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चिंताजनक: चार साल में चार गुना बढ़े किडनी के युवा रोगी, डॉ बोले- खानपान का सीधा असर सेहत पर पड़ता है

Mon, 23 Jan 2023 07:42 AM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Mon, 23 Jan 2023 07:42 AM IST
सार

एटा में दिन-ब-दिन किडनी रोगियों में बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह खतरनाक हैं। पिछले चार सालों में यहां 60 फीसदी तक किडनी रोगियों की संख्या बढ़ गई है। 

 

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Young kidney patients have increased four times in four years in Etah
किडनी रोगियों में बढ़ोतरी। - फोटो : istock

विस्तार

भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं के खानपान की आदतें खराब हो रही हैं। सेहत की फिक्र न करने की वजह से इसका सीधा असर किडनी पर पड़ रहा है। महज चार साल में जिले में किडनी के युवा रोगियों की संख्या चार गुना बढ़ी है। यह बात मेडिकल कॉलेज के आंकड़े बता रहे हैं। वर्ष 2019 में जहां 15 प्रतिशत युवा डायलिसिस के लिए पहुंच रहे थे। वर्ष 2022 में यह संख्या 60 प्रतिशत पर जा पहुंची।

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मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 में डायलिसिस यूनिट पीपीई मॉडल पर शुरू की गई। पहले साल में मार्च से दिसंबर तक इस यूनिट में 4200 मरीजों की डायलिसिस की गई। इनमें 15 प्रतिशत युवाओं ने डायलिसिस कराई। धीरे-धीरे इस संख्या में इजाफा हुआ। वर्ष 2022 में डायलिसिस कराने वाले कुल लोगों की संख्या 9124 पर जा पहुंची। कुल मरीज तो लगभग दोगुना बढ़े। लेकिन युवाओं की संख्या चार गुना बढ़ गई। 60 प्रतिशत संख्या युवाओं की रही। 

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खान-पान से बिगड़ रही किडनी की सेहत

मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि युवाओं की किडनी खराब होने का बड़ा कारण बिगड़ा हुआ खानपान है। इससे वह दूसरी गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। किडनी खराब होने से एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन बनना कम हो जाता है। इससे हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है। ऐसे में किडनी फेल होने की आशंका बढ़ जाती है। 

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मेडिकल कॉलेज के चेस्ट फिजीशियन डॉ. जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन किडनी को नियंत्रित करता है। अगर किडनी खराब होना शुरू हो जाएगी तो एल्डोस्टेरोन हार्मोन अनियंत्रित हो जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। यह किडनी फेल होने का कारण बनता है। मादक पदार्थों का अत्यधिक सेवन भी किडनी पर गंभीर असर डालता है।

साल दस साल बढ़े आंकड़े

वर्ष मरीजों की संख्या युवाओं का प्रतिशत
2019 4200 15 प्रतिशत
2020 8508 25 से 28 प्रतिशत
2021 8773 40 प्रतिशत
2022 9124 60 प्रतिशत  
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