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एआरटीओ का सिस्टम फेल, बाबू ने कर दिया खेल
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इटावा। एआरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली में सिस्टम पूरी तरह फेल है। इसी का फायदा उठाकर
बाबू ने 45 ट्रकों का फर्जी पंजीकरण का बड़ा खेल कर दिया। उसने एआरटीओ की आईडी से ही फर्जी चेचिस
नंबरों पर रजिस्ट्रेशन कर आरसी जारी कर दी। खुलासा होने के बाद पूरा ठीकरा बाबू पर फोड़ दिया गया।
पुराने वाहनों के पंजीकरण के पहले उसकी फिटनेस की जांच होनी जरूरी है। फिटनेस की जांच आरआई करता
है। जिस समय फर्जी चेचिस नंबरों से ट्रकों का पंजीकरण हुआ, उस समय आरआई का चार्ज एआरटीओ
सौरभ कुमार के पास था। इसके बाद एनओसी, बीमा आदि कागजों का सत्यापन पटल बाबू को करना होता है। पूरी
जांच होने के बाद एआरटीओ पहले ऑफलाइन अनुमति देते हैं फिर उन्हीं की लॉगिंग आईडी से रजिस्ट्रेशन
ऑनलाइन किया जाता है। एआरटीओ कार्यालय में अधिकारियों की आईडी बाबुओं के पास रहती है। इसी का फायदा उठाकर बाबू अविनाश सिंह ने एक के बाद एक अलग-अलग तारीखों में 45 ट्रकों के फर्जी चेचिस नंबर पर पंजीकरण कर दिए। एआरटीओ कार्यालय में ज्यादातर काम बाबुओं के भरोसे ही होता है। ऐेसी ही लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये के वाहन शुल्क का घोटाला हुआ था। तब दो एआरटीओ जेल गए थे, एक महिला लिपिक पर भी मुकदमा हुआ था। अभी तक वह लापता है।
एआरटीओ सौरभ कुमार का कहना है कि बाबू ने ट्रकों का पंजीकरण की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी और न ही उन्होंने आरआई के हैसियत से किसी ट्रक को फिटनेस टेस्ट ही किया। बाबू ने आईडी का पासवर्ड चोरी कर गड़बड़ी की है, इसीलिए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जांच कर रही टीम ने एनआईसी से मांगा डाटा
45 ट्रकों के फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामले में जांच टीम में शामिल आरटीओ बरेली जयशंकर तिवारी ने बताया प्रथम दृष्टया बाबू अविनाश ने एआरटीओ के आदेश के बिना ही जुलाई 2019 में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया है। मणिपुर से ली गई एनओसी ऑनलाइन दिख रही है किंतु एनओसी में मणिपुर की जिन गाड़ियों के चेचिस नंबर लिखे गए हैं, वह कंपनियों ने उस प्रदेश के लिए एलाट ही नहीं किए। एनओसी कैसे जारी हो गई और उत्तर प्रदेश के जिन वाहनों के नंबर पर रजिस्ट्रेशन कराया गया है, इसके खुलासे के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से मदद मांगी गई है। कुछ अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है।
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बाबू ने 45 ट्रकों का फर्जी पंजीकरण का बड़ा खेल कर दिया। उसने एआरटीओ की आईडी से ही फर्जी चेचिस
नंबरों पर रजिस्ट्रेशन कर आरसी जारी कर दी। खुलासा होने के बाद पूरा ठीकरा बाबू पर फोड़ दिया गया।
पुराने वाहनों के पंजीकरण के पहले उसकी फिटनेस की जांच होनी जरूरी है। फिटनेस की जांच आरआई करता
है। जिस समय फर्जी चेचिस नंबरों से ट्रकों का पंजीकरण हुआ, उस समय आरआई का चार्ज एआरटीओ
सौरभ कुमार के पास था। इसके बाद एनओसी, बीमा आदि कागजों का सत्यापन पटल बाबू को करना होता है। पूरी
जांच होने के बाद एआरटीओ पहले ऑफलाइन अनुमति देते हैं फिर उन्हीं की लॉगिंग आईडी से रजिस्ट्रेशन
ऑनलाइन किया जाता है। एआरटीओ कार्यालय में अधिकारियों की आईडी बाबुओं के पास रहती है। इसी का फायदा उठाकर बाबू अविनाश सिंह ने एक के बाद एक अलग-अलग तारीखों में 45 ट्रकों के फर्जी चेचिस नंबर पर पंजीकरण कर दिए। एआरटीओ कार्यालय में ज्यादातर काम बाबुओं के भरोसे ही होता है। ऐेसी ही लापरवाही के चलते करोड़ों रुपये के वाहन शुल्क का घोटाला हुआ था। तब दो एआरटीओ जेल गए थे, एक महिला लिपिक पर भी मुकदमा हुआ था। अभी तक वह लापता है।
एआरटीओ सौरभ कुमार का कहना है कि बाबू ने ट्रकों का पंजीकरण की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी और न ही उन्होंने आरआई के हैसियत से किसी ट्रक को फिटनेस टेस्ट ही किया। बाबू ने आईडी का पासवर्ड चोरी कर गड़बड़ी की है, इसीलिए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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जांच कर रही टीम ने एनआईसी से मांगा डाटा
45 ट्रकों के फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामले में जांच टीम में शामिल आरटीओ बरेली जयशंकर तिवारी ने बताया प्रथम दृष्टया बाबू अविनाश ने एआरटीओ के आदेश के बिना ही जुलाई 2019 में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया है। मणिपुर से ली गई एनओसी ऑनलाइन दिख रही है किंतु एनओसी में मणिपुर की जिन गाड़ियों के चेचिस नंबर लिखे गए हैं, वह कंपनियों ने उस प्रदेश के लिए एलाट ही नहीं किए। एनओसी कैसे जारी हो गई और उत्तर प्रदेश के जिन वाहनों के नंबर पर रजिस्ट्रेशन कराया गया है, इसके खुलासे के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से मदद मांगी गई है। कुछ अन्य बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है।
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