियों की आंखों के सामने से गुजर जाते हैं, पर उन पर कार्रवाई नहीं होती।  

टीआई  वीरेंद्र सिंह यादव कहते हैं किजुगाड़ वाहनों की संख्या बढ़ रही है यह गंभीर कारण है। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई तो की जाती है। आगे अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।



सोच समझकर बेचें बाइक
अगर आपके घर में कोई पुरानी बाइक कबाड़ हालत में पड़ी है तो उसकी बिक्री खोच समझकर करें। अधिकांश लोग ऐसी बाइकों को कबाड़ की दुकान पर बेच देते हैं। जुगाड़ वाहन तैयार करने वाले यहीं से कबाड़ बाइकों को खरीदकर जुगाड़ वाहन तैयार करते हैं। पुरानी बाइक का बीमा नहीं होगा यह तय है। ऐसे में अगर किसी जुगाड़ वाहन से किसी की मौत हो जाती है और इंजन और चेचिस नंबर से यह साबित हो जाता है कि बाइक आपकी है तो मृतक के परिजन सीधे आप पर क्लेम कर सकते हैं। ज्ञात हो कि अधिकांश जुगाड़ वाहनों में पुरानी बाइकों को इस्तेमाल किया गया है। इनका न तो नंबर है और न कागज। ऐसे में अगर हादसे में मौत हो जाती है तो क्लेम मिलना मुश्किल होता है।

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