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...और जेके हास्पिटल के दरवाजे बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
Updated Tue, 09 Jun 2015 11:16 PM IST
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लंबे से समय से भुगतान न होने के कारण स्वास्थ्य बीमा कार्डधारियों के लिए शहर के जेके हास्टिल सहित सभी तीन प्राइवेट अस्पतालों ने अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं। इलाज न मिलनेे से कई जिलों के गरीब मरीज दर-दर भटक रहे हैं।
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अकेले जेेेके हास्पिटल का ही 1.75 करोड़ रुपये बकाया है। पिछले डेढ़ साल से भुगतान न करने से अस्पताल प्रबंधन ने उपचार देने से अब हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं बीमा कंपनी सरकार से प्रीमियम न मिलने की बात कहकर जिम्मेदारी से पलड़ा झाड़ रही हैं।
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गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत गरीब तबके क ो उपचार कराने के लिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को अधिकृ त किया गया था। यूनाइटेड इंडिया ने मेडसेप को इटावा में काम दे दिया। इटावा में करीब 65 हजार स्वास्थ्य बीमा के कार्ड बनाए गए हैं। कार्ड बनवाने के लिए मरीज को 30 रुपये का अंशदान देना होता है।
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इसके बाद 450 रुपये में 70 फीसदी केंद्र तथा 30 फीसदी प्रीमियम के रूप में राज्य सरकार को जमा करना होता है। कई कार्ड तो ऐसे है जो बनाए तो मेडसेप ने ही है लेकिन लग नहीं रहे। इनमें बायोमैट्रिक खामी बताई जा रही है।
लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए पहले 15 प्राइवेट हास्पिटल अनुबंधित किए गए थे लेकिन भुगतान न होने से अस्पताल प्रबंधन ने इलाज करने से साफ इंकार कर कर दिया है। मैनेजिंग डायरेक्टर डा. मनोज यादव ने बताया कि 1.75 करोड़ रुपये फंसा हुआ है। तमाम प्रयास करने के बाद भी भुगतान नहीं हो पा रहा है।
कई बार बीमा कंपनी, सरकार को भी लिखा जा चुका है। सीएमओ स्तर से भी प्रयास किए गए हैं। कार्ड मेडसेप ने ही बनाए हैं। कई कार्डंो में तो फिंगर प्रिंट ही सही न होने के कारण काम नहीं करते।
कार्ड लगाते ही तीन जगह डाटा पहुंचता है दिल्ली, लखनऊ और मेडसेप को। इसके बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है हम कब तक जेब से पैसा लगाकर इलाज करते रहे। पांच-सात जिलों से यहां मरीज आ रहे हैं।
मेडसेप जिला प्रबंधक, सगीर अहमद कहते हैं अनुबंधित अस्पतालों को 2.20 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। सरकार की ओर से प्रीमियम जमा न करने से समस्या खड़ी हुई है। मरीज पीजीआई या जिला अस्पताल में तब तक उपचार करा सक ते है। भुगतान के लिए लगातार पत्र व्यवहार चल रहा है।
क्या कहते हैं मरीज
कन्नौज के वीरपुर से आई रानी देवी के नाम से कार्ड है। परिवार में पांच सदस्य हैं लेेकिन कार्ड में केवल एक कवर्ड हैं। रानी की पित्त की थैली में पथरी है। दो दिन से जे के हास्पिटल में है लेकिन प्रबंधन ने उपचार देने से मना कर दिया है।
डूंढ़पुरा इटावा कुंती देवी की बच्चेदानी का ऑपरेशन होना है। बीमा कार्ड होने के बाद भी उपचार नहीं मिल पा रहा है। अन्य अस्पताल 40 हजार का खर्चा बता रहे है। जेके हास्पिटल ने उपचार देने से साफ मना कर दिया है। स्वास्थ्य बीमा करवाना ही बेकार हो गया है।
धनौली औरैया की रामके शी के गुर्दे में पथरी का ऑपरेशन होना है। रामकेशी स्मार्ट कार्ड लेकर भटक रही है। उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। उसने बताया कि उसके पास इतना पैसा नही है कि आगरा या कानपुर जाकर किसी अस्पताल में ऑपरेशन करा सकें।
जालौन के कुठौंद से आई मुन्नी देवी की पित्तथैली में पथरी तथा बच्चे दानी का ऑपरेशन होना है। मुन्नी तीन दिन से जेके हास्पिटल में है लेकिन उससे अस्पताल प्रबंधन ने स्मार्ट पर इलाज करने से इंकार कर दिया है।