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Etah News: बिना दमकल की एनओसी के संचालित हो रही एसएनसीयू
Mon, 27 May 2024 11:27 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 27 May 2024 11:27 PM IST
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एटा। एमसीएच भवन में द्वितीय तल पर नवजात को भर्ती करने के लिए सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) बनी है। इसमें नवजात बच्चों को भर्ती करने के लिए वार्मर लगे हैं। यहां आग से बचाव के उपकरण तो लगाए गए। लेकिन दमकल विभाग की अब तक एनओसी नहीं मिली है। कारण भवन के चारों तरफ दमकल विभाग की गाड़ी नहीं घूम पाएगी। जबकि एमसीएच विंग को संचालित हुए 3 वर्ष का समय पूरा हो चुका है।
कोरोना संक्रमण के समय एमसीएच भवन में पीकू वार्ड बनाया गया। उस समय भवन निर्माणाधीन था, लेकिन तीन मंजिल तक स्वास्थ्य विभाग ने इसे ले रखा था। बाद में कॉलेज की मान्यता हुई तो यहां भूतल पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग संचालित कर दिया गया। प्रथम तल पर लैब, सहित ओपीडी, द्वितीय पर पीकू वार्ड व तृतीय मंजिल पर मेडिसन वार्ड संचालित हो गया। करीब दो वर्ष पूर्व द्वितीय तल पर नवजात को भर्ती करने के लिए एसएनसीयू वार्ड बना दिया गया। भवन में आग से बचाव के उपकरण तो लगाए गए, लेकिन यह उपकरण शोपीस बने हुए हैं। अगर आगजनी की घटना हुई तो यह चालू ही नहीं होगें।
किसी का पाइप अलग है तो किसी में अन्य समस्या है। इसी वजह से दमकल विभाग की एनओसी आज तक नहीं मिल पाई। एक तरफ जर्जर कमरा रास्ते में आ रहा है। ऐसे में दमकल विभाग ने अब तक एनओसी नहीं दी है। फिलहाल अन्य विभाग तो मेडिकल कॉलेज के नए भवन में शिफ्ट कर लिए गए हैं। लेकिन एसएनसीयू एमसीएच भवन में ही संचालित हो रही है। अगर यहां आगजनी की घटना हुई तो हालात विकराल हो जाएंगे।
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19 नवजात थे भर्ती
सोमवार को एसएनसीयू वार्ड में 19 नवजात भर्ती थे। एक वार्मर पर दो नवजात लेटे थे। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया यह दोनों जुड़वां हैं। अन्य सभी पर एक ही एक नवजात भर्ती है। 12 वार्मर के बारे में बताया अन्य की व्यवस्था कर ली गई है।
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एमसीएच भवन में आग से बचाव के जो उपकरण लगे हैं वो क्रियाशील नहीं है। भवन को एनओसी नहीं मिली है। बीते दिनों उपकरण क्रियाशील न होने के संबंध में जानकारी दे दी गई थी।
केतन कुमार, एफएसओ
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एमसीएच विंग में लगे उपकरण क्रियाशील नहीं है इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में सीएमएस से बात की जाएगी।
डॉ. रजनी पटेल, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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कोरोना संक्रमण के समय एमसीएच भवन में पीकू वार्ड बनाया गया। उस समय भवन निर्माणाधीन था, लेकिन तीन मंजिल तक स्वास्थ्य विभाग ने इसे ले रखा था। बाद में कॉलेज की मान्यता हुई तो यहां भूतल पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग संचालित कर दिया गया। प्रथम तल पर लैब, सहित ओपीडी, द्वितीय पर पीकू वार्ड व तृतीय मंजिल पर मेडिसन वार्ड संचालित हो गया। करीब दो वर्ष पूर्व द्वितीय तल पर नवजात को भर्ती करने के लिए एसएनसीयू वार्ड बना दिया गया। भवन में आग से बचाव के उपकरण तो लगाए गए, लेकिन यह उपकरण शोपीस बने हुए हैं। अगर आगजनी की घटना हुई तो यह चालू ही नहीं होगें।
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किसी का पाइप अलग है तो किसी में अन्य समस्या है। इसी वजह से दमकल विभाग की एनओसी आज तक नहीं मिल पाई। एक तरफ जर्जर कमरा रास्ते में आ रहा है। ऐसे में दमकल विभाग ने अब तक एनओसी नहीं दी है। फिलहाल अन्य विभाग तो मेडिकल कॉलेज के नए भवन में शिफ्ट कर लिए गए हैं। लेकिन एसएनसीयू एमसीएच भवन में ही संचालित हो रही है। अगर यहां आगजनी की घटना हुई तो हालात विकराल हो जाएंगे।
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19 नवजात थे भर्ती
सोमवार को एसएनसीयू वार्ड में 19 नवजात भर्ती थे। एक वार्मर पर दो नवजात लेटे थे। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया यह दोनों जुड़वां हैं। अन्य सभी पर एक ही एक नवजात भर्ती है। 12 वार्मर के बारे में बताया अन्य की व्यवस्था कर ली गई है।
एमसीएच भवन में आग से बचाव के जो उपकरण लगे हैं वो क्रियाशील नहीं है। भवन को एनओसी नहीं मिली है। बीते दिनों उपकरण क्रियाशील न होने के संबंध में जानकारी दे दी गई थी।
केतन कुमार, एफएसओ
एमसीएच विंग में लगे उपकरण क्रियाशील नहीं है इसकी जानकारी नहीं है। इस बारे में सीएमएस से बात की जाएगी।
डॉ. रजनी पटेल, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज