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शुद्ध पानी के नाम पर गटक रहे बीमारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Apr 2017 10:50 PM IST
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वॉटर पैकिंग प्लांट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सावधान! दो रुपये में बाजार में मिलने वाली पानी की थैली भले की कुछ देर के लिए आपका गला तर कर दे, लेकिन सेहत के लिए खतरनाक है। जी हां जिले में आरओ-मिनरल वाटर के नाम पर लोगों को बीमारियां परोसी जा रही हैं। गली-मोहल्लों में बिना लाइसेंस के चल रहे वॉटर पैकिंग प्लांट का पानी अशुद्ध है। जिले भर में चार दर्जन से अधिक वाटर पैकिंग प्लांट प्लास्टिक के पाउच में पैक्ड पानी बेच कर अपनी जेब भर रहे हैं और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
पानी के पाउच और पानी की बोतलें शहर के मुख्य चौराहों पीपल अड्डा, ठंडी सड़क, नन्नूमल चौराहा, शिकोहाबाद रोड, अलीगंज अड्डा, कासगंज रोड, आगरा रोड के अलावा रोडवेज व प्राइवेट बस स्टैंडों समेत पूरे शहर में बिक रहा है। होटल और ढाबों में भी इनकी खासी खपत है। पानी के पैक्ड पाउच और बोतलों पर प्लांट संचालक न तो पैकिंग की तिथि अंकित कर रहे हैं और न ही उनके एक्सपायर होने की तिथि का उल्लेख है। वैसे तो पैकेज्ड वाटर प्लांट संचालित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने मानक तय किए हैं, लेकिन नियम कानून का ध्यान तब रखा जाए जब जिले में किसी ने पैक्ड पानी बेचने का लाइसेंस लिया हो। जिले में महज 18 लोगों के पास खुला पानी बेचने का लाइसेंस है।
यह हैं मानक
भारतीय मानक ब्यूरो ने पैकेज्ड पानी प्लांट संचालन के लिए नियम लागू किए हैं। इसके तहत प्लांट में पानी की नियमित चेकिंग के लिए एक निजी लैब और लैब टेक्नीशियन की तैनाती, पानी का टैंक और पाइप स्टील के होने चाहिए। भूजल दोहन के लिए संबंधित स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। लेकिन जिले में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लिए बिना पैक्ड पानी बिक रहा है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की माने तो बिना लाइसेंस के पैक्ड पानी बेचने की जांच में सैंपल अनसेफ मिला तो छह महीने की जेल और पांच लाख रुपये जुर्माना, जांच में सब स्टेंडर्ड पानी मिलने पर पांच लाख जुर्माना हो सकता है। जबकि मिसब्रॉंड पानी बेचने पर तीन लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
मिनरल वाटर और पानी के पाउच प्लांट के लिए पहले भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लेना होता है। जिले में किसी के पास पानी पैक कर बेचने का लाइसेंस नहीं है। कई बार अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। पिछले वर्ष में तीन प्लांट सीज हुए हैं। जल्द ही प्लांटोें के अवैध संचालन को लेकर अभियान चलेगा।
अपूर्व श्रीवास्तव, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग एटा
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पानी के पाउच और पानी की बोतलें शहर के मुख्य चौराहों पीपल अड्डा, ठंडी सड़क, नन्नूमल चौराहा, शिकोहाबाद रोड, अलीगंज अड्डा, कासगंज रोड, आगरा रोड के अलावा रोडवेज व प्राइवेट बस स्टैंडों समेत पूरे शहर में बिक रहा है। होटल और ढाबों में भी इनकी खासी खपत है। पानी के पैक्ड पाउच और बोतलों पर प्लांट संचालक न तो पैकिंग की तिथि अंकित कर रहे हैं और न ही उनके एक्सपायर होने की तिथि का उल्लेख है। वैसे तो पैकेज्ड वाटर प्लांट संचालित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने मानक तय किए हैं, लेकिन नियम कानून का ध्यान तब रखा जाए जब जिले में किसी ने पैक्ड पानी बेचने का लाइसेंस लिया हो। जिले में महज 18 लोगों के पास खुला पानी बेचने का लाइसेंस है।
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यह हैं मानक
भारतीय मानक ब्यूरो ने पैकेज्ड पानी प्लांट संचालन के लिए नियम लागू किए हैं। इसके तहत प्लांट में पानी की नियमित चेकिंग के लिए एक निजी लैब और लैब टेक्नीशियन की तैनाती, पानी का टैंक और पाइप स्टील के होने चाहिए। भूजल दोहन के लिए संबंधित स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है। लेकिन जिले में भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लिए बिना पैक्ड पानी बिक रहा है।
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खाद्य सुरक्षा विभाग की माने तो बिना लाइसेंस के पैक्ड पानी बेचने की जांच में सैंपल अनसेफ मिला तो छह महीने की जेल और पांच लाख रुपये जुर्माना, जांच में सब स्टेंडर्ड पानी मिलने पर पांच लाख जुर्माना हो सकता है। जबकि मिसब्रॉंड पानी बेचने पर तीन लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
मिनरल वाटर और पानी के पाउच प्लांट के लिए पहले भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लेना होता है। जिले में किसी के पास पानी पैक कर बेचने का लाइसेंस नहीं है। कई बार अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। पिछले वर्ष में तीन प्लांट सीज हुए हैं। जल्द ही प्लांटोें के अवैध संचालन को लेकर अभियान चलेगा।
अपूर्व श्रीवास्तव, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग एटा