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Etawah News: अंकित कमीशन पर व्यापारियों को फर्जी फर्म और बिल दिलाता था
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इटावा। नौकरी, लोन दिलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ देने के नाम पर सात करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) चोरी करने के बाद सरगना अंकित जौहरी का नाम चर्चा में आया है। पुलिस उसकी सारी कुंडली खंगालने में लगी हुई है। पुलिस की जांच में अंकित जौहरी के नेटवर्क में 100 से अधिक व्यापारी मिले हैं जो उसके संपर्क में थे। पुलिस छानबीन कर अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है।
सीओ सिटी अभय नारायण राय ने बताया कि जांच में पता चला है कि अंकित जौहरी एक स्कूल का संचालन करता था। उसके स्कूल में ही एक कार्यालय बना हुआ था, जिसमें सभी बैठकर फर्म से जुड़े काम और आपसी बैठकें करते थे। इसके अलावा आरोपी आसिफ शहर के एक बड़े व्यवसायी के यहां एकाउंट का काम करता था। इससे उसे बड़े व्यापारियों की सूचना मिल जाती थी।
इससे वह आसानी से फर्जीवाड़ा कर लेते थे। अंकित जौहरी व सीए तरुन अग्रवाल अच्छे दोस्त हैं। दोनों भोले-भाले व्यापारियों को अपने झांसे में लेकर सारा खेल करते थे। दोनों के ही निर्देशन में फर्जी, कागजी जीएसटी फर्मों का निर्माण कराया जाता था। इन फर्मों के नाम से बिना किसी वास्तविक माल आपूर्ति के जीएसटीआर-1 में अधिक बिक्री दर्शाई जाती थी जिससे अवैध रूप से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) जनरेट कर ली जाती थी।
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यह आईटीसी विभिन्न ठेकेदारों, व्यापारियों को पास-ऑन की जाती थी, जिसके एवज में आरोपी ढाई प्रतिशत तक कमीशन भी लेते थे। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूछताछ में कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है।
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सीओ सिटी अभय नारायण राय ने बताया कि जांच में पता चला है कि अंकित जौहरी एक स्कूल का संचालन करता था। उसके स्कूल में ही एक कार्यालय बना हुआ था, जिसमें सभी बैठकर फर्म से जुड़े काम और आपसी बैठकें करते थे। इसके अलावा आरोपी आसिफ शहर के एक बड़े व्यवसायी के यहां एकाउंट का काम करता था। इससे उसे बड़े व्यापारियों की सूचना मिल जाती थी।
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इससे वह आसानी से फर्जीवाड़ा कर लेते थे। अंकित जौहरी व सीए तरुन अग्रवाल अच्छे दोस्त हैं। दोनों भोले-भाले व्यापारियों को अपने झांसे में लेकर सारा खेल करते थे। दोनों के ही निर्देशन में फर्जी, कागजी जीएसटी फर्मों का निर्माण कराया जाता था। इन फर्मों के नाम से बिना किसी वास्तविक माल आपूर्ति के जीएसटीआर-1 में अधिक बिक्री दर्शाई जाती थी जिससे अवैध रूप से आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) जनरेट कर ली जाती थी।
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यह आईटीसी विभिन्न ठेकेदारों, व्यापारियों को पास-ऑन की जाती थी, जिसके एवज में आरोपी ढाई प्रतिशत तक कमीशन भी लेते थे। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूछताछ में कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है।