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बारिश ने दिया पक्षी विहार की झील को अमृत
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पानी से भरी हुई पटना पक्षी विहार की झील। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। इस बार हुई झमाझम रिकॉर्ड बारिश ने पटना पक्षी विहार की झील को मानो अमृत दे दिया है। हर साल कम बारिश के चलते पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती थी। पिछले साल फिरोजाबाद की नहर से पानी मांगना पड़ा था। इस बार झील में बारिश का इतना पानी भर गया है, जो सर्दियों में आने वाले मेहमान परिंदों के लिए पर्याप्त होगा। 30 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली इस झील की सुंदरता बढ़ गई है।
पक्षी विहार की झील की बनावट इस तरह की है जिससे आसपास के क्षेत्र और कई गांव का पानी इसमें आकर समा जाता है, लेकिन जलेसर क्षेत्र में आमतौर पर मानसून कमजोर रहता है। जिसके चलते पिछले कई वर्षों में झील में पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है। 2020 में तो हालात यह थे कि पक्षियों के आने के ठीक पहले तक झील में सिर्फ 40 फीसद पानी उपलब्ध था। ऐसे में फिरोजाबाद सिंचाई विभाग से मदद मांगी गई और माइनर से यहां पानी उपलब्ध कराया गया था। इस साल जबरदस्त मानसून ने इस तरह की स्थिति आने से बचा लिया। झील पानी से लबालब हो गई है।
आते हैं 60 हजार से अधिक पक्षी
पक्षी विहार में सामान्य तौर पर 60 हजार से अधिक पक्षी आते हैं। अक्तूबर के अंत से उनका आगमन शुरू हो जाता है, जो फरवरी तक डेरा डाले रहते हैं। इनमें किंगफिशर, सोवलर, पिटेल, कॉमन टील, कॉटन टील, विसलिग टील, ग्रेलेग गूज, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, कॉम डक, स्कॉट बिल, कूट, ब्रह्मनी डक, आइविश, ब्लैक आई विश, पैंटेड स्टोर्क, ब्लैक नैक स्टोर्क, व्हाइट नैक स्टोर्क, पर्पल मोर हैन, जयकान, डबचिक, स्नेक बर्ड, कॉमन मोर हैन, राजहंस, बार हैडेड गूज, नीलसर आदि देसी-विदेशी प्रजाति के पक्षी शामिल रहते हैं।
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पिछले वर्ष से करीब दोगुनी हुई बारिश
जलेसर तहसील क्षेत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार करीब दोगुनी बारिश हो चुकी है। 2020 में मई से अगस्त तक 338 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जबकि इस साल मई से अब तक 645 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
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पक्षी विहार की झील की बनावट इस तरह की है जिससे आसपास के क्षेत्र और कई गांव का पानी इसमें आकर समा जाता है, लेकिन जलेसर क्षेत्र में आमतौर पर मानसून कमजोर रहता है। जिसके चलते पिछले कई वर्षों में झील में पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है। 2020 में तो हालात यह थे कि पक्षियों के आने के ठीक पहले तक झील में सिर्फ 40 फीसद पानी उपलब्ध था। ऐसे में फिरोजाबाद सिंचाई विभाग से मदद मांगी गई और माइनर से यहां पानी उपलब्ध कराया गया था। इस साल जबरदस्त मानसून ने इस तरह की स्थिति आने से बचा लिया। झील पानी से लबालब हो गई है।
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आते हैं 60 हजार से अधिक पक्षी
पक्षी विहार में सामान्य तौर पर 60 हजार से अधिक पक्षी आते हैं। अक्तूबर के अंत से उनका आगमन शुरू हो जाता है, जो फरवरी तक डेरा डाले रहते हैं। इनमें किंगफिशर, सोवलर, पिटेल, कॉमन टील, कॉटन टील, विसलिग टील, ग्रेलेग गूज, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, कॉम डक, स्कॉट बिल, कूट, ब्रह्मनी डक, आइविश, ब्लैक आई विश, पैंटेड स्टोर्क, ब्लैक नैक स्टोर्क, व्हाइट नैक स्टोर्क, पर्पल मोर हैन, जयकान, डबचिक, स्नेक बर्ड, कॉमन मोर हैन, राजहंस, बार हैडेड गूज, नीलसर आदि देसी-विदेशी प्रजाति के पक्षी शामिल रहते हैं।
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पिछले वर्ष से करीब दोगुनी हुई बारिश
जलेसर तहसील क्षेत्र में पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार करीब दोगुनी बारिश हो चुकी है। 2020 में मई से अगस्त तक 338 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जबकि इस साल मई से अब तक 645 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।