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अमीरी तो बढ़ती दिख रही, करदाता नहीं
Updated Sat, 17 Nov 2018 11:18 PM IST
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इटावा। आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या बेशक दो गुना हो गई है। लेकिन नए-नए शोरूम, लग्जरी फोर व्हीलर्स, नव विकसित कालोनियों में धड़ाधड़ बन रहे मकानों और बढ़ते नव धनाढ्य वर्ग को देखते हुए करदाताओं की संख्या अभी भी कम लगती है। करीब तीन लाख पैनकार्ड धारकों में से सिर्फ 11 फीसदी के रिटर्न फाइल करने से यह साबित भी हो रहा है। आयकर विभाग भी मान रहा है कि व्यवस्था को पटरी पर लाने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। आंकड़े बता रहे कि तीन साल पहले तक आयकर विभाग करदाताओं से जितना टैक्स वसूलता था, उससे अधिक की भरपाई टीडीएस भुगतान में करनी पड़ती थी। इस पर लगाम तो लगी है, लेकिन नतीजे बहुत ज्यादा अपेक्षित नहीं रहे हैं।
कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी अभाव की जिंदगी बसर करने को मजबूर है। पहले की तुलना में मध्यम से उच्च वर्ग के रहन सहन का स्तर बेहतर हुआ है। इससे इतना तो साफ है कि लोगों की आमदनी बढ़ी है। लेकिन उस हिसाब से करदाता नहीं बढ़े हैं। आयकर विभाग के अनुसार, जिले में वर्ष 2016-17 में कुल 17 हजार रिटर्न दाखिल किए जाते थे, जो 2017-18 में दोगुना के करीब 33.5 हजार हो गए। चालू वित्तीय वर्ष में इनकी संख्या 44 हजार किए जाने का लक्ष्य है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 33.5 हजार रिटर्न फाइल किए जा रहे हैं। इनमें करीब 55 फीसदी कर्मचारी वर्ग और 45 फीसदी कारोबारी हैं। कारोबारियों में से करीब 16 हजार रिटर्न फाइल होते हैं। इनमें से करीब 11 हजार कारोबारी टैक्स अदा कर रहे हैं। इसमें ज्यादातर कारोबारी टीडीएस रिफंड पाने के लिए निल का रिटर्न फाइल करते हैं, जिनमें अमूमन ठेकेदार होते हैं।
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आयकर विभाग मान रहा कि ट्रेंड में सुधार हो रहा है। पहले लोग रिटर्न दाखिल ही नहीं करते थे। इसके अलावा टीडीएस के तौर पर कटे हुए टैक्स को वापस लेने के लिए फर्जी क्लेम करते थे। इसे रोका गया है। वर्ष 2015 में करीब 16 हजार रिटर्न फाइल हुए थे। इसके बाद विभाग का राजस्व माइनस नौ करोड़ रहा था। यह माइनस राजस्व तब बढ़ता है, जब टैक्स के तौर पर प्राप्त राजस्व से अधिक टीडीएस का भुगतान होता है। अब इसमें सुधार हुआ है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में टैक्स कलेक्शन 11.33 करोड रहा यानी माइनस राजस्व की पूर्ति करके लाभ की स्थिति बनी है। उसके बाद वर्ष 2017-18 में यह बढ़कर 22.2 करोड़ हो गया है। इस तरह टैक्स कलेक्शन में लगातार वृद्धि हो रही है।
आयकर अधिकारी अरविंद कटियार ने बताया कि करदाताओं की संख्या बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। छोटे रिटेलर, मेडिकल स्टोर, खानपान कारोबारी, आढ़ती आदि अन्य व्यवसाय से जुड़े ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है, जो बगैर बिलिंग के खरीद व बिक्री कर रहे हैं। साथ ही गेस्ट हाउस, छोटे रेस्टोरेंट, होटल, मैरिज होम की भी सूची मंगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वेच्छा से कर अदायगी नहीं करेंगे, उनके यहां भविष्य में सर्वे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
-तीन लाख पैनकार्ड धारक, सिर्फ 11 प्रतिशत रिटर्न फाइल करने वाले
-रिटर्न भरने वालों में महज 30 फीसदी अदा कर रहे टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
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कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी अभाव की जिंदगी बसर करने को मजबूर है। पहले की तुलना में मध्यम से उच्च वर्ग के रहन सहन का स्तर बेहतर हुआ है। इससे इतना तो साफ है कि लोगों की आमदनी बढ़ी है। लेकिन उस हिसाब से करदाता नहीं बढ़े हैं। आयकर विभाग के अनुसार, जिले में वर्ष 2016-17 में कुल 17 हजार रिटर्न दाखिल किए जाते थे, जो 2017-18 में दोगुना के करीब 33.5 हजार हो गए। चालू वित्तीय वर्ष में इनकी संख्या 44 हजार किए जाने का लक्ष्य है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 33.5 हजार रिटर्न फाइल किए जा रहे हैं। इनमें करीब 55 फीसदी कर्मचारी वर्ग और 45 फीसदी कारोबारी हैं। कारोबारियों में से करीब 16 हजार रिटर्न फाइल होते हैं। इनमें से करीब 11 हजार कारोबारी टैक्स अदा कर रहे हैं। इसमें ज्यादातर कारोबारी टीडीएस रिफंड पाने के लिए निल का रिटर्न फाइल करते हैं, जिनमें अमूमन ठेकेदार होते हैं।
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आयकर विभाग मान रहा कि ट्रेंड में सुधार हो रहा है। पहले लोग रिटर्न दाखिल ही नहीं करते थे। इसके अलावा टीडीएस के तौर पर कटे हुए टैक्स को वापस लेने के लिए फर्जी क्लेम करते थे। इसे रोका गया है। वर्ष 2015 में करीब 16 हजार रिटर्न फाइल हुए थे। इसके बाद विभाग का राजस्व माइनस नौ करोड़ रहा था। यह माइनस राजस्व तब बढ़ता है, जब टैक्स के तौर पर प्राप्त राजस्व से अधिक टीडीएस का भुगतान होता है। अब इसमें सुधार हुआ है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में टैक्स कलेक्शन 11.33 करोड रहा यानी माइनस राजस्व की पूर्ति करके लाभ की स्थिति बनी है। उसके बाद वर्ष 2017-18 में यह बढ़कर 22.2 करोड़ हो गया है। इस तरह टैक्स कलेक्शन में लगातार वृद्धि हो रही है।
आयकर अधिकारी अरविंद कटियार ने बताया कि करदाताओं की संख्या बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। छोटे रिटेलर, मेडिकल स्टोर, खानपान कारोबारी, आढ़ती आदि अन्य व्यवसाय से जुड़े ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है, जो बगैर बिलिंग के खरीद व बिक्री कर रहे हैं। साथ ही गेस्ट हाउस, छोटे रेस्टोरेंट, होटल, मैरिज होम की भी सूची मंगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वेच्छा से कर अदायगी नहीं करेंगे, उनके यहां भविष्य में सर्वे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
-तीन लाख पैनकार्ड धारक, सिर्फ 11 प्रतिशत रिटर्न फाइल करने वाले
-रिटर्न भरने वालों में महज 30 फीसदी अदा कर रहे टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो