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पुलिस भर्ती की टॉपर अंतिमा सिंह ने समाज को दिया संदेश
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पुलिस में चयनित अंतमा को मिठाई खिलाती बुआ
- फोटो : ETAH
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एटा। आज के युग में समाज में प्रत्येक माता-पिता अपनी बेटियों को खुलकर जीने की आजादी दें। समाज में प्रत्येक कार्य करने के लिए उन्हें मौका मिले तो देश की बेटियां किसी से कम नहीं। समाज बेटियों को पुलिस में भर्ती कराने से डरते हैं। बेटा-बेटी में फर्क करते हैं। यह संदेश पुलिस भर्ती में टॉपर अंतिमा सिंह ने दिया।
पुलिस भर्ती-2019 में हरदोई निवासी अंतिमा सिंह ने टॉप किया है। अंतिमा वर्तमान में डायट एटा में डीएलएड प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। 2019 में ग्रेजुएशन पास आउट करने के बाद उन्होंने डीएलएड में प्रवेश लिया। इससे पहले 2018 में भी अंतिमा ने पुलिस भर्ती की परीक्षा दी थी लेकिन वह दौड़ में पीछे रह गई थी। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में 300 में से 248 अंक हासिल टॉप किया।
पिता हैं किसान
अंतिमा के पिता सुनील कुमार किसान हैं। उन्होंने बेटी को कर्ज लेकर पढ़ाया और उसको आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंतिमा की मां अनीता सिंह गृहणी हैं और उनकी बड़ी बहन सुरभि सिंह पुलिस में हैं। अपनी बड़ी बहन को देखकर ही उन्होंने स्वयं भी पुलिस में भर्ती होने का फैसला लिया।
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लक्ष्य अभी बाकी
अंतिमा सिंह ने बताया कि प्रत्येक विषय के नोट्स बनाकर प्रतिदिन अभ्यास करती थी। कोचिंग और घर पर कुल मिलाकर प्रतिदिन सात घंटे पढ़ाई हो जाती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस में सिर्फ कांस्टेबल पद पर जॉब लेना ही उनका मकसद नहीं हैं। उन्हें और मेहनत कर उच्चस्तर मुकाम हासिल करना है।
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पुलिस भर्ती-2019 में हरदोई निवासी अंतिमा सिंह ने टॉप किया है। अंतिमा वर्तमान में डायट एटा में डीएलएड प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। 2019 में ग्रेजुएशन पास आउट करने के बाद उन्होंने डीएलएड में प्रवेश लिया। इससे पहले 2018 में भी अंतिमा ने पुलिस भर्ती की परीक्षा दी थी लेकिन वह दौड़ में पीछे रह गई थी। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में 300 में से 248 अंक हासिल टॉप किया।
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पिता हैं किसान
अंतिमा के पिता सुनील कुमार किसान हैं। उन्होंने बेटी को कर्ज लेकर पढ़ाया और उसको आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंतिमा की मां अनीता सिंह गृहणी हैं और उनकी बड़ी बहन सुरभि सिंह पुलिस में हैं। अपनी बड़ी बहन को देखकर ही उन्होंने स्वयं भी पुलिस में भर्ती होने का फैसला लिया।
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लक्ष्य अभी बाकी
अंतिमा सिंह ने बताया कि प्रत्येक विषय के नोट्स बनाकर प्रतिदिन अभ्यास करती थी। कोचिंग और घर पर कुल मिलाकर प्रतिदिन सात घंटे पढ़ाई हो जाती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस में सिर्फ कांस्टेबल पद पर जॉब लेना ही उनका मकसद नहीं हैं। उन्हें और मेहनत कर उच्चस्तर मुकाम हासिल करना है।