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मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित करने के बदले रुपये मांगने का आरोप
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जिला अस्पताल में मेडीकल जांच के लिए लाइन में खड़े पीएसी के जवान ।
- फोटो : ETAH
एटा। पीएसी 43वीं वाहिनी के सन 2019 बैच के जवान अवकाश पर गए थे, यहां से लौटने पर उनके अवकाश के मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। यहां प्रति जवान से आठ से दस हजार रुपये की डॉक्टर द्वारा डिमांड की गई तो जवानों ने हंगामा खड़ा कर दिया। बाद में सीएमएस ने दो सदस्सीय मेडिकल बोर्ड का गठन कर जवानों के मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित करवाए। इसके बाद हंगामा शांत हो सका।
कासगंज रोड स्थित 43वीं वाहिनी पीएसी के करीब 150 जवान वर्ष 2019 में हुई भर्ती के बाद अवकाश लेकर अपने-अपने घर गए थे। यहां से कोई एक सप्ताह बाद लौटा तो कोई एक माह बाद। जब जवान मेडिकल प्रमाणपत्र लेकर बटालियन पहुंचे तो वहां कमांडेंट लालाराम ने उनसे मेडिकल प्रमाणपत्र को जिला अस्पताल से प्रमाणित कराकर लाने के आदेश दिए। सोमवार को जिला अस्पताल में सुबह करीब नौ बजे करीब 25 जवान अपना मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित कराने पहुंचे।
यहां डॉक्टर द्वारा प्रति जवान एक दिन के मेडिकल अवकाश को सत्यापित करने के दौ सौ रुपये मांगे। किसी का एक माह तो किसी का डेढ़ माह का अवकाश था। ज्यादा रकम मांगे जाने पर जवानों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। बात सीएमएस डॉ. आरके अग्रवाल पर पहुंची तो उन्होंने मामले में दो डॉक्टरों का पैनल बना दिया, इसके बाद करीब एक बजे बाद पुन: मेडिकल बोर्ड द्वारा जवानों के मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित किए गए।
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कासगंज रोड स्थित 43वीं वाहिनी पीएसी के करीब 150 जवान वर्ष 2019 में हुई भर्ती के बाद अवकाश लेकर अपने-अपने घर गए थे। यहां से कोई एक सप्ताह बाद लौटा तो कोई एक माह बाद। जब जवान मेडिकल प्रमाणपत्र लेकर बटालियन पहुंचे तो वहां कमांडेंट लालाराम ने उनसे मेडिकल प्रमाणपत्र को जिला अस्पताल से प्रमाणित कराकर लाने के आदेश दिए। सोमवार को जिला अस्पताल में सुबह करीब नौ बजे करीब 25 जवान अपना मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित कराने पहुंचे।
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यहां डॉक्टर द्वारा प्रति जवान एक दिन के मेडिकल अवकाश को सत्यापित करने के दौ सौ रुपये मांगे। किसी का एक माह तो किसी का डेढ़ माह का अवकाश था। ज्यादा रकम मांगे जाने पर जवानों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। बात सीएमएस डॉ. आरके अग्रवाल पर पहुंची तो उन्होंने मामले में दो डॉक्टरों का पैनल बना दिया, इसके बाद करीब एक बजे बाद पुन: मेडिकल बोर्ड द्वारा जवानों के मेडिकल प्रमाणपत्र सत्यापित किए गए।
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