Etah: वेंटीलेटर चले नहीं...फिर भी दो साल से तीन ऑपरेटर का निकलता रहा मानदेय, मरीज कर दिए जाते हैं रेफर
एटा में मेडिकल कॉलेज में लगाए गए वेंटीलेटर चले नहीं फिर भी दो साल से तीन ऑपरेटर का मानदेय निकलता रहा। यहां आने वाले गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
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उत्तर प्रदेश के एटा में दो वर्ष पूर्व मेडिकल कॉलेज के लिए दस वेंटीलेटर खरीदे गए थे। इससे गंभीर रोगी सहित कोरोना के मरीजों का इलाज हो सके। इसके लिए तीन ऑपरेटर भी शासन से तैनात किए गए, लेकिन जिले में इन वेंटीलेटरों का आज तक प्रयोग नहीं किया गया है। गंभीर बीमार और घायलों को आगरा-अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। दो घंटे का यह सफर भारी पड़ता है और कई मरीजों की आगरा पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। वेंटीलेटर दो वर्ष से शोपीस बने हुए हैं और कर्मचारियों का मानदेय निकल रहा है।
लाखों रुपये से खरीदे गए वेंटीलेटर
मेडिकल कॉलेज में संक्रमण की पहली लहर अप्रैल 2020 के बाद लाखों रुपये की लागत से वेंटीलेटर खरीदे गए थे। ताकि संक्रमण काल के समय और बाद में कॉलेज में आने वाले गंभीर रोगियों को जरूरत के मुताबिक वेंटीलेटर का प्रयोग कर उनका उपचार किया जा सके। वेंटीलेटर चलाने के लिए शासन से एनएचएम के माध्यम से तीन टेक्नीशियन को भेजा गया। ताकि वेंटीलेटर के संचालन में किसी तरह की कोई समस्या न आए। लेकिन, संक्रमण की स्थिति से लेकर अब तक जिम्मेदार इस पर सचेत नहीं हैं।
प्रतिदिन हो रहीं दुर्घटनाएं
मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. विवेक पाराशर ने बताया कि हालात तो यह है कि कोई भी गंभीर मरीज जिसे वेंटीलेटर की जरूरत होती है उसे चिकित्सक रेफर कर देते हैं। शहर से जीटी रोड निकला हुआ है। जिले में प्रतिदिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में लोग गंभीर चोटों के शिकार होते हैं, लेकिन इमरजेंसी से ऐसे मरीजों को भर्ती न कर रेफर कर दिया जाता है।
कॉलेज में नहीं हैं कोई संसाधन
बताया कि कुछ मरीजों की जान तो आगरा या अलीगढ़ पहुंचने से पहले ही चली जाती है। कॉलेज में कुछ संसाधन नहीं हैं। संसाधनों के अभाव में मरीज को दिक्कत न हो इसके लिए उनको रेफर कर देते हैं। वेंटीलेटर का प्रयोग एक भी मरीज पर नहीं हुआ, इसके संदर्भ में चिकित्सकों से बात की जाएगी।