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Etawah News: 13 गिरफ्तार, दो की मौत...अब चार की तलाश में ईओडब्ल्यू

Thu, 23 Jul 2026 10:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 10:53 PM IST
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13 arrested, two dead... EOW now searching for four others.
इटावा। वर्ष 2008-09 के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने एक बार फिर कार्रवाई तेज कर दी है। बीडीएस स्कूल के संचालक लालसिंह की गिरफ्तारी के बाद अब चार अन्य विद्यालय संचालकों की गिरफ्तारी की तैयारी शुरू हो गई है। ईओडब्ल्यू की टीमें आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। वहीं, घोटाले में नामजद चार अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन और गिरफ्तारी की कार्रवाई शासन से मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ाई जाएगी।
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छात्रवृत्ति घोटाले में कुल चार मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें से एक मुकदमे में शासन से गिरफ्तारी की अनुमति मिलने के बाद हाल ही में ईओडब्ल्यू ने संत बीडीएस स्कूल के संचालक को गिरफ्तार किया था। इसी मुकदमे में अब चार अन्य विद्यालय संचालकों की गिरफ्तारी बाकी है। ईओडब्ल्यू के अनुसार इस मामले में टीम के लिए कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी प्रस्तावित थी, लेकिन इनमें से दो विद्यालय संचालकों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मृत्यु हो चुकी है। शेष नौ में से एक आरोपी लालसिंह गिरफ्तार हो चुका है, जबकि बाकी चार संचालकों की तलाश जारी है। वहीं चार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन से अनुमति का इंतजार किया जा रहा है। इस मामले में जिला पुलिस की ओर से पहले ही 12 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी थी।
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करीब 16 वर्ष पुराने इस घोटाले का खुलासा वर्ष 2009 में हुआ था। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर दिसंबर 2009 में जिले के लगभग 30 विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शुरुआती जांच जिला पुलिस ने की, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए छह मई 2010 को उत्तर प्रदेश शासन ने जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू), कानपुर सेक्टर को सौंप दी। लंबी जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने दो फरवरी 2019 को दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए। पहले मुकदमे में 27 ऐसे विद्यालयों को आरोपी बनाया गया, जो केवल कागजों पर संचालित पाए गए। दूसरे मुकदमे में 38 ऐसे पूरी तरह फर्जी विद्यालयों का खुलासा हुआ। इन मामलों में विद्यालय संचालकों, प्रधानाचार्यों और संबंधित अधिकारियों को आरोपी बनाया गया। इसके अलावा इस पूरे प्रकरण में दो अन्य मुकदमे भी दर्ज किए गए, जिससे कुल मुकदमों की संख्या चार हो गई और घोटाले की धनराशि 14 करोड़ को पार कर गई।
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