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अर्थी नहीं बाइक से ले गए शव

Etawah Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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इटावा। मृतका अनीता के शव को अंतिम संस्कार के लिए ससुरालीजन अर्थी से नहीं बल्कि मोटरसाइकिल से ले गए। गांव के कुछ लोगोें ने बताया कि अनीता का पति सत्यवीर सुबह-सुबह ही एक अन्य व्यक्ति के साथ अनीता को मोटरसाइकिल पर बिठाकर यह कहकर गांव के बाहर ले गया कि उसकी तबियत बिगड़ गई है दवा दिलाने जा रहा हूं। उसके बाद फिर अंतिम संस्कार की ही जानकारी मिली। गांव वालों ने दबी जुबान में पुलिस को बताया कि महिला को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। उसकी 6 साल की बेटी भी भली चंगी थी। अचानक दोनों की मौत समझ में नहीं आई। यदि वह बीमार ही थी तो अस्पताल से घर लाना था न कि अस्पताल से सीधे जला देना था।
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पुलिस को भी करनी पड़ी मशक्कत
इटावा। मां बेटी की हत्या के मामले को ससुरालीजनों के साथ गांव वालों ने भी दबाने का पूरा प्रयास किया। गांव में आपस में रिश्तेदारी होने के कारण ग्रामीण भी पुलिस को गुमराह करते रहे। पहले तो गांव में पुलिस को देख ग्रामीणों ने अपने-अपने घर के दरवाजे बंद कर लिए। कुछ ग्रामीणों ने तो पुलिस को शव जलाने का सही स्थान न बताकर गुमराह करने का प्रयास करते रहे। पहले तो एसएसपी व एसडीएम के सामने कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन बाद पुलिस के जोर देने पर कुछ लोगों ने चुप्पी तोड़ आधी अधूरी जानकारी दी। बाद में पता चला कि जिन ग्रामीणों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की वे ससुराल वालों के रिश्तेदार थे।
शव को जलाने के तरीके से पुलिस का शक गहराया
इटावा। मां बेटी की मौत के बाद पुलिस को उनकी अंतिम क्रिया का तरीका भी समझ में नहीं आया। एक तो ससुरालीजनों ने घर की बहू को टायर व प्लास्टिक के बोरों व घासफूस से जलाया। दूसरा 6 साल की मासूम बेटी को पत्थर बांधकर फेंकने की बात भी समझ में नहीं आ आई। इन बातों की वजह से भी पुलिस मामले को प्रथम दृष्टया हत्या ही मान रही है। इसके बाद बाद ससुरालियों का घर छोड़कर भागना भी संदेह पैदा कर रहा है।
जल्दबाजी के पीछे क्या था कारण
इटावा। मृतक मां-बेटी के अंतिम संस्कार में की गई जल्दबाजी के पीछे आखिर क्या कारण था, यह अपने आप में एक सवाल है। ससुरालीजनों ने न तो रिश्तेदारों का ही इंतजार किया और न ही मृतका के मायके पक्ष के लोगों के आने का। सुबह 6:00 बजे ही ससुरालीजनों ने गांव के कुछ रिश्तेदारों के साथ मिलकर पहले लड़की का शव नहर में फेंका, बाद में महिला को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, उधर गांव के रिश्तेदार घर के कुछ सदस्यों के साथ महिला को जलाने पहुंचे, वहीं घर में सास ससुर ननद व देवर घर में ताला लगाकर भाग गए।
एक साथ कैसे हुई मां-बेटी की मौत
चाहे पुलिस अधिकारी हों या फिर ग्रामीण सभी एक ही सवाल का जवाब पाना चाहते थे कि आखिर एक साथ मां बेटी की मौत कैसे हुई। अगर मौत का कारण बीमारी है तो दोनों की एक साथ मौत संभव नहीं है। न ही वह दोनों बीमार थीं। एक साथ दो मौतों से पुलिस शुरुआती जांच में मान रही है कि दोनों की हत्या ही की गई है।
जहर खाने की नहीं हुई पुष्टि
ससुरालीजनों का कहना था कि अनीता ने खुद व बेटी को जहर खिलाकर जान दी, लेकिन जांच करने पहुंची पुलिस टीम को पहले तो घर का मेनगेट में अंदर से ताला लगा मिला। पड़ोस के एक घर से पुलिस टीम जांच के लिए अंदर पहुंची। लेकिन टीम को न तो कहीं कोई उल्टी का सुराग मिला, न कोई अन्य ठोस सबूत मिला जिससे मौत का कारण जहर खाना माना जाए। रिश्तेदारों से भी पूछताछ में इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि मृतका के मुंह से किसी तरह का कोई झाग निकला था या फिर उसका शरीर नीला पड़ गया। गांव की अन्य महिलाओं से इस बात की तश्दीक की।

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