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Etah News: पुरानी दरों पर भूमि अधिग्रहण से ग्रामीणों में आक्रोश
Wed, 18 Mar 2026 11:49 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 18 Mar 2026 11:49 PM IST
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मिरहची। एटा-कासगंज रेलवे लाइन विस्तार के लिए पुरानी दरों पर भूमि अधिग्रहण किए जाने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने कहा जिन 20 गांव में भूमि अधिग्रहण किया जाना है और बाकी के अन्य गांव के सर्किल रेट में दस लाख रुपये का अंतर है। इसलिए पहले सर्किल रेट में संशोधन के बाद भूमि अधिग्रहण किया जाए।
भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर मंगलवार को क्षेत्र के गांव कल्यानपुर में पंचायत हुई, इसमें मौजूद विधायक वीरेंद्र लोधी को लोगों ने बताया कि रेल विस्तार के लिए जिन बीस गांव की 110 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहण की जानी है उनका सर्किल रेट 28 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर है और अन्य गांव का सर्किल रेट 38 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर है। कुछ ऐसे किसान हैं जो भूमि अधिग्रहण के बाद भूमिहीन हो जाएंगे। किसान खेती में साल में तीन-तीन फसलों की पैदावार कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण के बाद उनके सामने बहुत बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। इसलिए भूमि अधिग्रहण का मुआवजा कम से कम 45 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर दिया जाना चाहिए।
खतौनी में नामांतरण प्रक्रिया शुद्ध की जाए
लोगों ने विधायक को बताया अधिकांश खेतों में तीसरी पीढ़ी काबिज है, खतौनी में नामांतरण न होने पर तहसील अभिलेखों में पुराने नाम दर्ज हैं। ऐसे में मुआवजा में दिक्कत रहेगी। इसलिए पहले तहसील में खतौनी को शुद्ध किया जाए। रेलवे लाइन के विस्तार में अंडरपास निर्माण ग्रामीणों की सहमति से किया जाए। जिन किसानों की भूमि आबादी क्षेत्र में हैं उनको आबादी क्षेत्र का मुआवजा दिया जाए।
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भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर मंगलवार को क्षेत्र के गांव कल्यानपुर में पंचायत हुई, इसमें मौजूद विधायक वीरेंद्र लोधी को लोगों ने बताया कि रेल विस्तार के लिए जिन बीस गांव की 110 हेक्टेअर भूमि अधिग्रहण की जानी है उनका सर्किल रेट 28 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर है और अन्य गांव का सर्किल रेट 38 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर है। कुछ ऐसे किसान हैं जो भूमि अधिग्रहण के बाद भूमिहीन हो जाएंगे। किसान खेती में साल में तीन-तीन फसलों की पैदावार कर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। भूमि अधिग्रहण के बाद उनके सामने बहुत बड़ा संकट पैदा हो जाएगा। इसलिए भूमि अधिग्रहण का मुआवजा कम से कम 45 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर दिया जाना चाहिए।
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खतौनी में नामांतरण प्रक्रिया शुद्ध की जाए
लोगों ने विधायक को बताया अधिकांश खेतों में तीसरी पीढ़ी काबिज है, खतौनी में नामांतरण न होने पर तहसील अभिलेखों में पुराने नाम दर्ज हैं। ऐसे में मुआवजा में दिक्कत रहेगी। इसलिए पहले तहसील में खतौनी को शुद्ध किया जाए। रेलवे लाइन के विस्तार में अंडरपास निर्माण ग्रामीणों की सहमति से किया जाए। जिन किसानों की भूमि आबादी क्षेत्र में हैं उनको आबादी क्षेत्र का मुआवजा दिया जाए।
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