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ग्रामीणों का जिलापूर्ति कार्यालय पर हंगामा
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sat, 25 Jul 2015 11:12 PM IST
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विकास खंड सकीट की राशन दुकान मिर्जापुर सई को लेकर आए दिन हो रही शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। राशन दुकान को लेकर गांव में गुटबाजी भी चरम पर है। एक पक्ष दुकान को निलंबित कराने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहा है, तो दूसरा पक्ष दुकान को बहाल कराने के लिए अधिकारियों को ज्ञापन सौंप रहा है। शनिवार को भी सैकड़ों ग्रामीणों ने राशन न मिलने और दुकान निलंबित कराकर दुबारा से चुनाव करने की मांग को लेकर जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय पर हंगामा काटा। बाद में कलक्ट्रेट पहुंचे, यहां एएसडीएम सुनील कुमार को ज्ञापन सौंपा।
शनिवार की सुबह तीन-चार ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर गांव के सैकड़ों महिला पुरुष पहले जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। यहां हंगामा किया। बाद में जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे, यहां जिला पंचायत अध्यक्ष से मुलाकात नहीं हुई। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचे जहां एएसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या रखी। ग्रामीण मुन्नालाल ने बताया कि दुकान काफी समय से निलंबित चल रही है। ग्रामीणों द्वारा कई बार राशन की दुकान को निरस्त कर चुनाव कराने की मांग की गई है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस दौरान उन्होंने राशन डीलर पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व डीलर उन्हें लगातार धमकियां दे रहा है। वहीं राशन भी नहीं मिल रहा। एसडीएम अजीत कुमार सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस मौके पर विनोद कुमार, मुकेशचंद, रामखिलाड़ी, दिनेश कुमार, रमेशचंद्र, किशोरी लाल, रणधीर सिंह, विवेक कुमार, सुम्मेर सिंह, रजनेश, इंद्रपाल, संजू यादव, मुकेशचंद्र, सुशील, राजीव कुमार, दौजीराम, नाथूराम, चंद्रप्रकाश आदि लोग मौजूद थे।
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आए दिन हो रहे आंदोलन
एटा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कोटा डीलरों द्वारा जिले में बीपीएल, अंत्योदय के अलावा एपीएल राशन कार्ड धारकों को राशन वितरण कराए जाने में बरती जा रही अनियमितता के चलते धरना प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं। इन शिकायतों को देखते हुए इन राशन डीलरों की मनमानी को रोकने के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती भी की गई, लेकिन उसके बाद भी शिकायतें कम नहीं हुई हैं।
790 हैं उचित दर की दुकानें
- जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 790 उचित दर दुकानें हैं, जिनके तहत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में राशन वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। इनमें से ही 71 उचित दर की दुकान शहरी नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में हैं।
पर्यवेक्षक भी नहीं संभाल पा रहे जिम्मेदारी
- उचित दर की दुकानों पर राशन बांटने के लिए लगाए गए पर्यवेक्षक ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल एवं सहायक विकास अधिकारी हैं जोकि अपने निर्देशन में इस कार्य को अंजाम नहीं देते बल्कि डीलरों से सांठगांठ के चलते इनकी हिस्सेदारी और बढ़ जाती है जिससे डीलर अपनी मनमानी जो चाहते हैं वहीं करते हैं।
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शनिवार की सुबह तीन-चार ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर गांव के सैकड़ों महिला पुरुष पहले जिलापूर्ति अधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। यहां हंगामा किया। बाद में जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे, यहां जिला पंचायत अध्यक्ष से मुलाकात नहीं हुई। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचे जहां एएसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या रखी। ग्रामीण मुन्नालाल ने बताया कि दुकान काफी समय से निलंबित चल रही है। ग्रामीणों द्वारा कई बार राशन की दुकान को निरस्त कर चुनाव कराने की मांग की गई है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस दौरान उन्होंने राशन डीलर पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व डीलर उन्हें लगातार धमकियां दे रहा है। वहीं राशन भी नहीं मिल रहा। एसडीएम अजीत कुमार सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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इस मौके पर विनोद कुमार, मुकेशचंद, रामखिलाड़ी, दिनेश कुमार, रमेशचंद्र, किशोरी लाल, रणधीर सिंह, विवेक कुमार, सुम्मेर सिंह, रजनेश, इंद्रपाल, संजू यादव, मुकेशचंद्र, सुशील, राजीव कुमार, दौजीराम, नाथूराम, चंद्रप्रकाश आदि लोग मौजूद थे।
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आए दिन हो रहे आंदोलन
एटा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कोटा डीलरों द्वारा जिले में बीपीएल, अंत्योदय के अलावा एपीएल राशन कार्ड धारकों को राशन वितरण कराए जाने में बरती जा रही अनियमितता के चलते धरना प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं। इन शिकायतों को देखते हुए इन राशन डीलरों की मनमानी को रोकने के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती भी की गई, लेकिन उसके बाद भी शिकायतें कम नहीं हुई हैं।
790 हैं उचित दर की दुकानें
- जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 790 उचित दर दुकानें हैं, जिनके तहत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में राशन वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। इनमें से ही 71 उचित दर की दुकान शहरी नगर पालिका एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में हैं।
पर्यवेक्षक भी नहीं संभाल पा रहे जिम्मेदारी
- उचित दर की दुकानों पर राशन बांटने के लिए लगाए गए पर्यवेक्षक ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल एवं सहायक विकास अधिकारी हैं जोकि अपने निर्देशन में इस कार्य को अंजाम नहीं देते बल्कि डीलरों से सांठगांठ के चलते इनकी हिस्सेदारी और बढ़ जाती है जिससे डीलर अपनी मनमानी जो चाहते हैं वहीं करते हैं।