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UP: सात साल कैद में रखा...इंसानों की खरीद-फरोख्त करने वाला रैकेट सक्रिय, ये लोग निशाने पर; जानें पूरा मामला

Mon, 28 Apr 2025 09:32 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Published by: अरुन पाराशर Updated Mon, 28 Apr 2025 09:32 PM IST
सार

लोगों को कैद में रखने वाला रैकेट सक्रिय है। सात साल बाद ऐसे ही रैकेट की पकड़ से छूटकर आए युवक ने इसका खुलासा किया। उसने बताया कि बिजनाैर में सात साल तक बंधुआ बनकर रहा। और भी कई लोग ऐसे ही फंसे हुए हैं।

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Racket involved in buying and selling of human beings is active these people are on target
बंधक - फोटो : iStock

विस्तार

एटा के मिरहची थाना क्षेत्र के गांव जिन्हैरा का युवक सात साल तक मुजफ्फरनगर और बिजनौर में बंधुआ बनकर रहा। बमुश्किल उनसे छूटकर आ सका। यहां आकर उसने जो दास्तां बताई है, वो रोंगटे खड़ी करने वाली है। दोनों स्थानों पर रैकेट चल रहे हैं और तमाम लोगों को बंधुआ बनाकर मुफ्त में मजदूरी कराई जा रही है।
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ओमवीर राघव का पुत्र सूरजभान सात साल पहले दिल्ली में नौकरी की तलाश में गया था। वहां सुभाष प्लेस थाना क्षेत्र के श्रीनगर की शकूर बस्ती में रहकर मेहनत-मजदूरी करने लगा था। यहां से 25 नवंबर 2018 को वह अचानक लापता हो गया। 27 नवंबर को इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दी, लेकिन उसका सुराग नहीं लग सका। 

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कुछ दिन पहले किसी के माध्यम से परिजन को युवक के बिजनौर में होने की जानकारी मिली तो वहां पहुंचे। स्थानीय पुलिस की मदद से सूरजभान को मुक्त कराकर रविवार को यहां ले आए। सूरजभान ने बताया कि दिल्ली में बिहार के एक लड़के से जान-पहचान हुई थी। वह पार्टी के बहाने रेलवे स्टेशन के पास ले गया। यहां एक गाड़ी आई, इसमें बैठा दिया। इसके बाद ये लोग मुजफ्फरनगर ले गए। 

 
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वहां एक डेयरी में बंधक बना दिया गया। भैंसों से संबंधित सफाई आदि का काम सुबह से शाम तक कराया जाता था। खाने को बहुत कम खाना मिलता था। काम की मना करने पर पीटा जाता था। 2023 में गांव का ही एक लड़का वहां बाहर से कुछ काम करने आया। एक ही गांव का होने पर बातचीत की और मोबाइल में फोटो ले आया, लेकिन गांव में नहीं बताया।

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सूरजभान ने बताया कि भनक लगने पर उसे वहां से हटाकर बिजनौर में रफीक अहमद की डेयरी पर भेज दिया गया। वहां भी कई लोगों को बंधुआ बनाकर मजदूरी कराई जा रही थी। गांव के उस लड़के ने अभी कुछ दिन पहले गांव आकर जानकारी दी। इस पर परिजन बिजनौर पहुंचे और मुक्त कराया। रविवार रात के समय दिल्ली पुलिस आई और सूरजभान व परिजन के बयान दर्ज कर ले गई है।

 

मानसिक रूप से कमजोर लोग निशाने पर
इस गैंग के निशाने पर मानसिक रूप से कमजोर लोग रहते हैं। ताकि ये लोग भागने और किसी को कुछ बताने की कोशिश न कर सकें। यात्नाओं से डरकर बंधुआ मजदूरी करते रहें।

50 हजार से 1.50 लाख रुपये में खरीद-फरोख्त
सूरजभान की भाभी पूजा ने बताया कि गैंग के सदस्य दिल्ली व अन्य शहरों में फैले हुए हैं जो भूले-भटके, मानसिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं। उन्हें ले जाकर 50 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता है। 

सीओ सदर संजय कुमार सिंह ने बताया कि मामला गंभीर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पीड़ित के परिजन ने कोई सूचना नहीं दी है। जानकारी कर मामले की जांच कराई जाएगी। 
 
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