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वास्तु शास्त्री राकेश जियोपेथिक स्ट्रेस से सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Tue, 30 Aug 2016 11:52 PM IST
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वास्तु शास्त्री राकेश
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नगर के वास्तु शास्त्री राकेश कुमार अग्रवाल को दिल्ली में सोमवार को जियो पेथिक स्ट्रेस उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह उपाधि नासा के परमाणु विज्ञानी डा. मीनियम मूर्ति संस्था की ओर से दी जाती है।
वास्तु शास्त्री राकेश अग्रवाल ने जियो पेथिक स्ट्रेस के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पृथ्वी पर भूचाल उस स्थिति में आता है, जब पृथ्वी के भीतर उच्च आवृति की ऊर्जा उत्पन्न होती है। जिसकी तीव्रता 200 हर्टस तक हो सकती हे। इस ऊर्जा को हाई मेन ग्रिड व कटी मेन ग्रिड के नाम से जाना जाता है। मनुष्य, वृक्ष, गाय, बकरी, ऊंट आदि के लिए 7.83 हर्टस आवृति ऊर्जा की जरुरत होती है। इससे अधिक ऊर्जा मनुष्य को नुकसान पहुंचाती है। यह ऊर्जा जमीन के अंदर पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम एवं दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व को चलकर जमीन के अंदर जाल का निर्माण करती है। जिस घर में यह ऊर्जा लाइन पाई जाती है, उससे मनुष्य को तमाम बीमारियों का दुष्परिणाम झेलना होता है। उन्होंने बताया कि सुबह के समय चार बजे से आठ बजे तक पृथ्वी में ऊर्जा का वेग कम रहता है। इससे सुबह के समय सुखद नींद लगती है। उन्होंने बताया कि आदमी मशीनों के माध्यम से मकान में ऊर्जा लाइन का पता लगा सकता है और उसके दुष्प्रभाव को विभिन्न विधियों से रोका भी जा सकता है।
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वास्तु शास्त्री राकेश अग्रवाल ने जियो पेथिक स्ट्रेस के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पृथ्वी पर भूचाल उस स्थिति में आता है, जब पृथ्वी के भीतर उच्च आवृति की ऊर्जा उत्पन्न होती है। जिसकी तीव्रता 200 हर्टस तक हो सकती हे। इस ऊर्जा को हाई मेन ग्रिड व कटी मेन ग्रिड के नाम से जाना जाता है। मनुष्य, वृक्ष, गाय, बकरी, ऊंट आदि के लिए 7.83 हर्टस आवृति ऊर्जा की जरुरत होती है। इससे अधिक ऊर्जा मनुष्य को नुकसान पहुंचाती है। यह ऊर्जा जमीन के अंदर पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम एवं दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व को चलकर जमीन के अंदर जाल का निर्माण करती है। जिस घर में यह ऊर्जा लाइन पाई जाती है, उससे मनुष्य को तमाम बीमारियों का दुष्परिणाम झेलना होता है। उन्होंने बताया कि सुबह के समय चार बजे से आठ बजे तक पृथ्वी में ऊर्जा का वेग कम रहता है। इससे सुबह के समय सुखद नींद लगती है। उन्होंने बताया कि आदमी मशीनों के माध्यम से मकान में ऊर्जा लाइन का पता लगा सकता है और उसके दुष्प्रभाव को विभिन्न विधियों से रोका भी जा सकता है।
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