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इटावा : बीहड़ का ककोरा खाएं, रोगों को दूर भगाएं
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सब्जी की दुकान पर रखे ककोरा। सवांद
- फोटो : ETAWAH
चकरनगर। बरसात के मौसम में चंबल की बीहड़ों में पैदा होने वाला ककोरा एक औषधीय सब्जी है। इन दिनों बड़े पैमाने पर ग्रामीण बीहड़ से इसे तोड़ कर घरों में ला रहे हैं। कई ग्रामीण बाजारों में इसे बेचकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं।
कस्बे के बाजारों में देसी ककोरा 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। बरसात के महीनों में क्षेत्र के किसानों के लिए ककोरा आमदनी का स्रोत है। डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ककोरा खाना चाहिए। इससे बच्चे की कोशिकाओं का संपूर्ण विकास होता है। ककोरा में विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा होती है। इससे शरीर में विषाक्त तत्वों की उत्पत्ति नहीं होती है। कैंसर का खतरा भी कम होता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सत्येंद्र यादव ने बताया कि ककोरा में विटामिन ए भी भरपूर मात्रा में होता है। यह आंखों से जुड़ी बीमारियों को खत्म करने में सहायक होता है। वायरल बुखार में ककोरा के पत्ते पानी में उबालकर शहद के साथ पीने से फायदा होता है। ककोरा का पाउडर नियमित खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है। ककोरा पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है। ककोरा के पाउडर को पानी में डालकर नियमित स्नान करने से शरीर में दुर्गंध, पसीना आदि की बीमारी में लाभ मिलता है।
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कस्बे के बाजारों में देसी ककोरा 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। बरसात के महीनों में क्षेत्र के किसानों के लिए ककोरा आमदनी का स्रोत है। डॉक्टरों के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ककोरा खाना चाहिए। इससे बच्चे की कोशिकाओं का संपूर्ण विकास होता है। ककोरा में विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा होती है। इससे शरीर में विषाक्त तत्वों की उत्पत्ति नहीं होती है। कैंसर का खतरा भी कम होता है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सत्येंद्र यादव ने बताया कि ककोरा में विटामिन ए भी भरपूर मात्रा में होता है। यह आंखों से जुड़ी बीमारियों को खत्म करने में सहायक होता है। वायरल बुखार में ककोरा के पत्ते पानी में उबालकर शहद के साथ पीने से फायदा होता है। ककोरा का पाउडर नियमित खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है। ककोरा पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखता है। ककोरा के पाउडर को पानी में डालकर नियमित स्नान करने से शरीर में दुर्गंध, पसीना आदि की बीमारी में लाभ मिलता है।
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