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बाढ़ से 31 गांवों के 756 घरों को पहुंचा नुकसान
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फोटो संख्या 24- चकरनगर भरेह मार्ग बाढ़ से हुआ क्षतिग्रस्त
- फोटो : ETAWAH
चकरनगर। तहसील क्षेत्र के 31 गांवों में बाढ़ की त्रासदी से 756 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। तहसीलदार चकरनगर यशवीर सिंह यादव ने बताया कि बाढ़ ग्रस्त सभी गांवों का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान कोई भी परिवार नदी की बाढ़ से बेघर नहीं हुआ है। जिन घरों में समस्या है उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। क्षतिग्रस्त मकानों के आंकलन के हिसाब से आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाएगी। कृषि भूमि पर जिन किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है। उसका सर्वे किया जा रहा है।
बाढ़ की त्रासदी में ग्रामीणों का ही नहीं सरकार को भी काफी नुकसान हुआ है। सड़कें, पुलियां, बिजली की लाइनें, सरकारी स्कूल को काफी नुकसान हुआ है। स्कूलों में रखा फर्नीचर, खेलकूद का सामान, पठन पाठन की सामग्री सभी चीजें पानी के कारण खराब हो गई हैं। इन्हें अध्यापक धूप में सुखा कर बच्चों के उपयोग के लिए तैयार कर रहे हैं। क्योंकि 23 से जूनियर क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खुल जाएंगे।
खिरीटी स्कूल के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार बताते हैं कि पंचायत सफाई कर्मियों ने स्कूल की दुर्दशा सुधारने में कोई सहयोग नहीं किया है। बार-बार बुलाने पर भी सफाई कर्मी नहीं आ रहे। जिसके चलते स्कूल की साफ सफाई शिक्षकों ने मिलकर ही शुरू कर दी है।
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भरेह चकरनगर सिकरोडी मार्ग की पुलिया रोड क्षतिग्रस्त हो गई है। आवागमन के लिए लोगों को सावधानियां बरतनी पड़ता है। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि हुई है। जिन गांवों में बाढ़ का कहर टूटा है वहां के संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
बीईओ चकरनगर अलकेश कुमार ने बताया कि 30 विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए थे। जिनमें 18 विद्यालय पूर्ण रूप से डूब गए थे। विद्यालयों की साफ सफाई के साथ पठन-पाठन की सामग्री को दुरुस्त कराया गया। बच्चों के पठन-पाठन के लिए सुदृढ़ व्यवस्था के निर्देश शिक्षकों को दिए गए।
चकरनगर। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण में जलीय जीवो को संरक्षित करने की वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण हर वर्ष बाढ़ में दुर्लभ जलीय जीवों के बच्चे मौत के मुंह में समा जाते हैं। विलुप्त दुर्लभ जलीय जीवों में डालफिन, मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुओं आदि को संरक्षित करने की मुहिम को इससे बड़ा झटका लगता है। चंबल नदी को वर्ष 1979 में जलीय जीवो के संरक्षण के लिए चुना गया था।
जून माह में अंडों से निकलने वाले सैकड़ों की संख्या में बच्चों को नदी में छोड़ दिया गया। सेंच्युअरी प्रशासन को यह मालूम होता है कि अगले माह नदी में बाढ़ आएगी और सब बह जाएंगे। चंबल सेंच्युअरी क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि घड़ियाल के 700 अंडे कुकरैल संरक्षण केंद्र से जून माह में भेजे गए थे। वयस्क होने पर अंडो से निकले बच्चे नदी में छोड़े जाएंगे। स्थानीय तौर पर जलीय जीवो के बच्चों को संरक्षित करने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
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बाढ़ की त्रासदी में ग्रामीणों का ही नहीं सरकार को भी काफी नुकसान हुआ है। सड़कें, पुलियां, बिजली की लाइनें, सरकारी स्कूल को काफी नुकसान हुआ है। स्कूलों में रखा फर्नीचर, खेलकूद का सामान, पठन पाठन की सामग्री सभी चीजें पानी के कारण खराब हो गई हैं। इन्हें अध्यापक धूप में सुखा कर बच्चों के उपयोग के लिए तैयार कर रहे हैं। क्योंकि 23 से जूनियर क्लास के बच्चों के लिए स्कूल खुल जाएंगे।
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खिरीटी स्कूल के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार बताते हैं कि पंचायत सफाई कर्मियों ने स्कूल की दुर्दशा सुधारने में कोई सहयोग नहीं किया है। बार-बार बुलाने पर भी सफाई कर्मी नहीं आ रहे। जिसके चलते स्कूल की साफ सफाई शिक्षकों ने मिलकर ही शुरू कर दी है।
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भरेह चकरनगर सिकरोडी मार्ग की पुलिया रोड क्षतिग्रस्त हो गई है। आवागमन के लिए लोगों को सावधानियां बरतनी पड़ता है। मार्ग के क्षतिग्रस्त होने से बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि हुई है। जिन गांवों में बाढ़ का कहर टूटा है वहां के संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
बीईओ चकरनगर अलकेश कुमार ने बताया कि 30 विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए थे। जिनमें 18 विद्यालय पूर्ण रूप से डूब गए थे। विद्यालयों की साफ सफाई के साथ पठन-पाठन की सामग्री को दुरुस्त कराया गया। बच्चों के पठन-पाठन के लिए सुदृढ़ व्यवस्था के निर्देश शिक्षकों को दिए गए।
चकरनगर। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण में जलीय जीवो को संरक्षित करने की वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण हर वर्ष बाढ़ में दुर्लभ जलीय जीवों के बच्चे मौत के मुंह में समा जाते हैं। विलुप्त दुर्लभ जलीय जीवों में डालफिन, मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुओं आदि को संरक्षित करने की मुहिम को इससे बड़ा झटका लगता है। चंबल नदी को वर्ष 1979 में जलीय जीवो के संरक्षण के लिए चुना गया था।
जून माह में अंडों से निकलने वाले सैकड़ों की संख्या में बच्चों को नदी में छोड़ दिया गया। सेंच्युअरी प्रशासन को यह मालूम होता है कि अगले माह नदी में बाढ़ आएगी और सब बह जाएंगे। चंबल सेंच्युअरी क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि घड़ियाल के 700 अंडे कुकरैल संरक्षण केंद्र से जून माह में भेजे गए थे। वयस्क होने पर अंडो से निकले बच्चे नदी में छोड़े जाएंगे। स्थानीय तौर पर जलीय जीवो के बच्चों को संरक्षित करने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।

फोटो संख्या 25- क्वारी नदी की पुलिया की टूटी एप्रोच- फोटो : ETAWAH